Ladakh Stone Dam: बिना सीमेंट-कंक्रीट के बना देश का अनोखा बांध, लद्दाख में 10 फीट तक बढ़ा सिंधु का जलस्तर
Ladakh Stone Dam, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर जारी विवाद के बीच लद्दाख से एक अहम खबर सामने आई है। भारत ने सिंधु नदी पर लद्दाख के लेह जिले के उपशी में अपना पहला रॉक चेक डैम तैयार किया है। खास बात यह है कि इस बांध को बनाने में सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
Ladakh Stone Dam : पाकिस्तान के बीच भारत ने बढ़ाई जल सुरक्षा, लद्दाख में पत्थरों से बनाया बांध; बढ़ा जलस्तर
Ladakh Stone Dam, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर जारी विवाद के बीच लद्दाख से एक अहम खबर सामने आई है। भारत ने सिंधु नदी पर लद्दाख के लेह जिले के उपशी में अपना पहला रॉक चेक डैम तैयार किया है। खास बात यह है कि इस बांध को बनाने में सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। प्राकृतिक बड़े-बड़े पत्थरों से तैयार इस संरचना ने नदी के पानी का स्तर करीब 10 फीट तक बढ़ा दिया है और लगभग 4 करोड़ लीटर पानी जमा करने की क्षमता पैदा की है। यह परियोजना ऐसे समय में सामने आई है, जब सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। हालांकि, लद्दाख प्रशासन के मुताबिक इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जल सुरक्षा, सिंचाई और कृषि को मजबूत करना है। इसे पर्यावरण के लिहाज से भी अनुकूल और कम लागत वाला समाधान बताया गया है।

उपशी में बना देश का पहला रॉक चेक डैम
लद्दाख के उपशी में तैयार किया गया यह रॉक चेक डैम लेह से करीब 44 किलोमीटर दूर और लगभग 11,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे सिंधु नदी के एक ऐसे हिस्से में बनाया गया है, जहां नदी का प्रवाह अपेक्षाकृत उथला है और आसपास के खेतों तक पानी पहुंचाना किसानों के लिए चुनौती रहा है। लद्दाख प्रशासन ने मई 2026 में इस परियोजना का उद्घाटन किया था। इस परियोजना को ‘सिंधु जल समृद्धि अभियान’ (Sindhu Jal Samriddhi Abhiyan) के तहत विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य सिंधु नदी के पानी को स्थानीय जरूरतों के लिए अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करना है।
सीमेंट-कंक्रीट नहीं, सिर्फ बड़े पत्थरों से निर्माण
इस बांध की सबसे खास बात इसकी निर्माण तकनीक है। इसे पारंपरिक सीमेंट-कंक्रीट से नहीं बनाया गया है। इसके बजाय नदी के तल और आसपास के इलाकों से जुटाए गए बड़े-बड़े पत्थरों को आपस में इंटरलॉक करके संरचना तैयार की गई है। प्रशासन के मुताबिक करीब 180 मीट्रिक टन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया, जिनका वजन लगभग 500 किलोग्राम से लेकर 10 टन तक था। रॉक चेक डैम का निर्माण महज सात दिनों में पूरा किया गया था। इसकी लंबाई करीब 200 फीट है, जबकि नदी तल पर इसकी आधार चौड़ाई लगभग 30 फीट और ऊपरी हिस्सा करीब 15 फीट चौड़ा है। डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि पानी का प्रवाह बढ़ने पर भी संरचना पर दबाव नियंत्रित रहे।
10 फीट तक बढ़ा पानी का स्तर
रॉक चेक डैम बनने के बाद इसके पीछे नदी में एक बड़ा जल क्षेत्र तैयार हुआ है। प्रशासन के अनुसार करीब 1,500 फीट यानी लगभग 500 मीटर तक पानी का जमाव क्षेत्र बना है। इसमें करीब 40 मिलियन लीटर यानी 4 करोड़ लीटर पानी जमा हो सकता है।रिपोर्टों के अनुसार किनारों पर पानी की गहराई करीब 4 से 5 फीट है, जबकि नदी के बीच में यह गहराई लगभग 10 फीट तक पहुंच रही है। इससे उन किसानों को फायदा मिल सकता है जिन्हें पहले नदी के कम जलस्तर के कारण सिंचाई के लिए पानी उठाने में परेशानी होती थी।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
लद्दाख में खेती की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पानी की उपलब्धता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खेती का मौसम छोटा होता है और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलना बेहद जरूरी होता है। कई जगहों पर सिंधु नदी बहती तो है, लेकिन गहरी घाटियों और कम जलस्तर के कारण पंप के जरिए पानी खेतों तक पहुंचाना आसान नहीं था।रॉक चेक डैम नदी के बहाव की गति को कम करता है और पीछे पानी का एक बड़ा क्षेत्र तैयार करता है। इस तरह पंपों के जरिए पानी उठाना आसान हो जाता है। जमा पानी को इगू-पेह सिंचाई नहर के जरिए आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इससे लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे खेतों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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सिंधु जल संधि विवाद के बीच क्यों चर्चा में है?
इस परियोजना की चर्चा इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को ‘abeyance’ में रखने का फैसला किया था। भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को समर्थन बंद किए जाने तक संधि से जुड़ी स्थिति में बदलाव नहीं होगा।हाल में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत की स्थिति पर फैसला दिया, लेकिन भारत ने इस प्रक्रिया और उसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मध्यस्थता व्यवस्था को मान्यता नहीं देती। ऐसे माहौल में सिंधु नदी के भारतीय हिस्से में जल संरक्षण और सिंचाई से जुड़ी नई परियोजनाएं रणनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में आ रही हैं। हालांकि, लद्दाख प्रशासन इस रॉक चेक डैम को मुख्य रूप से स्थानीय जल संकट और कृषि जरूरतों से जोड़कर देखता है।
आगे 36 चेक डैम बनाने की तैयारी
उपशी की परियोजना के सकारात्मक परिणामों के बाद लद्दाख प्रशासन अब ऐसी कई और संरचनाएं बनाने की तैयारी कर रहा है। अगस्त 2026 में प्रशासन ने केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के सामने 36 चेक डैम परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है।इस प्रस्ताव में लेह क्षेत्र के लिए 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल क्षेत्र के लिए 29 RCC चेक डैम/वीयर शामिल हैं। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। प्रशासन के अनुसार पायलट रॉक चेक डैम से औसतन 2.5 से 3 करोड़ लीटर पानी का भंडारण संभव हुआ है और बढ़े हुए नदी प्रवाह के दौरान भी इनकी मजबूती के अच्छे परिणाम मिले हैं।
पानी बचाने के साथ पर्यावरण पर भी जोर
लद्दाख जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में किसी भी बड़े निर्माण का पर्यावरण पर असर महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से प्राकृतिक पत्थरों से तैयार रॉक चेक डैम को अपेक्षाकृत पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के तौर पर पेश किया गया है।प्रशासन के अनुसार यह संरचना नदी के पानी को पूरी तरह रोकने के बजाय उसके बहाव को धीमा करती है। अतिरिक्त पानी आगे बहता रहता है, जबकि पीछे पर्याप्त पानी का भंडारण क्षेत्र बन जाता है। इससे सिंचाई के साथ-साथ स्थानीय जल सुरक्षा को भी मजबूत करने में मदद मिलती है।
आने वाले समय में बढ़ सकता है स्थानीय जल भंडारण
लद्दाख प्रशासन की योजनाओं से साफ है कि आने वाले समय में सिंधु और अन्य जल स्रोतों के पानी का स्थानीय उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अगस्त में प्रशासन ने यह भी बताया था कि लद्दाख में हर साल बर्फ और ग्लेशियर पिघलने से बड़ी मात्रा में पानी उपलब्ध होता है, लेकिन उसका बहुत छोटा हिस्सा ही वर्तमान में इस्तेमाल हो पाता है। ऐसे में रॉक चेक डैम जैसी कम लागत वाली परियोजनाएं स्थानीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। उपशी का प्रयोग सफल रहने के बाद यदि अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की संरचनाएं तैयार होती हैं तो इससे सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने और पानी की मौसमी कमी कम करने में मदद मिल सकती है।कुल मिलाकर, लद्दाख के उपशी में बना यह बिना सीमेंट-कंक्रीट वाला रॉक चेक डैम जल संरक्षण और कृषि के लिहाज से एक अनोखा प्रयोग है। करीब 10 फीट तक जलस्तर बढ़ाने और 4 करोड़ लीटर पानी जमा करने की क्षमता वाली इस परियोजना ने दिखाया है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पारंपरिक निर्माण के बजाय प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके भी जल सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।
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