IT companies: ट्रंप के PERM प्रोग्राम पर एक्शन के बाद TCS का बयान, कहा- हमारी भर्ती रणनीति पर असर नहीं
IT companies, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि PERM प्रोग्राम पर रोक से उसकी वर्कफोर्स रणनीति और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
IT companies : ट्रंप के ग्रीन कार्ड फैसले के बीच TCS ने दी सफाई, कहा- कारोबार और भर्ती पर असर की उम्मीद नहीं
IT companies, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि PERM प्रोग्राम पर रोक से उसकी वर्कफोर्स रणनीति और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन की संख्या इकाई अंकों यानी सिंगल डिजिट में रही है।कंपनी के मुताबिक, अमेरिका में उसकी भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देने पर केंद्रित है। इसके लिए TCS कैंपस रिक्रूटमेंट मॉडल का भी इस्तेमाल करती है। कंपनी ने कहा कि वह अमेरिकी बाजार में अपनी मौजूदगी और स्थानीय कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम करती रहेगी।
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अगले पांच वर्षों में 15 हजार अमेरिकियों को नौकरी देने का लक्ष्य
TCS ने दोहराया है कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों को नियुक्त करने की योजना पर कायम है। कंपनी इस भर्ती के जरिए अपनी स्थानीय वर्कफोर्स को मजबूत करना चाहती है।इस घोषणा को ट्रंप प्रशासन की उस नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों से जुड़े इमिग्रेशन कार्यक्रमों के दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के अवसर प्रभावित होने के आरोपों के आधार पर कार्रवाई की है।हालांकि, TCS की 15,000 लोगों की भर्ती योजना को सीधे तौर पर अमेरिकी सरकार के फैसले के जवाब में लिया गया नया निर्णय नहीं कहा जा सकता। कंपनी ने इसे अपनी पहले से घोषित पांच वर्षीय स्थानीय भर्ती रणनीति के हिस्से के रूप में दोहराया है।
ट्रंप प्रशासन ने आठ कंपनियों पर क्यों की कार्रवाई?
अमेरिकी प्रशासन ने 8 अक्टूबर 2026 को आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों के लिए PERM कार्यक्रम को निलंबित करने की घोषणा की। इस सूची में TCS, Infosys, Wipro, HCL Technologies, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe शामिल हैं।अमेरिकी श्रम विभाग का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए इमिग्रेशन व्यवस्था का दुरुपयोग किया और इससे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए। प्रशासन ने वेतन में कटौती और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखने से संबंधित चिंताएं भी जताई हैं।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि कंपनियों को अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, आठों कंपनियों के खिलाफ आरोपों से जुड़े अलग-अलग निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए इन आरोपों को सभी कंपनियों के खिलाफ साबित हुई गड़बड़ी के रूप में देखना सही नहीं होगा।
क्या है PERM प्रोग्राम और ग्रीन कार्ड से इसका संबंध?
PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की उपलब्धता और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से जुड़े श्रम बाजार के मानकों का पालन किया गया है।PERM प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियोक्ता आम तौर पर ग्रीन कार्ड के अगले चरणों की ओर बढ़ सकता है। यही वजह है कि इस कार्यक्रम पर रोक उन विदेशी कर्मचारियों के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है, जो अपने नियोक्ता के माध्यम से अमेरिका में स्थायी निवास पाने की योजना बना रहे हैं।हालांकि, PERM और H-1B वीजा अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। PERM पर रोक लगने से किसी कर्मचारी का मौजूदा H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होता। इसका मुख्य असर रोजगार के आधार पर स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए क्या मायने हैं?
TCS ने अपने कारोबार पर सीमित असर की बात कही है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि प्रभावित कंपनियों के सभी कर्मचारियों को कोई परेशानी नहीं होगी। जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अभी PERM चरण में है, उनके आवेदन आगे बढ़ने में देरी हो सकती है।यह स्थिति उन भारतीय पेशेवरों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है, जो लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे हैं और स्थायी निवास की योजना बना रहे हैं। भारत से आवेदन करने वालों को पहले से ही रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। नई रोक से कुछ कर्मचारियों की योजना और जटिल हो सकती है।इसके बावजूद, हर कर्मचारी की स्थिति अलग होगी। जिन लोगों का ग्रीन कार्ड पहले ही मंजूर हो चुका है, उनकी स्थिति लंबित PERM आवेदन वाले कर्मचारियों जैसी नहीं है। इसी तरह, केवल PERM पर रोक के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रभावित कंपनियों में काम करने वाले सभी भारतीयों की नौकरी चली जाएगी।
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क्या TCS की अमेरिकी भर्ती बढ़ने से भारतीयों के अवसर कम होंगे?
TCS की 15,000 कर्मचारियों को नियुक्त करने की योजना अमेरिका में स्थानीय भर्ती पर उसके जोर को दिखाती है। इससे अमेरिकी नागरिकों और वहां उपलब्ध प्रतिभाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इस घोषणा से यह तय नहीं होता कि कंपनी भारत में भर्ती घटाएगी या भारतीय कर्मचारियों के लिए अवसर बंद कर देगी।आईटी कंपनियां आम तौर पर अपने कर्मचारियों की भर्ती और तैनाती ग्राहक की जरूरत, प्रोजेक्ट, लागत और उपलब्ध कौशल के आधार पर तय करती हैं। अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ने और भारत में कर्मचारियों की नियुक्ति जारी रहने की संभावनाएं एक साथ मौजूद हो सकती हैं। कंपनी की ओर से भारत में भर्ती कम करने की कोई पुष्टि इस घोषणा से नहीं होती।
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आगे क्या होगा?
TCS ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी सरकार के निर्देशों का पालन करेगी और अपनी स्थानीय भर्ती रणनीति जारी रखेगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि PERM पर रोक कितने समय तक लागू रहती है और क्या प्रभावित कंपनियों को दोबारा आवेदन दाखिल करने की अनुमति मिलती है।फिलहाल, TCS के बयान से यह स्पष्ट है कि कंपनी को अपनी मौजूदा भर्ती रणनीति और ग्राहक सेवाओं पर बड़े असर की आशंका नहीं है। अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति का लक्ष्य भी बरकरार है। लेकिन ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रहे कर्मचारियों पर पड़ने वाला वास्तविक असर रोक की अवधि और उनके व्यक्तिगत इमिग्रेशन मामलों पर निर्भर करेगा।
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