Iran sanctions evasion: ईरान के साथ कारोबार पर अमेरिका की नजर! भारतीय कपल और 9 कंपनियां प्रतिबंधों की जद में
Iran sanctions evasion, अमेरिका ने ईरान को लेकर अपनी आर्थिक और कूटनीतिक कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में अमेरिकी सरकार ने भारत में रहने वाले एक दंपति और उनसे जुड़ी नौ कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप है कि इस दंपति ने कथित तौर पर ईरान के तेल व्यापार पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में मदद की।
Iran sanctions evasion : अमेरिका का सख्त संदेश- ‘या तो हमारे साथ या खिलाफ’, भारतीय कपल पर क्यों लगा बैन?
कौन हैं प्रतिबंधों के दायरे में आए भारतीय दंपति?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, प्रतिबंधों के दायरे में आए भारतीय नागरिकों की पहचान सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद के रूप में हुई है। दोनों भारत के चंडीगढ़ से जुड़े बताए गए हैं। इसके अलावा दो अन्य भारतीय नागरिकों अश्वनी कुमार धीमान और इश्विंदर सिंह पर भी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों दंपति से जुड़ी व्यावसायिक इकाइयों में निदेशक की भूमिका निभा रहे थे।अमेरिका का दावा है कि सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी एक ऐसे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे, जो कथित तौर पर प्रतिबंधित जहाजों को फर्जी समुद्री पहचान और प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराता था। इस नेटवर्क से जुड़ी नौ संस्थाओं को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है। हालांकि, इन सभी आरोपों को अमेरिकी अधिकारियों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्या है फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन का पूरा मामला?
इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जहाजों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में हर जहाज को किसी न किसी देश में पंजीकृत होना पड़ता है। इसके बाद जहाज उस देश का झंडा इस्तेमाल करता है और संबंधित देश के समुद्री नियमों के तहत उसकी निगरानी होती है। इसे शिप फ्लैगिंग कहा जाता है।अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप है कि भारतीय दंपति ने कुछ देशों के समुद्री प्राधिकरणों का प्रतिनिधित्व करने का झूठा दावा किया। इसके लिए कथित तौर पर वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किए गए थे। इन प्लेटफॉर्म के जरिए जहाजों के रजिस्ट्रेशन, नाविकों की ट्रेनिंग, प्रमाणन और जहाजों के वर्गीकरण जैसी सेवाएं देने का दावा किया जाता था।अमेरिका के मुताबिक, इन सेवाओं के लिए संबंधित देशों की आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर उन देशों के नाम पर जहाजों को झंडे और प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए गए। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इससे ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाज अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर समुद्री व्यापार जारी रख सके।
ईरान के तेल कारोबार से कैसे जुड़ा है यह नेटवर्क?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इस नेटवर्क का इस्तेमाल ईरान से जुड़े पेट्रोलियम के परिवहन में शामिल जहाजों को सहायता देने के लिए किया गया। इनमें ऐसे जहाज भी शामिल बताए गए हैं, जो कथित तौर पर ईरानी सेना और उसके सहयोगी संगठनों की ओर से काम कर रहे थे।अमेरिका का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और समुद्री पहचान के जरिए इन जहाजों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में मदद मिली। इस तरह ईरान के तेल व्यापार को जारी रखने का रास्ता तैयार किया गया।अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि फर्जी झंडे और प्रमाण-पत्रों के आधार पर चलने वाले जहाज समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसे जहाजों के पास पर्याप्त बीमा सुरक्षा नहीं होने की आशंका भी रहती है। अगर समुद्र में कोई दुर्घटना होती है, तो इससे संबंधित देशों को भारी आर्थिक और पर्यावरणीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किन नौ कंपनियों पर लगाया गया प्रतिबंध?
अमेरिकी कार्रवाई में भारतीय दंपति से जुड़ी नौ व्यावसायिक संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। इनमें ओशिएनिक टेक्नोलॉजीज इंडिया, आर्यावर्त शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, प्रीसेप्ट ट्रेंड्स प्राइवेट लिमिटेड, पॉलिनेशिया मैरीटाइम प्राइवेट लिमिटेड, एलेक्सार्या फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड, एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, विहाराबोटिंग प्राइवेट लिमिटेड और आर्यावर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट के नाम सामने आए हैं।अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन संस्थाओं का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और उससे जुड़ी सेवाओं के नेटवर्क को संचालित करने में किया गया। इस कार्रवाई में नौ संस्थाओं को प्रतिबंधित बताया गया है, हालांकि सार्वजनिक रिपोर्टों में सभी संस्थाओं के नामों की सूची एक जैसी नहीं है।
तुर्की की कंपनी पर भी अमेरिका की कार्रवाई
अमेरिका की यह कार्रवाई केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने तुर्की की कंपनी फ्यूगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इस कंपनी पर आरोप है कि उसने अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रही ईरानी एयरलाइंस को ग्राउंड हैंडलिंग और दूसरी विमानन सेवाएं उपलब्ध कराईं।इन सेवाओं में विमानों को जमीन पर संभालने और एयरपोर्ट पर संचालन से जुड़ी सुविधाएं शामिल होती हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने जिन ईरानी एयरलाइंस का नाम लिया है, उनमें ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, सेपहरान एयरलाइंस, वारेष एयरलाइंस, तबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं।अमेरिका का आरोप है कि इन एयरलाइंस को सेवाएं देकर तुर्की की कंपनी ने ईरान के प्रतिबंधित विमानन क्षेत्र को समर्थन दिया। इस तरह अमेरिकी कार्रवाई में समुद्री व्यापार के साथ-साथ विमानन क्षेत्र से जुड़े नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है।
‘या तो हमारे साथ हैं या खिलाफ’, स्कॉट बेसेंट का सख्त संदेश
इस पूरे मामले में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत अमेरिका का रुख स्पष्ट है। उनके मुताबिक, जो भी ईरानी शासन का समर्थन करना जारी रखेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि अमेरिका को पता है कि ऐसे लोग और संस्थाएं कहां हैं और उन्हें जमीन, समुद्र या हवाई रास्ते से ईरान का समर्थन करने पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।उनका ‘या तो हमारे साथ हैं या हमारे खिलाफ’ वाला बयान इसी सख्त नीति को दर्शाता है। अमेरिका इस संदेश के जरिए उन कारोबारियों और कंपनियों को चेतावनी देना चाहता है, जो प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ व्यापारिक गतिविधियों में शामिल हैं।
क्या है ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट?
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट ट्रंप प्रशासन की एक आर्थिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य ईरान की तेल से होने वाली कमाई को सीमित करना और उसके आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। इस अभियान के तहत उन कंपनियों, व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जा रही है, जिन पर ईरान के प्रतिबंधित तेल व्यापार या अन्य आर्थिक गतिविधियों को मदद पहुंचाने का आरोप है।अमेरिका का मानना है कि ईरान की तेल से होने वाली आय का इस्तेमाल उसकी सैन्य और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसलिए अमेरिकी प्रशासन तेल के परिवहन, जहाजों के रजिस्ट्रेशन, वित्तीय लेन-देन और विमानन सेवाओं से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहा है।इससे पहले भी अमेरिकी सरकार ईरान से जुड़े तेल कारोबार और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क के खिलाफ कई कदम उठा चुकी है। अब भारतीय दंपति और उनसे जुड़ी कंपनियों पर कार्रवाई को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
प्रतिबंध लगने के बाद क्या होगा?
अमेरिकी प्रतिबंधों का सीधा असर उन लोगों और कंपनियों की संपत्तियों तथा वित्तीय गतिविधियों पर पड़ सकता है, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आती हैं। प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिका में मौजूद संपत्ति और वित्तीय हितों को ब्लॉक किया जा सकता है।इसके अलावा, अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को सामान्य तौर पर प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ कारोबार करने की अनुमति नहीं होती, जब तक कि संबंधित अमेरिकी विभाग से विशेष अनुमति न मिले।इन प्रतिबंधों का असर अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। गैर-अमेरिकी कंपनियां और कारोबारी भी जोखिम में आ सकते हैं, अगर वे अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में किसी प्रतिबंधित नेटवर्क की मदद करते हैं। ऐसे मामलों में अमेरिकी कानून के तहत कार्रवाई की आशंका रहती है।फिलहाल इस मामले में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से लगाए गए आरोप और घोषित प्रतिबंध सामने आए हैं। इन आरोपों पर संबंधित भारतीय दंपति या कंपनियों की ओर से किसी जवाब या कानूनी चुनौती की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।कुल मिलाकर, भारतीय दंपति और नौ कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध केवल एक कारोबारी कार्रवाई नहीं है, बल्कि ईरान के तेल व्यापार को रोकने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। इस कदम से यह भी स्पष्ट होता है कि अमेरिका अब समुद्री रजिस्ट्रेशन, जहाजों के प्रमाण-पत्र और विमानन सेवाओं जैसे क्षेत्रों पर भी नजर रख रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कार्रवाई का भारतीय कंपनियों के कारोबार और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों पर क्या असर पड़ता है।
We’re now on WhatsApp. Click to join.
अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com.







