International News: रूस-भारत के बीच शुरू हो सकती है सीधी ट्रेन! 7000 किमी का सफर इन देशों से होकर होगा पूरा
International News, भारत और रूस के बीच कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़ी और रणनीतिक पहल चर्चा में है। रूस ने भारत तक सीधे रेल संपर्क की संभावना तलाशने की बात कही है। रूसी उप प्रधानमंत्री Marat Khusnullin ने मॉस्को से हिंद महासागर तक सीधे रेल लिंक की संभावना तलाशने का सुझाव दिया है।
International News : मॉस्को से भारत तक ट्रेन का सपना होगा साकार? 7000 किमी के संभावित रूट ने बढ़ाई हलचल
International News, भारत और रूस के बीच कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़ी और रणनीतिक पहल चर्चा में है। रूस ने भारत तक सीधे रेल संपर्क की संभावना तलाशने की बात कही है। रूसी उप प्रधानमंत्री Marat Khusnullin ने मॉस्को से हिंद महासागर तक सीधे रेल लिंक की संभावना तलाशने का सुझाव दिया है। इसका मकसद समुद्री मार्गों, खासकर बोस्फोरस और होर्मुज जैसे रणनीतिक chokepoints पर निर्भरता और उनसे जुड़े जोखिम को कम करना है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है अभी रूस से भारत के लिए कोई नियमित सीधी यात्री ट्रेन शुरू होने की घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल बात एक संभावित रेल/मल्टीमॉडल कॉरिडोर की व्यवहार्यता तलाशने की है। प्रस्तावित कनेक्टिविटी पहले से मौजूद International North-South Transport Corridor (INSTC) से जुड़ सकती है।

7,200 किमी का INSTC क्या है?
भारत, रूस और ईरान ने वर्ष 2000 में International North-South Transport Corridor (INSTC) की शुरुआत की थी। यह करीब 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है, जिसमें रेल, सड़क और समुद्री मार्ग शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारत को ईरान, कैस्पियन क्षेत्र और रूस से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इस कॉरिडोर को पारंपरिक समुद्री मार्गों की तुलना में भारत और रूस के बीच माल ढुलाई को तेज करने के विकल्प के तौर पर देखा जाता है। इसका एक मॉडल रूट भारत के मुंबई क्षेत्र से होते हुए ईरान और अजरबैजान के रास्ते रूस के सेंट पीटर्सबर्ग तक जाता है।यानी खबरों में जिस करीब 7,000-7,200 किमी के रूट की बात हो रही है, वह पूरी तरह नई कल्पना नहीं है। इसके पीछे वर्षों से विकसित हो रहा INSTC नेटवर्क मौजूद है।
किन देशों से होकर गुजर सकता है रूट?
संभावित पश्चिमी रूट की बात करें तो भारत से माल पहले समुद्री रास्ते से ईरान पहुंच सकता है। इसके बाद ईरान से अजरबैजान और फिर अजरबैजान से रूस तक रेल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।एक अन्य संभावित पूर्वी मार्ग में रूस से होकर कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के रास्ते ईरान पहुंचने और फिर भारत तक कनेक्टिविटी की व्यवस्था शामिल हो सकती है। INSTC में अलग-अलग रूट और मल्टीमॉडल विकल्प मौजूद हैं। इसलिए इसे एक ही सीधी रेलवे लाइन समझना सही नहीं होगा। मौजूदा व्यवस्था में कुछ हिस्से रेल, कुछ सड़क और कुछ समुद्री परिवहन से जुड़े हैं।

क्या पूरी दूरी ट्रेन से तय होगी?
यही इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। फिलहाल 7,000-7,200 किमी की पूरी दूरी बिना किसी बदलाव के एक यात्री ट्रेन द्वारा तय करने वाला रूट मौजूद नहीं है।INSTC मूल रूप से एक मल्टीमॉडल कॉरिडोर है। यानी एक ही यात्रा में ट्रेन, सड़क और जहाज—तीनों का इस्तेमाल हो सकता है। उदाहरण के तौर पर भारत से ईरान तक समुद्री मार्ग और फिर ईरान से रूस की ओर रेल एवं सड़क नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।रूस की नई पहल का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मॉस्को अब हिंद महासागर तक अधिक प्रत्यक्ष और सुरक्षित रेल संपर्क की संभावना तलाश रहा है।
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7,000 किमी का सफर कितने घंटे में पूरा होगा?
यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन इसका कोई आधिकारिक यात्रा समय अभी तय नहीं है। इसकी वजह यह है कि प्रस्तावित कनेक्शन अभी नियमित यात्री ट्रेन के रूप में अस्तित्व में नहीं आया है।अगर केवल गणितीय अनुमान लगाया जाए और ट्रेन की औसत गति 60-80 किमी प्रति घंटे मान ली जाए, तो 7,000 किमी की दूरी लगातार चलते हुए लगभग 88 से 117 घंटे, यानी करीब 4 से 5 दिन में पूरी हो सकती है।लेकिन वास्तविक अंतरराष्ट्रीय ट्रेन यात्रा में ऐसा नहीं होगा। सीमा जांच, कस्टम, ईंधन/तकनीकी ठहराव, ट्रैक बदलना, परिचालन संबंधी रुकावटें और कुछ हिस्सों में सड़क या समुद्री परिवहन शामिल होने के कारण वास्तविक समय इससे काफी अधिक हो सकता है।इसलिए अभी 4-5 दिन को आधिकारिक यात्रा अवधि नहीं, बल्कि केवल गति के आधार पर किया गया सैद्धांतिक अनुमान माना जाना चाहिए।
ईरान-अजरबैजान रेल लिंक क्यों अहम है?
इस प्रस्ताव में ईरान और अजरबैजान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। अजरबैजान के जरिए रूस और ईरान के रेल नेटवर्क को जोड़ने वाला हिस्सा INSTC के पश्चिमी रूट का अहम भाग है।अजरबैजान के अनुसार उसके क्षेत्र से गुजरने वाली North-South Corridor की रेलवे लाइन करीब 511 किलोमीटर लंबी है और रूस-अजरबैजान सीमा से ईरान-अजरबैजान सीमा तक का महत्वपूर्ण रेल खंड परिचालन में है। दूसरी ओर ईरान में Rasht-Astara railway लंबे समय से इस कॉरिडोर की महत्वपूर्ण कड़ी रही है। इसके पूरा होने से रूस, अजरबैजान और ईरान के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा और भारत की ओर जाने वाले माल परिवहन को भी फायदा मिल सकता है।
भारत और रूस के व्यापार को मिलेगा फायदा
अगर यह कनेक्टिविटी पूरी तरह विकसित होती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा व्यापार को मिल सकता है। भारत और रूस के बीच सामान की आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।INSTC का उद्देश्य भी परिवहन समय और लागत कम करना है। मौजूदा आकलनों में इस कॉरिडोर को पारंपरिक समुद्री मार्गों की तुलना में तेज विकल्प माना गया है। अजरबैजान के आधिकारिक विवरण के मुताबिक North-South Corridor के जरिए कुछ अंतरराष्ट्रीय माल परिवहन में डिलीवरी समय 20-25 दिनों तक बताया गया है, जबकि पारंपरिक समुद्री रूट में यह 45-60 दिन तक हो सकता है। हालांकि ये आंकड़े मुख्य रूप से माल ढुलाई से जुड़े हैं, यात्री ट्रेन के सफर पर इन्हें सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
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होर्मुज और बोस्फोरस का विकल्प क्यों?
रूस की नई पहल के पीछे भू-राजनीतिक वजह भी महत्वपूर्ण है। रूसी उप प्रधानमंत्री ने ऐसे समुद्री chokepoints पर निर्भरता कम करने की जरूरत बताई है, जहां क्षेत्रीय तनाव या संघर्ष के कारण परिवहन प्रभावित हो सकता है। भारत और रूस के लिए वैकल्पिक स्थलीय कनेक्टिविटी का मतलब होगा कि व्यापार के लिए केवल समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम की जा सके। यही कारण है कि INSTC को केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक कनेक्टिविटी नेटवर्क के रूप में भी देखा जाता है।
क्या भारत-रूस यात्री ट्रेन जल्द शुरू होगी?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। रूस की ओर से जो प्रस्ताव सामने आया है, वह सीधी रेल कनेक्टिविटी की व्यवहार्यता तलाशने से संबंधित है। इसे भारत और रूस के बीच जल्द शुरू होने वाली नियमित यात्री ट्रेन की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए। पहले बुनियादी ढांचे, सीमा प्रक्रियाओं, अलग-अलग देशों के रेलवे नेटवर्क, सुरक्षा, ट्रैक क्षमता और वित्तीय व्यवहार्यता जैसे मुद्दों को सुलझाना होगा।
भारत के लिए क्यों है खास?
भारत के लिए रूस तक बेहतर रेल कनेक्टिविटी का मतलब सिर्फ यात्रा सुविधा नहीं, बल्कि मध्य एशिया और यूरोप के साथ व्यापारिक संपर्क को मजबूत करना भी है। INSTC भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए ईरान और आगे रूस तथा यूरोप तक पहुंच का वैकल्पिक रास्ता देता है।इससे ऊर्जा, मशीनरी, कृषि उत्पाद, दवाइयों, रसायनों और अन्य वस्तुओं की आवाजाही को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।रूस और भारत के बीच करीब 7,000-7,200 किमी की संभावित रेल कनेक्टिविटी की खबर ने अंतरराष्ट्रीय परिवहन क्षेत्र में उत्सुकता बढ़ा दी है। रूस ने मॉस्को से हिंद महासागर तक सीधे रेल संपर्क की संभावना तलाशने का सुझाव दिया है, जो मौजूदा INSTC नेटवर्क को और मजबूत कर सकता है। संभावित मार्ग ईरान और अजरबैजान जैसे देशों से होकर गुजर सकता है, जबकि एक अन्य विकल्प मध्य एशिया के रास्ते का हो सकता है। हालांकि अभी कोई नियमित सीधी यात्री ट्रेन या आधिकारिक यात्रा समय घोषित नहीं हुआ है। 7,000 किमी की दूरी को 60-80 किमी प्रति घंटे की औसत गति से देखें तो लगातार चलने पर करीब 4-5 दिन का सैद्धांतिक समय बनता है, लेकिन वास्तविक यात्रा इससे लंबी हो सकती है।
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