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International News: Trump का नया Visa Rule फिलहाल टला, अमेरिकी कोर्ट के फैसले से भारतीय छात्रों को राहत

International News, अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है।

International News : अमेरिका में पढ़ाई का सपना देख रहे भारतीय छात्रों को राहत, नए Visa Rule पर लगी रोक

International News, अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि को सीमित करने वाले नए वीजा नियमों पर अमेरिकी अदालत ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब नया नियम 15 सितंबर 2026 से लागू होने वाला था। अदालत के आदेश के बाद फिलहाल विदेशी छात्रों के लिए पुराना वीजा सिस्टम जारी रहेगा।

क्या था ट्रंप प्रशासन का नया वीजा नियम?

ट्रंप प्रशासन के Department of Homeland Security (DHS) ने जुलाई 2026 में एक नया नियम जारी किया था। इसका सबसे बड़ा बदलाव विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स के अमेरिका में रहने की अवधि को लेकर था। करीब पांच दशक से F-1 छात्रों और J-1 एक्सचेंज विजिटर्स के लिए “Duration of Status” यानी D/S व्यवस्था लागू थी। इसके तहत छात्र अपने वैध स्टेटस को बनाए रखते हुए आम तौर पर अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की अवधि तक अमेरिका में रह सकते थे।नए नियम में इस व्यवस्था को खत्म करके छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स के लिए निश्चित अवधि तय करने का प्रस्ताव था। F-1 और J-1 वीजा धारकों के अमेरिका में रहने की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जानी थी। यदि किसी छात्र को अपनी पढ़ाई, रिसर्च या प्रशिक्षण पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए होता, तो उसे एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना पड़ता।यही बदलाव अमेरिका में पढ़ने वाले हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए चिंता का कारण बना हुआ था। खासतौर पर उन छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स को परेशानी हो सकती थी जिनके प्रोग्राम चार साल से ज्यादा चलते हैं या जिनकी पढ़ाई किसी कारण से तय समय से आगे बढ़ जाती है।

अदालत ने क्यों लगाई रोक?

14 सितंबर को मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश F. Dennis Saylor ने नए नियम के लागू होने पर प्रारंभिक रोक लगा दी। अदालत ने माना कि DHS नए नियम को लागू करने के लिए पर्याप्त मजबूत तर्क पेश नहीं कर पाया। न्यायाधीश ने एजेंसी की दलीलों और उसके द्वारा अपनाए गए तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए।अदालत के मुताबिक सरकार यह पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सकी कि पुरानी व्यवस्था को बदलना राष्ट्रीय सुरक्षा या दूसरे बताए गए उद्देश्यों को हासिल करने के लिए जरूरी था। फैसले में DHS की दलील को बेहद कमजोर बताया गया। अदालत ने यह भी माना कि सरकार ने कम प्रतिबंधात्मक विकल्पों पर पर्याप्त तरीके से विचार नहीं किया।इस फैसले का मतलब है कि नया चार साल वाला सिस्टम फिलहाल लागू नहीं होगा और कानूनी लड़ाई जारी रहने के दौरान मौजूदा व्यवस्था बनी रहेगी।

भारतीय छात्रों को कैसे मिलेगी राहत?

अमेरिका भारतीय छात्रों के लिए दुनिया के सबसे लोकप्रिय उच्च शिक्षा गंतव्यों में से एक है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र हर साल F-1 वीजा पर अमेरिका के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई के लिए जाते हैं। ऐसे में वीजा की अवधि से जुड़ा कोई भी बड़ा बदलाव सीधे भारतीय छात्रों पर असर डाल सकता है।नए नियम के लागू होने पर जिन छात्रों की पढ़ाई चार साल से ज्यादा चलती, उन्हें अतिरिक्त समय के लिए अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता था। रिसर्च, पीएचडी और पोस्टडॉक्टरल कार्यक्रमों से जुड़े छात्रों के लिए यह समस्या और बड़ी हो सकती थी। अदालत की रोक से फिलहाल ऐसी अतिरिक्त अनिश्चितता टल गई है।हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत का फैसला अंतिम रूप से नए नियम को रद्द नहीं करता। फिलहाल इसके लागू होने पर रोक लगाई गई है। मामले की आगे की कानूनी सुनवाई और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

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यूनिवर्सिटी और शिक्षा संगठनों ने जताई थी चिंता

अमेरिकी विश्वविद्यालयों और शिक्षा संगठनों ने नए वीजा नियम का विरोध किया था। उनका तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय छात्र और शोधकर्ता अमेरिकी उच्च शिक्षा तथा रिसर्च सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। विश्वविद्यालयों को आशंका थी कि रहने की अवधि सीमित होने से छात्रों को अपनी पढ़ाई या रिसर्च के बीच में इमिग्रेशन संबंधी अतिरिक्त प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है।खास तौर पर ग्रेजुएट स्टूडेंट्स, पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर्स और लंबे रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए चार साल की सीमा चुनौती बन सकती थी। अमेरिकी रिसर्च संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इस नियम को लेकर व्यापक चिंता जताई गई थी।

पत्रकारों के लिए भी था बड़ा बदलाव

यह नियम सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं था। इसके तहत विदेशी पत्रकारों के लिए भी अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने का प्रस्ताव था। F और J कैटेगरी के लिए चार साल की सीमा की बात थी, जबकि I वीजा वाले विदेशी पत्रकारों के लिए 240 दिनों की सीमा प्रस्तावित थी। यानी ट्रंप प्रशासन की योजना अंतरराष्ट्रीय छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और विदेशी पत्रकारों—तीनों की इमिग्रेशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की थी।अदालत के फैसले के बाद इन प्रस्तावित बदलावों पर भी फिलहाल रोक लग गई है।

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आगे क्या होगा?

फिलहाल भारतीय और दूसरे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि नया चार साल वाला वीजा नियम तुरंत लागू नहीं होगा। छात्रों को फिलहाल मौजूदा Duration of Status व्यवस्था के तहत अपने वैध इमिग्रेशन स्टेटस के अनुसार पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिलती रहेगी।हालांकि, छात्रों को यह भी समझना चाहिए कि अदालत की रोक अस्थायी कानूनी राहत है। आगे की सुनवाई में इस नियम का भविष्य तय होगा। इसलिए अमेरिका में पढ़ रहे या वहां पढ़ाई के लिए जाने की तैयारी कर रहे छात्रों को अपने विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालय और आधिकारिक अमेरिकी इमिग्रेशन निर्देशों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।कुल मिलाकर, अमेरिकी अदालत का यह फैसला भारतीय छात्रों के लिए फिलहाल एक बड़ी राहत है। ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित सख्त वीजा व्यवस्था से पैदा हुई अनिश्चितता कुछ समय के लिए टल गई है। अब सभी की नजर इस मामले की आगे होने वाली सुनवाई पर है, क्योंकि अंतिम फैसला यह तय करेगा कि अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए दशकों पुरानी वीजा व्यवस्था कायम रहती है या उसमें बड़ा बदलाव होता है।

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