अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती, GST Collection में 13.9% की बढ़ोतरी; टॉप-5 राज्य कौन?
GST Collection, देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर सामने आई है। जून 2026 में भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 13.9% की सालाना बढ़ोतरी के साथ 1.94 लाख करोड़ रुपये
13.9% बढ़ा GST Collection, देखें सबसे ज्यादा टैक्स जमा कराने वाले टॉप-5 राज्य
GST Collection, देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर सामने आई है। जून 2026 में भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 13.9% की सालाना बढ़ोतरी के साथ 1.94 लाख करोड़ रुपये (₹1,94,812 करोड़) तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष जून के ₹1,71,105 करोड़ की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है और पिछले 13 महीनों की सबसे तेज वार्षिक बढ़ोतरी मानी जा रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी में आयात (इंपोर्ट) से मिलने वाले कर राजस्व का बड़ा योगदान रहा।
आयात से मिले राजस्व ने दिखाई मजबूती
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में आयात पर GST संग्रह में लगभग 34.6% की वृद्धि दर्ज की गई। आयात से कुल GST राजस्व बढ़कर करीब ₹60,038 करोड़ हो गया, जबकि घरेलू लेनदेन से प्राप्त GST संग्रह में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आयात, बेहतर कर अनुपालन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण GST संग्रह में यह उछाल आया है।
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जून में कुल GST संग्रह कितना रहा?
वित्त मंत्रालय के मुताबिक जून 2026 में देश का सकल GST संग्रह ₹1,94,812 करोड़ रहा। वहीं, रिफंड जारी करने के बाद नेट GST संग्रह ₹1,62,377 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.2% अधिक है। इस दौरान कुल रिफंड भी 29.1% बढ़कर ₹32,436 करोड़ पहुंच गया।
सबसे ज्यादा GST भरने वाले टॉप-5 राज्य
जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, GST संग्रह के मामले में देश के पांच सबसे बड़े योगदानकर्ता राज्य ये रहे:
1. महाराष्ट्र – ₹30,637 करोड़
देश की आर्थिक राजधानी होने के कारण महाराष्ट्र एक बार फिर GST संग्रह में पहले स्थान पर रहा। मुंबई, पुणे और नवी मुंबई जैसे बड़े औद्योगिक एवं वित्तीय केंद्र इसकी प्रमुख वजह हैं।
2. कर्नाटक – ₹14,117 करोड़
बेंगलुरु जैसे आईटी और स्टार्टअप हब की वजह से कर्नाटक लगातार दूसरे स्थान पर बना हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र का राज्य के GST संग्रह में बड़ा योगदान है।
3. गुजरात – ₹11,402 करोड़
उद्योग, निर्यात और विनिर्माण के मजबूत आधार के चलते गुजरात तीसरे स्थान पर रहा। राज्य का औद्योगिक उत्पादन और बंदरगाह आधारित व्यापार GST संग्रह को मजबूती देता है।
4. तमिलनाडु
ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के दम पर तमिलनाडु शीर्ष राज्यों में शामिल रहा। चेन्नई और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों का इसमें बड़ा योगदान है।
5. उत्तर प्रदेश
देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश भी शीर्ष GST संग्रह करने वाले राज्यों में शामिल है। बढ़ते औद्योगिक निवेश, निर्माण गतिविधियों और व्यापारिक विस्तार ने राज्य के राजस्व में वृद्धि की है।
GST संग्रह बढ़ने का क्या मतलब है?
विशेषज्ञों का मानना है कि GST संग्रह में लगातार वृद्धि इस बात का संकेत है कि देश में व्यापारिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं। अधिक कर संग्रह का अर्थ है कि कंपनियों की बिक्री, उपभोक्ता मांग और उत्पादन में सुधार हो रहा है। साथ ही, डिजिटल टैक्स प्रणाली और बेहतर अनुपालन के कारण कर चोरी पर भी अंकुश लगा है।
सरकार को मिलेगा विकास योजनाओं में सहारा
GST सरकार के सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष करों में से एक है। इसके जरिए मिलने वाले राजस्व का उपयोग सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में किया जाता है। कर संग्रह बढ़ने से सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है और विकास परियोजनाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होते हैं।
वित्त वर्ष की शुरुआत भी रही सकारात्मक
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी GST संग्रह मजबूत रहा है। अप्रैल से जून के बीच सकल GST संग्रह में लगभग 8.4% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि शुद्ध संग्रह में भी सकारात्मक बढ़ोतरी हुई। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक रही है।
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आगे भी बने रह सकते हैं सकारात्मक संकेत
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है और औद्योगिक उत्पादन तथा आयात में वृद्धि जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में भी GST संग्रह बेहतर रह सकता है। हालांकि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिति भी भविष्य के आंकड़ों को प्रभावित कर सकती हैं। जून 2026 के GST आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत की कर प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है। 13.9% की वार्षिक वृद्धि, आयात से बढ़ी आय और प्रमुख राज्यों के मजबूत योगदान ने सरकार के राजस्व को नई मजबूती दी है। आने वाले महीनों में भी यदि यही रफ्तार बनी रहती है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्तीय प्रबंधन दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाएगा।
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