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Delhi building collapse: Satya Niketan Collapse के बाद बड़ा खुलासा, दिल्ली में 62 ‘Dangerous’ Buildings, 42 अभी भी असुरक्षित

Delhi building collapse, दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला छात्र पीजी इमारत के ढहने से सात लोगों की मौत के बाद राजधानी में इमारतों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हादसे के बाद नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे में दिल्लीभर में 62 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है।

Delhi building collapse : दिल्ली में कब होगा अगला हादसा? 62 इमारतें खतरनाक, 42 पर MCD की कार्रवाई अब भी बाकी

Delhi building collapse, दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला छात्र पीजी इमारत के ढहने से सात लोगों की मौत के बाद राजधानी में इमारतों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हादसे के बाद नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे में दिल्लीभर में 62 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से 16 इमारतों को गिराया जा चुका है, जबकि चार को सील किया गया है। वहीं 42 इमारतों पर अभी कार्रवाई होनी बाकी है। इस रिपोर्ट ने राजधानी में पुरानी और कमजोर इमारतों, अवैध निर्माण और खासतौर पर छात्र पीजी तथा हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन अब इन इमारतों के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की तैयारी में है।

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सत्य निकेतन हादसे में गई सात लोगों की जान

साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी। यह इमारत मुख्य रूप से छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट यानी PG आवास के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के समय इमारत में कई लोग मौजूद थे।रेस्क्यू टीमों ने मलबे से लोगों को बाहर निकाला, लेकिन हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में इमारत के बेसमेंट में चल रहे काम और पानी जमा होने को संभावित कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि, हादसे का अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी जांच तेज कर दी। इसी दौरान एक पड़ोसी इमारत को भी कमजोर और असुरक्षित पाया गया, जिसके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश दिया गया।

MCD सर्वे में सामने आई 62 खतरनाक इमारतें

सत्य निकेतन हादसे के बाद सामने आए MCD सर्वे के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के अलग-अलग MCD जोन से जुटाई गई जानकारी के आधार पर 62 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया है।

इनमें से:

  • 16 इमारतें ध्वस्त की जा चुकी हैं
  • 4 इमारतें सील की गई हैं
  • 42 इमारतों पर कार्रवाई अभी बाकी है

MCD ने इन 42 इमारतों के लिए प्राथमिकता के आधार पर ध्वस्तीकरण या सीलिंग की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कमजोर इमारतों की स्थिति और खतरे के स्तर को देखते हुए कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

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हादसे के बाद ही क्यों जागा प्रशासन?

सत्य निकेतन हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर दिल्ली में दर्जनों इमारतें पहले से खतरनाक थीं, तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि MCD ने इस साल मानसून से पहले राजधानी में बड़े स्तर पर भवन सर्वे किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, करीब 27.84 लाख इमारतों का निरीक्षण किया गया था और उस समय केवल 19 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया था।अब 62 खतरनाक इमारतों की पहचान सामने आने से निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि सिर्फ सर्वे करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन इमारतों को असुरक्षित पाया गया है, उन्हें समय पर खाली कराना और आवश्यक कार्रवाई करना भी जरूरी है।

छात्र PG और हॉस्टल बने बड़ी चिंता

सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और किराये के आवास में रहते हैं। हादसे के बाद दिल्ली के दूसरे छात्र इलाकों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अमीकस क्यूरी ने भी दिल्ली और आसपास के छात्र आवासों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है। इसमें PG, निजी हॉस्टल और कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों के आसपास मौजूद छात्र आवास शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट है कि समस्या सिर्फ एक इमारत तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि राजधानी में छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।

दिल्ली सरकार ने दिए स्ट्रक्चरल ऑडिट के निर्देश

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। छात्र आवास भी इस दायरे में महत्वपूर्ण हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि इमारत की नींव, कॉलम, बीम, स्लैब और अन्य संरचनात्मक हिस्से सुरक्षित हैं या नहीं। खासकर पुरानी इमारतों में लगातार होने वाले निर्माण, अतिरिक्त मंजिल, बेसमेंट में बदलाव और अनधिकृत निर्माण से संरचना पर पड़ने वाले असर की जांच जरूरी है।

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अवैध निर्माण पर भी उठे सवाल

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में अवैध और अनधिकृत निर्माण की समस्या को फिर सामने ला दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक जिस इमारत में हादसा हुआ, उसके पास स्वीकृत बिल्डिंग प्लान नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना उचित स्वीकृति के बनी या बदली गई इमारतों में लोगों को रहने की अनुमति कैसे मिलती है। कई इलाकों में पुराने मकानों को PG, हॉस्टल या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बदला जाता है। इस दौरान संरचनात्मक बदलाव किए जाते हैं, लेकिन क्या वे इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप हैं, इसकी नियमित जांच जरूरी है।

42 इमारतों पर अब कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल MCD के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन 42 खतरनाक इमारतों को लेकर है, जिन पर कार्रवाई अभी बाकी है। अगर इनमें लोग रह रहे हैं तो प्रशासन के लिए समय पर नोटिस, खाली कराने और जरूरत पड़ने पर सील या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी करना अहम होगा।सत्य निकेतन की घटना ने यह दिखा दिया है कि किसी इमारत के कमजोर होने का पता हादसे के बाद चलना बेहद खतरनाक हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञों और अधिकारियों के सामने चुनौती सिर्फ पुरानी इमारतों की पहचान करना नहीं, बल्कि पहचान के बाद तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है।

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हादसे ने दी बड़ी चेतावनी

सत्य निकेतन हादसा दिल्ली के लिए एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है। 62 खतरनाक इमारतों की पहचान और उनमें से 42 पर कार्रवाई लंबित होना बताता है कि भवन सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी की जरूरत है। खासतौर पर PG और हॉस्टल जैसे स्थानों पर, जहां एक ही इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं, सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता भारी पड़ सकता है।

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