भारत

Delhi Air Pollution: दिल्ली से नोएडा तक प्रदूषण का प्रकोप, कई इलाकों में सांस लेना हुआ मुश्किल

Delhi Air Pollution, दिल्ली-NCR में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली से लेकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम तक हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। सुबह और शाम के समय कई इलाकों में धुंध और स्मॉग की मोटी परत दिखाई दे रही है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें हो रही हैं।

Delhi Air Pollution : दिल्ली-NCR में हवा की बिगड़ी सेहत, जानें कहां कितना पहुंचा AQI

Delhi Air Pollution, दिल्ली-NCR में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली से लेकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम तक हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। सुबह और शाम के समय कई इलाकों में धुंध और स्मॉग की मोटी परत दिखाई दे रही है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें हो रही हैं। इस बीच नोएडा और ग्रेटर नोएडा में AQI 773 तक पहुंचने का आंकड़ा भी चर्चा में है। हालांकि, अलग-अलग एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म पर रीडिंग में अंतर है। इसलिए इस आंकड़े को आधिकारिक शहर-स्तरीय AQI मानने से पहले उसके स्रोत और मॉनिटरिंग स्टेशन की जानकारी देखना जरूरी है।

671db972e5364 delhi air pollution 250934658

दिल्ली में 6 नवंबर को AQI 389 दर्ज

6 नवंबर 2026 की सुबह दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 7 बजे राजधानी का औसत AQI 389 था। यह स्तर लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय है। पिछले दिनों के आंकड़ों से भी पता चलता है कि प्रदूषण में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। 3 नवंबर को दिल्ली का AQI 350, 4 नवंबर को 377 और 5 नवंबर को 369 दर्ज किया गया था। यानी राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है।

नोएडा और गुरुग्राम में भी बिगड़े हालात

दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के दूसरे शहरों में भी प्रदूषण से राहत नहीं मिल रही है। 6 नवंबर की सुबह CPCB के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा का AQI 313 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। वहीं, IQAir के अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में नोएडा की रीडिंग 240 और गुरुग्राम की 360 दर्ज की गई। इन दोनों प्लेटफॉर्म के आंकड़ों में अंतर का कारण उनके मापन और अपडेट के समय में अंतर हो सकता है।गाजियाबाद और फरीदाबाद में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। गुरुग्राम में कुछ मॉनिटरिंग रीडिंग बेहद चिंताजनक स्थिति दिखा रही हैं। ऐसे में केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

673d34d362582 delhi air pollution 200101200

 

दिल्ली के किन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण?

अगर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों की बात करें तो 6 नवंबर की सुबह कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 के पार दर्ज किया गया। सुबह 6 बजे के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रोहिणी में AQI 473 और पंजाबी बाग में 464 रहा। इसके अलावा आरके पुरम में 441, अलीपुर और सोनिया विहार में 435, ओखला फेज-2 में 426, नॉर्थ कैंपस में 424, ITO में 420 और नजफगढ़ में 412 दर्ज किया गया।वहीं, पूसा में AQI 393, चांदनी चौक में 386, आनंद विहार में 350 और लोधी रोड में 306 रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है। कुछ क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब है, जबकि कई जगहों पर हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है।

क्या होता है AQI और इसका कितना स्तर खतरनाक है?

AQI यानी Air Quality Index को हिंदी में वायु गुणवत्ता सूचकांक कहा जाता है। इसके जरिए पता लगाया जाता है कि किसी इलाके की हवा कितनी साफ या प्रदूषित है। भारत में AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है।

AQI स्तरहवा की श्रेणी
0-50अच्छी
51-100संतोषजनक
101-200मध्यम
201-300खराब
301-400बेहद खराब
401-500गंभीर

जब AQI 400 के पार पहुंचता है तो हवा गंभीर श्रेणी में मानी जाती है। ऐसी स्थिति में स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। वहीं, पहले से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए जोखिम और बढ़ सकता है।

Read More: Glenn Maxwell retirement: वर्ल्ड कप विजेता ग्लेन मैक्सवेल ने इंटरनेशनल क्रिकेट से लिया संन्यास, जानें आगे क्या करेंगे

आखिर क्यों बढ़ रहा है दिल्ली-NCR में प्रदूषण?

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान में गिरावट, हवा की धीमी गति और वातावरण में नमी बढ़ने से प्रदूषक कण जमीन के नजदीक जमा हो सकते हैं। इससे प्रदूषण लंबे समय तक बना रहता है।इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक गतिविधियां और आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं भी प्रदूषण में योगदान देती हैं। नवंबर के दौरान पराली जलाने की घटनाओं और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों को दिल्ली की खराब होती हवा के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।

Read More: ACP Manasvi Vashishtha: प्रदर्शन का नेतृत्व करना पड़ा भारी! DANIPS ACP मनस्वी वशिष्ठ को गृह मंत्रालय ने किया सस्पेंड

प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

हवा की गुणवत्ता खराब होने पर सबसे जरूरी है कि लोग अपनी दिनचर्या में कुछ सावधानियां बरतें। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए।ऐसे समय में सुबह और शाम के दौरान खुले में लंबी सैर, दौड़ने और भारी व्यायाम से बचना बेहतर है। जरूरत न होने पर बाहर निकलने से बचें। बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। घर की खिड़कियां और दरवाजे प्रदूषण के अधिक स्तर वाले समय में बंद रखें। घर के अंदर धूम्रपान, अगरबत्ती और ऐसी गतिविधियों से बचें जिनसे अतिरिक्त धुआं पैदा होता है।अगर आंखों में लगातार जलन, खांसी, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह लें। पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं तो उसे बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न करें।

GRAP के नियमों पर भी नजर

दिल्ली-NCR में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP के दूसरे चरण यानी Stage-II के प्रतिबंध लागू किए हैं। इसके तहत धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कराने जैसे कदमों पर जोर दिया जाता है। अधिकारियों की ओर से प्रदूषण के स्रोतों पर निगरानी भी की जाती है।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते  हैं info@oneworldnews.com.

Back to top button