Azam Khan: आजम खान के 10 ठिकानों पर ED रेड, जौहर ट्रस्ट के 494 करोड़ रुपये की फंडिंग जांच के घेरे में
Azam Khan, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
Azam Khan : आजम खान की मुश्किलें फिर बढ़ीं, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 494 करोड़ के लेनदेन की जांच
Azam Khan, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के अलावा दिल्ली में भी करीब 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई का मुख्य केंद्र जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियां बताई जा रही हैं।

494 करोड़ रुपये के खर्च पर उठे सवाल
ED की ताजा कार्रवाई में जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च हुई करीब 494 करोड़ रुपये की रकम जांच के केंद्र में है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विश्वविद्यालय की जमीन, निर्माण कार्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य गतिविधियों पर हुए खर्च का पूरा वित्तीय ब्योरा जांच एजेंसियों के सामने सवाल बना हुआ है। आयकर विभाग पहले भी ट्रस्ट से इस रकम के स्रोत और इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेज मांग चुका है।मामले में खास बात यह है कि निर्माण कार्य के मूल्यांकन में करीब 494 करोड़ रुपये का खर्च सामने आने की बात कही गई, जबकि ट्रस्ट की ओर से कहीं कम रकम खर्च किए जाने का दावा किया गया था। इसी अंतर ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। हालांकि, केवल खर्च और उपलब्ध रिकॉर्ड में अंतर होना अपने आप में मनी लॉन्ड्रिंग या काला धन साबित नहीं करता। इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
2015 से 2020 तक के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच
आयकर विभाग की पिछली कार्रवाई में ट्रस्ट से वर्ष 2015 से 2020 के बीच हुई आय और खर्च का रिकॉर्ड मांगा गया था। विभाग ने विश्वविद्यालय के लिए खरीदी गई जमीन, निर्माण और बुनियादी ढांचे पर किए गए खर्च से संबंधित दस्तावेज भी तलब किए थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल हुई बड़ी रकम किन स्रोतों से आई। इसके अलावा ट्रस्ट के बैंक खातों, दान और दूसरे वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। अब ED की छापेमारी के बाद इन सभी रिकॉर्ड की जांच और महत्वपूर्ण हो गई है।
11 फर्मों से मिले दान पर भी सवाल
जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों में कथित तौर पर 11 संस्थाओं और फर्मों से मिले दान का मुद्दा भी जांच के दायरे में है। आयकर विभाग ने इन संस्थाओं से जुड़े दस्तावेज और ट्रस्ट को दिए गए दान का विवरण मांगा था। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि इन 11 संस्थाओं की वास्तविक मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। आयकर विभाग की कार्रवाई के मुताबिक, ट्रस्ट द्वारा बताए गए दान और संबंधित संस्थाओं के रिकॉर्ड की जांच की गई थी। इन लेनदेन की प्रकृति और रकम के स्रोत को लेकर एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं। यही वजह है कि ED की मौजूदा जांच में ट्रस्ट की फंडिंग एक अहम पहलू बन गई है।

जून में ट्रस्ट की आयकर छूट भी हुई थी रद्द
ED की छापेमारी से पहले आयकर विभाग ने जून 2026 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के खिलाफ बड़ा कदम उठाया था। 23 जून को विभाग ने ट्रस्ट की आयकर छूट खत्म करने का फैसला लिया था। विभाग की जांच में कथित वित्तीय अनियमितताओं और ट्रस्ट की घोषित गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। आयकर विभाग ने सितंबर 2023 में हुई तलाशी और उसके बाद की जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की थी। विभाग ने ट्रस्ट से उसकी आय, खर्च और दान से जुड़े रिकॉर्ड मांगे थे।
ED ने 10 ठिकानों पर की छापेमारी
बुधवार सुबह ED की टीम ने रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय और आजम खान के जेल रोड स्थित आवास समेत कई स्थानों पर तलाशी शुरू की। इसके अलावा सहारनपुर और दिल्ली में भी कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुल करीब 10 ठिकाने जांच के दायरे में रहे। तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों ने वित्तीय दस्तावेजों और ट्रस्ट से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की। जौहर विश्वविद्यालय परिसर में भी ED की कार्रवाई को लेकर हलचल देखी गई। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
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जुलाई में ED ने मांगी थी जानकारी
ED की मौजूदा कार्रवाई से पहले जुलाई में एजेंसी ने आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों और उनसे संबंधित जानकारी पुलिस एवं प्रशासन से मांगी थी। इसके बाद से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि केंद्रीय जांच एजेंसी जौहर विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े मामले में आगे कार्रवाई कर सकती है।अब छापेमारी के बाद एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि ट्रस्ट के पास आई रकम और विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च के बीच क्या संबंध है। इसके साथ ही कथित दान और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जाएगी।
2022 में भी ED पहुंची थी जौहर यूनिवर्सिटी
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में ED की दिलचस्पी नई नहीं है। वर्ष 2022 में भी एजेंसी की टीम विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच के लिए रामपुर पहुंची थी। अब चार साल बाद एक बार फिर ED की कार्रवाई ने विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों को सुर्खियों में ला दिया है।इस बार जांच का फोकस कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं पर है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि जांच में किसी अपराध के पुख्ता सबूत मिले हैं।
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आगे क्या हो सकता है?
ED की छापेमारी के बाद अब जांच एजेंसी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर सकती है। अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध धन के इस्तेमाल से जुड़े ठोस सबूत मिलते हैं, तो एजेंसी कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती है। इसमें संपत्तियों की जांच और जरूरत पड़ने पर जब्ती जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
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