Ayodhya Deepotsav 2026: CM योगी के मार्गदर्शन में भव्य होगा दीपोत्सव, तैयारियों में जुटा प्रशासन
Ayodhya Deepotsav 2026, उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव 2026 को भव्य और यादगार बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन आयोजन को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक बनाने में जुटा है।

Ayodhya Deepotsav 2026 : 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये, जानें क्या है प्रशासन की तैयारी
Ayodhya Deepotsav 2026, उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव 2026 को भव्य और यादगार बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन आयोजन को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक बनाने में जुटा है। इस साल दीपोत्सव का दसवां संस्करण 7 नवंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान सरयू तट और राम की पैड़ी सहित प्रमुख स्थानों पर लाखों दीये जलाने की तैयारी है। इसके अलावा रामायण पर आधारित ड्रोन शो, सरयू आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि श्रद्धालुओं को धार्मिक आयोजन में शामिल होने के दौरान सुविधाजनक आवागमन, साफ-सफाई और सुरक्षा की व्यवस्था मिले।

7 नवंबर को होगा दसवां दीपोत्सव
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। तब से यह आयोजन शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा एक प्रमुख उत्सव बन गया है। वर्ष 2026 में इसके दसवें संस्करण का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर प्रशासन और आयोजन से जुड़े विभागों की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन की भव्यता के साथ धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा और लोगों को सही दिशा बताने वाले संकेतकों की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है। आयोजन को सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी जरूरी माना जा रहा है।
56 घाटों पर जलाए जाएंगे 30 लाख दीये
इस साल दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए घाटों की सफाई के बाद दीयों को व्यवस्थित ढंग से रखने के लिए मार्किंग का काम शुरू किया गया है। आयोजन में बड़ी संख्या में दीयों की जरूरत को देखते हुए लगभग 33 लाख दीये जुटाने की तैयारी है, ताकि परिवहन या उन्हें सजाने के दौरान कुछ दीये टूटने पर भी निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा सके।दीयों को घाटों पर व्यवस्थित रूप से लगाने और कार्यक्रम के दौरान उन्हें प्रज्वलित करने के लिए स्वयंसेवकों की मदद ली जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, इस बार करीब 35 हजार स्वयंसेवकों के आयोजन में शामिल होने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में दीयों को निर्धारित समय पर व्यवस्थित करना प्रशासन और आयोजन से जुड़े लोगों के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।दीपोत्सव के दौरान रोशनी और सजावट के जरिए अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों को उत्सव का स्वरूप देने की योजना है। हालांकि, अंतिम व्यवस्था और कार्यक्रम स्थल पर लागू निर्देशों के लिए प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना जरूरी होगा।
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2,100 ड्रोन से दिखाई जाएगी रामायण की झलक
दीपोत्सव 2026 का एक प्रमुख आकर्षण रामायण पर आधारित एरियल शो होगा। इसके लिए 2,100 स्वदेशी ड्रोन के इस्तेमाल की योजना है। आसमान में रोशनी और ड्रोन के जरिए रामायण से जुड़े दृश्य प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही लेजर प्रस्तुति और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने हैं।आयोजन के दौरान सरयू आरती में 2,147 प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना है। राम की पैड़ी पर लगभग 200 कलाकारों की प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। इसके अलावा गोंडा पुल के पास ग्रीन आतिशबाजी और अंतरराष्ट्रीय रामलीला दलों की प्रस्तुतियों की भी योजना बनाई गई है।इन कार्यक्रमों का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को एक साथ मंच देना है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए इन कार्यक्रमों के संचालन, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा की व्यवस्था को समय से पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

तीन चरणों में आयोजित होंगे कार्यक्रम
दीपोत्सव के कार्यक्रमों को तीन प्रमुख चरणों में आयोजित करने की योजना है। पहले चरण में साकेत महाविद्यालय से रामायण के प्रसंगों पर आधारित सांस्कृतिक झांकियों और प्रस्तुतियों के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें भगवान श्रीराम के जीवन और रामायण से जुड़े प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा।दूसरे चरण में रामकथा पार्क में कार्यक्रम होंगे। इनमें भगवान श्रीराम और माता सीता की भूमिका निभाने वाले कलाकारों का प्रतीकात्मक आगमन, भरत मिलाप और श्रीराम का राज्याभिषेक जैसे आयोजन शामिल होंगे।तीसरे चरण में सरयू आरती, दीप प्रज्वलन, राम की पैड़ी पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, ड्रोन शो और लेजर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अलग-अलग चरणों में कार्यक्रम होने से प्रशासन को भीड़ और यातायात व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभालने की योजना बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि, श्रद्धालुओं को कार्यक्रमों के समय और प्रवेश व्यवस्था के बारे में प्रशासन की ताजा सूचना जरूर देखनी चाहिए।
संतों और जनप्रतिनिधियों से भी लिए जा रहे सुझाव
दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन संत-महात्माओं और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहा है। 26 अक्टूबर को जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने तुलसी उद्यान भवन में बैठक कर आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा की। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर भी मौजूद रहे।बैठक के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और सुगम आवागमन जैसे विषयों पर सुझाव दिए गए। संतों ने यह भी कहा कि आयोजन समाप्त होने के बाद व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि घाटों और धार्मिक स्थलों पर साफ-सफाई बनी रहे। प्रमुख स्थानों पर धार्मिक और दर्शनीय स्थलों के नक्शे लगाने तथा दूसरे जिलों के साथ समन्वय बढ़ाकर वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान बनाने पर भी जोर दिया गया।

सड़कों की सजावट और सुरक्षा पर भी ध्यान
दीपोत्सव से पहले अयोध्या की प्रमुख सड़कों को सजाने और शहर की सुंदरता बढ़ाने का काम भी किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग की ओर से रामपथ, धर्मपथ और महोबरा मार्ग के डिवाइडर तथा रेलिंग की मरम्मत और रंगाई-पुताई की जा रही है। त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना को देखते हुए शहर की प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है।सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण, दिशा-सूचक बोर्ड, साफ-सफाई और रोशनी जैसे इंतजाम भी तैयारियों का अहम हिस्सा हैं। आयोजन के दौरान भीड़ बढ़ने पर यातायात में बदलाव या कुछ मार्गों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसलिए अयोध्या आने वाले लोगों को यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी देखनी चाहिए।कुल मिलाकर, दीपोत्सव 2026 के लिए अयोध्या में तैयारियां कई स्तरों पर आगे बढ़ रही हैं। 30 लाख दीयों, 2,100 ड्रोन के शो, सरयू आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ इस आयोजन को विशेष बनाने की योजना है। प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि कार्यक्रम भव्य होने के साथ-साथ सुरक्षित, स्वच्छ और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक भी रहे।
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