कैसा होता है लड़के और लड़कियों के लिए ब्रेकअप के बाद का दौर

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कैसा होता है लड़के और लड़कियों के लिए ब्रेकअप के बाद का दौर
अकेलापन

ब्रेकअप के बाद का दौर


कहते है कि हर अँधेरी रात के बाद उज्जवल समय ज़रूर आता है पर सुहानी सुबह के बाद एक बार अँधेरा भी छाता है। वैसे तो, इनमें से कुछ भी हमारे हाथ में नहीं होता। ज़िन्दगी का कोई भी हिस्सा हम अपनी मर्ज़ी से नहीं लिख सकते। अगर ऐसा होता तो शायद हम अपनी ज़िन्दगी में गम को कोई हिस्सा ही ना देते। हर रिश्ते को अपनी मर्ज़ी से लिखते और उसमे किसी भी प्रकार की गलतफेहमिया, लड़ाइयाँ सब निकाल देते।

कुछ ऐसा ही होता है रिलेशनशिप्स में। जब प्यार की शुरआत होती है तब सभी कुछ बहुत ही अच्छा एयर सुहाना सा लगता है पर जब उस रिश्ते में दरार आणि शुरू होती तब वही सुहानापन बोझ सा लगने लगता है। और फिर जब ये बोझ संभलता नहीं तब प्यार खत्म, रिश्ता खत्म और ब्रेकअप। वो सभी चीज़े जो कभी ख़ुशी देती थी आज वही परेशानी का कारण बन जाती है।

जानते है कैसा होता है ब्रेकअप के बाद का दौर :-

  • झटका

अब ब्रेकअप लड़का करे या लड़की इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ब्रेकअप होता है और इस बात का असर दोनों पर ही बराबरी का पड़ता है। दोनों के लिए ही इस बात को स्वीकार करना थॉद मुश्किल हो जाता है।

कैसा होता है लड़के और लड़कियों के लिए ब्रेकअप के बाद का दौर
ब्रेकअप के बाद
  • अस्वीकृति

इस बात को स्वीकार करना थोड़ा मुश्किल होता है। किस के लिए आसान होता है इस बात को स्वीकार करना की जिसके साथ उन्होंनो इतना अच्छा और प्यार समय बिताया, अब वो उनके साथ नहीं होंगे। बस फिर रोना- धोना और इमोशनल होना, यही रह जाता है।

  • अकेलापन

ज़ाहिर सी बात है कि पहले हम अपना अधिकतर समय अपने पार्टनर के साथ बिताते थे। चाहे वो साथ में हो या फिर फ़ोन पर बात करते हुए। हम उनके साथ हर समय किसी न किसी तरह से टच में रहते थे, पर अब कोई नहीं होता। हम बहुत अकेले हो जाते हैं।

कैसा होता है लड़के और लड़कियों के लिए ब्रेकअप के बाद का दौर
अकेलापन
  • गुस्सा

हम इतनी सारी भावनाओ को महसूस कर रहे होते है कि हम एक हद के बाद गुस्सा करना शुरू कर देते है। ये सभी भावनाएं कब गुस्से में परिवर्तित हो जाती है, इसे भी समझना मुश्किल है। पर ये अकेलेपन की भावना हम में तनाव पैदा कर देती है जो अंत में गुस्से का रूप ले लेती है।

  • रीबाउंड

इसमें आप अपने भूतकाल को भूल कर आगे बढ़ जाते है। इसमें हम इस बात को स्वीकार कर लेते है कि वो गुज़रा हुआ कल था। शायद ये हमारे नसीब में नही था इसलिए नहीं मिला। इस दौर में हम आगे बढ़ने की कोशिश करते है और एक नयी शुरुआत करते है।

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