Tips to prevent heart attack in winter: ठंड बढ़ते ही क्यों बढ़ जाते हैं हार्ट अटैक के मामले?
Tips to prevent heart attack in winter:ठंड के मौसम में हार्ट अटैक के जोखिम क्यों बढ़ते हैं, इसके मुख्य कारक, शुरुआती चेतावनी संकेत और बचाव के आसान उपाय जानें। कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह और विशेषज्ञ टिप्स भी शामिल।
Tips to prevent heart attack in winter:सर्दी में दिल का दौरा क्यों बढ़ता है? कारण, लक्षण, बचाव और एक्सपर्ट सलाह
Tips to prevent heart attack in winter सर्दियों के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ठंड शरीर की रक्त नलिकाओं को सिकोड़ देती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके साथ ही कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ता प्रदूषण भी जोखिम को बढ़ाते हैं। ऐसे में हार्ट अटैक के कारणों, लक्षणों और बचाव के उपायों को जानना बेहद जरूरी है।
जानें क्यों बढ़ता है जोखिम?
जैसे ही तापमान गिरता है, दिल के दौरे (हार्ट अटैक) की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जाती है। सर्द मौसम दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है और कई बदलाव शरीर में होने लगते हैं, जिससे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम प्रभावित होता है।
सर्दियों में हार्ट अटैक क्यों? 5 बड़े कारण

1. रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना (Vasoconstriction)
ठंडी हवा के संपर्क में आने पर रक्त वाहिकाएँ संकुचित हो जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल को खून पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
2. ब्लड का गाढ़ा होना (Thicker Blood)
सर्द मौसम में रक्त अधिक चिपचिपा हो सकता है और रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे ब्लड क्लॉट बन सकते हैं जो हार्ट अटैक का कारण बनते हैं।
3. गतिविधि में कमी और वजन बढ़ना
बाहर ठंड होने की वजह से लोग अक्सर घर के अंदर रहते हैं, शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं और भारी खाने की ओर रुख करते हैं — यह सभी फैक्टर कार्डियोवैस्कुलर रिस्क बढ़ाते हैं।
4. सर्दी-बीमारियाँ और इन्फेक्शन
विंटर में फ्लू, सर्दी या निमोनिया जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ता है, जो शरीर में सूजन पैदा करके दिल पर तनाव बढ़ा सकते हैं।
5. श्वसन प्रणाली पर प्रभाव
सर्द हवा और प्रदूषण मिलकर फेफड़ों और हृदय के बीच ऑक्सीजन सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे हृदय को काम ज्यादा करना पड़ता है।
इन्हें कभी न अनदेखा करें

हार्ट अटैक के संकेत मौसम से प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन इन्हें तुरंत पहचानना बेहद जरूरी है:
- छाती में तीव्र या स्थायी दर्द – बाएं या बीच में
- साँस की कठिनाई / सांस फूलना
- अचानक पसीना आना या मतली महसूस होना
- थकान, चक्कर आना या बेहोशी जैसा अनुभव
- कन्धे, गर्दन या जबड़े में दर्द
- बेहोशी का अनुभव या असंतुलन
- सीने के दबाव या भारीपन जैसा एहसास
ये संकेत सामान्य सर्दी के लक्षण न होकर हार्ट अटैक की चेतावनी हो सकते हैं।
यदि इन लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
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बचाव के प्रभावी उपाय

1. नियमित व्यायाम और वॉक करें
अगर बाहर ठंड है तो हल्का इनडोर व्यायाम जैसे योग या स्ट्रेचिंग करें — रक्त संचार के लिए यह जरूरी है।
2. तापमान के अनुसार कपड़े पहने
गरम कपड़े, टोपी, दस्ताने और सॉक्स पहने — शरीर जल्दी गर्म रहता है तो रक्तवाहिकाओं पर दबाव कम होता है।
3. हेल्दी डायट अपनाएं
भारी और तले-भुने खाद्य पदार्थों से बचें। अधिक फाइबर, ओमेगा-3 और हृदय-स्वस्थ भोजन लें
4. हाइड्रेशन पर ध्यान दें
ठंड में पानी कम पीना आम है, लेकिन यह रक्त को गाढ़ा कर सकता है। रोज पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
5. नियमित चेक-अप और दवाइयाँ लें
अगर आपका ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज़ है तो डॉक्टर की सलाह के हिसाब से दवाइयाँ लें।
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कौन अधिक जोखिम में?
- पहले से हार्ट रोग वाले
- उच्च रक्तचाप व मधुमेह के मरीज
- धूम्रपान करने वाले
- अधिक वजन या अस्थिर लाइफस्टाइल वाले लोग
- वृद्ध लोग
इन समूहों को सर्दियों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ठंड सिर्फ मौसम नहीं, स्वास्थ्य चुनौती भी है
सर्दी का मौसम सुंदर हो सकता है, लेकिन यह हार्ट अटैक जैसे गंभीर जोखिम को भी बढ़ा सकता है। सही जानकारी, चेतावनी संकेतों की पहचान और सकारात्मक जीवनशैली आपको इस खतरे से बचा सकती है। समय रहते चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें — आपकी जान की रक्षा इसी में है!
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