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Thalassemia: क्या आपका बच्चा हमेशा थका रहता है? जानें थैलेसीमिया के लक्षण

Thalassemia, बच्चों का बार-बार थका हुआ महसूस करना, कमजोरी रहना या खेलने-कूदने में जल्दी थक जाना अक्सर माता-पिता सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

Thalassemia : बच्चों में इन संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Thalassemia, बच्चों का बार-बार थका हुआ महसूस करना, कमजोरी रहना या खेलने-कूदने में जल्दी थक जाना अक्सर माता-पिता सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार ये लक्षण किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। ऐसी ही एक बीमारी है थैलेसीमिया (Thalassemia), जो बच्चों में खून से जुड़ी गंभीर आनुवंशिक समस्या मानी जाती है।अगर समय रहते इस बीमारी की पहचान हो जाए तो बच्चे को बेहतर इलाज और देखभाल मिल सकती है। इसलिए माता-पिता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि थैलेसीमिया क्या है, इसके लक्षण क्या होते हैं और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।

क्या है थैलेसीमिया?

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक (Genetic) रक्त रोग है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।जब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है तो बच्चे को एनीमिया यानी खून की कमी की समस्या होने लगती है। यही वजह है कि बच्चा कमजोर और थका हुआ महसूस करता है।

क्यों होता है थैलेसीमिया?

यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए पहुंचती है। अगर माता और पिता दोनों थैलेसीमिया ट्रेट (Carrier) हों, तो बच्चे में यह बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार माता-पिता को खुद यह जानकारी नहीं होती कि वे थैलेसीमिया के वाहक हैं। इसलिए शादी से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान थैलेसीमिया जांच करवाना बेहद जरूरी माना जाता है।

बच्चों में दिखने वाले प्रमुख लक्षण

थैलेसीमिया के लक्षण शुरुआत में सामान्य कमजोरी जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

बार-बार कमजोरी और थकान

बच्चा जल्दी थक जाता है और खेलकूद में रुचि कम दिखाता है।

शरीर पीला पड़ना

खून की कमी की वजह से त्वचा और होंठ पीले दिखाई दे सकते हैं।

भूख कम लगना

बच्चों में खाने की इच्छा कम हो सकती है।

वजन और लंबाई का धीमा विकास

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।

सांस फूलना

थोड़ी गतिविधि करने पर भी बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

बार-बार बीमार पड़ना

कमजोर शरीर की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

थैलेसीमिया के प्रकार

थैलेसीमिया माइनर

इसमें लक्षण हल्के होते हैं और कई बार व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि वह इस बीमारी का वाहक है।

थैलेसीमिया मेजर

यह गंभीर स्थिति होती है, जिसमें बच्चे को नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।

कैसे होती है जांच?

अगर बच्चे में लगातार कमजोरी और एनीमिया के लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

  • CBC टेस्ट
  • हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस
  • जेनेटिक टेस्ट

इन जांचों के जरिए बीमारी की पुष्टि की जाती है।

क्या है इसका इलाज?

थैलेसीमिया का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।

नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन

गंभीर मरीजों को समय-समय पर खून चढ़ाना पड़ता है।

आयरन कंट्रोल थेरेपी

बार-बार खून चढ़ाने से शरीर में आयरन बढ़ सकता है, इसलिए उसे नियंत्रित करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट

कुछ मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट स्थायी इलाज साबित हो सकता है।

बचाव कैसे करें?

थैलेसीमिया से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।

शादी से पहले जांच

अगर दोनों पार्टनर थैलेसीमिया ट्रेट हैं, तो बच्चे में बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान टेस्ट

समय रहते जांच कराने से बीमारी की पहचान संभव हो सकती है।

जागरूकता फैलाना

लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी देना जरूरी है ताकि समय पर कदम उठाए जा सकें।

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बच्चों की डाइट का रखें ध्यान

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को पोषण से भरपूर भोजन देना जरूरी होता है।

  • हरी सब्जियां
  • फल
  • प्रोटीन युक्त भोजन
  • पर्याप्त पानी

हालांकि डॉक्टर की सलाह के बिना आयरन सप्लीमेंट नहीं देना चाहिए, क्योंकि कुछ मरीजों में आयरन ज्यादा होना नुकसानदायक हो सकता है।

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माता-पिता क्या करें?

अगर बच्चा लगातार कमजोर महसूस करता है या जल्दी थक जाता है, तो इसे हल्के में न लें। समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।माता-पिता को बच्चे की डाइट, नींद और नियमित जांच का खास ध्यान रखना चाहिए। साथ ही बच्चे को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाना जरूरी है ताकि वह खुद को दूसरों से अलग महसूस न करे।थैलेसीमिया एक गंभीर लेकिन जागरूकता से नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। बच्चों में बार-बार कमजोरी, थकान और एनीमिया जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करवानी चाहिए।समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चे सामान्य और बेहतर जीवन जी सकते हैं। इसलिए इस बीमारी को लेकर जागरूक रहना और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना बेहद जरूरी है।

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