Cancer Risk: चाय-कॉफी पीने वालों के लिए जरूरी खबर! बहुत गर्म पेय से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा
Cancer Risk, सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी के एक गर्म कप से करना भारत समेत दुनिया के कई देशों में लोगों की रोजमर्रा की आदत है। कई लोग चाय या कॉफी को तब तक पीना शुरू नहीं करते, जब तक वह बिल्कुल गर्म न हो। लेकिन अब सामने आई नई रिसर्च ने इस आदत को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Cancer Risk : कप में चाय है या कैंसर का खतरा? बहुत गर्म पेय को लेकर सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
Cancer Risk, सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी के एक गर्म कप से करना भारत समेत दुनिया के कई देशों में लोगों की रोजमर्रा की आदत है। कई लोग चाय या कॉफी को तब तक पीना शुरू नहीं करते, जब तक वह बिल्कुल गर्म न हो। लेकिन अब सामने आई नई रिसर्च ने इस आदत को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, समस्या सिर्फ चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन या अन्य तत्वों की नहीं है, बल्कि पेय पदार्थ का बहुत ज्यादा गर्म होना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर बहुत गर्म पेय पदार्थों को लंबे समय तक पीने की आदत को食नली यानी Esophagus के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।
नई रिसर्च में क्या सामने आया?
हालिया रिपोर्ट में Oxford Population Health के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए बड़े अध्ययन के निष्कर्ष चर्चा में हैं। इस रिसर्च में करीब 10 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और शोधकर्ताओं ने गर्म पेय पदार्थों के तापमान तथा इसोफेजियल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा यानी食नली के एक प्रकार के कैंसर के बीच संबंध देखा। रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग अपने पेय को सामान्य गर्म या गुनगुने तापमान की तुलना में बहुत ज्यादा गर्म पसंद करते थे, उनमें इस कैंसर का जोखिम अधिक पाया गया। हालांकि, इस तरह की रिसर्च को यह समझने के लिए पढ़ना जरूरी है कि यह चाय या कॉफी को कैंसरकारी घोषित नहीं करती। वैज्ञानिकों की चिंता मुख्य रूप से उस तापमान को लेकर है जिस पर पेय पदार्थ का सेवन किया जाता है।
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65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर बढ़ सकती है चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी International Agency for Research on Cancer यानी IARC ने पहले ही 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर पिए जाने वाले बहुत गर्म पेय पदार्थों को ‘probably carcinogenic to humans’ यानी मनुष्यों के लिए संभवतः कैंसरकारी की श्रेणी में रखा है। इसका संबंध खास तौर पर食नली के कैंसर से बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि 65 डिग्री सेल्सियस से ऊपर की हर चाय पीने वाले व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा। IARC ने खुद स्पष्ट किया है कि इस वर्गीकरण से किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत कैंसर जोखिम की मात्रा तय नहीं होती। उपलब्ध प्रमाण केवल यह बताते हैं कि बहुत गर्म पेय और食नली के कैंसर के बीच एक संभावित संबंध है।
आखिर गर्म चाय-कॉफी से शरीर को क्या नुकसान हो सकता है?
बहुत गर्म तरल पदार्थ食नली की अंदरूनी परत को बार-बार गर्मी से नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति रोजाना लंबे समय तक बेहद गर्म चाय या कॉफी पीता है, तो इससे食नली में बार-बार जलन और सूजन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार होने वाली ऐसी थर्मल इंजरी समय के साथ कैंसर के विकास से जुड़े बदलावों में भूमिका निभा सकती है। यानी यहां मुख्य सवाल यह नहीं है कि कप में चाय है या कॉफी, बल्कि यह है कि वह कितनी गर्म है और किस तापमान पर पी जा रही है।
क्या चाय और कॉफी पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए?
नहीं। मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर हर व्यक्ति को चाय या कॉफी छोड़ने की जरूरत नहीं है। IARC की समीक्षा में सामान्य कॉफी सेवन को कैंसर के लिहाज से स्पष्ट रूप से कैंसरकारी नहीं माना गया था। वहीं यूरोप में किए गए एक बड़े अध्ययन में चाय और कॉफी की सामान्य मात्रा और食नली के कैंसर के बीच कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया। कॉफी को लेकर 2025 में प्रकाशित एक जापानी prospective cohort study में भी कॉफी पीने और食नली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच कोई मजबूत संबंध नहीं मिला। इससे यह बात और महत्वपूर्ण हो जाती है कि पेय की मात्रा और तापमान को अलग-अलग समझना जरूरी है।
कितनी गर्म चाय या कॉफी नहीं पीनी चाहिए?
सिर्फ देखकर किसी पेय का सटीक तापमान बताना मुश्किल होता है। इसलिए सबसे आसान तरीका है कि चाय या कॉफी बनाने के तुरंत बाद उसे न पिएं। कुछ मिनट इंतजार करें और जब वह पीने लायक गर्म रह जाए, तब सेवन करें।IARC के अनुसार 65 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के पेय को ‘very hot’ माना जाता है। इसलिए उबलते या मुंह को जलाने वाले पेय से बचना बेहतर है। अगर चाय या कॉफी पीते समय जीभ, होंठ या मुंह जलने जैसा महसूस हो रहा है, तो यह संकेत है कि पेय को थोड़ा ठंडा होने देना चाहिए।
कैंसर के दूसरे जोखिमों को भी नजरअंदाज न करें
食नली के कैंसर का जोखिम केवल गर्म पेय पदार्थों से तय नहीं होता। धूम्रपान और शराब का सेवन इसके महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं। IARC ने भी इन कारकों को食नली के कैंसर के प्रमुख कारणों में गिना है। इसलिए केवल चाय या कॉफी का तापमान कम करना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। धूम्रपान से बचना, शराब का सेवन सीमित करना, संतुलित आहार लेना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करना भी जरूरी है।
आज से बदलें चाय-कॉफी पीने की आदत
अगर आपको दिन में कई बार चाय या कॉफी पीने की आदत है, तो इसे तुरंत छोड़ने की जरूरत नहीं है। बस इसे बहुत गर्म पीने की आदत बदलें। कप में पेय डालने के बाद कुछ मिनट इंतजार करें और तापमान थोड़ा कम होने दें। खासतौर पर ऐसी चाय या कॉफी से बचें जो पीते समय मुंह या गले को जला दे।इस नई रिसर्च का सबसे बड़ा संदेश यही है कि चाय और कॉफी से डरने के बजाय उनके तापमान पर ध्यान देना चाहिए। सामान्य गर्म पेय और बहुत गर्म पेय में अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध शोध में कैंसर का संबंध मुख्य रूप से बहुत ज्यादा तापमान से सामने आया है, न कि सामान्य रूप से चाय या कॉफी पीने से। अगर किसी व्यक्ति को लगातार निगलने में परेशानी, खाना अटकने जैसा महसूस होना, बिना वजह वजन कम होना, लंबे समय तक सीने या गले में दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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