Guru Nanak Jayanti: क्यों कार्तिक मास में ही मनाई जाती है गुरु नानक जयंती

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Guru Nanak Jayanti

Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव और गुरु नानक जयंती से जुडी कुछ ख़ास बात


Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव सिख धर्म के दसवें गुरु थे और इन्होने ही सिख धर्म की स्थापना भी की थी। समाज में व्याप्त बुराइयों को हटाने के लिए गुरु नानक देव ने बिना अपनी पारिवारिक जीवन और सुख की चिंता किये बिना बड़ी दूर-दूर तक यात्रायें की थी और लोगो के मन में बस चुकी कुरीतियों को दूर करने की दिशा दिखाई थी। इस साल 12 नवंबर को गुरु नानक देव जयंती है। गुरु नानक जयंती का जन्म प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है इसका कारण है की गुरु देव ने समाज से कुरीतियों को दूर करने के लिए सारे सुख त्याग दिए थे और मानव जीवन को नई दिशा दी थी।

नानक जी का जन्म:

नानक जी का जन्म रावी नदी के किनारे सिस्त तलवंडी में हुआ था। खास बात यह है की इनके जन्म को लेकर काफी अलग-अलग तारीख़ें बताई गई हैं, मगर जो असल जन्म तारीख़ है वो कार्तिक मास की ही मानी जाती है, जो दिवाली के 15 दिन बाद पड़ती है। इनके पिता कल्याणचन्द्र मेहता थे। तलवंडी जगह का नाम आगे चल कर ननकाना पड़ गया। बचपन से ही नानक अच्छी बुद्धि के थे मगर उनका किसी भी प्रकार से पढाई में मन नहीं लगता था और आठ साल की उम्र में ही उन्होंने पढाई छोड़ दी थी।

क्यों मानते है गुरु नानक जयंती:

गुरु नानक जयंती सिखों का बहुत महत्वपूर्ण पर्व होता है, क्योंकि इस दिन गुरु नानक देव का जन्मदिन होता है। सिखों द्वारा सभी गुरुओं के जन्मदिन मनाए जाते है और इसे ‘गुरुपर्व’ कहा जाता है। इस प्रकार गुरु नानक जयंती को गुरु नानक गुरुपुरब कहा जाता है। इसे गुरु नानक का प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है।

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गुरुपुरब के 3 बड़े स्तर:

उत्तर भारत में गुरु नानक जयंती तीन दिनों तक बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

पहला दिन- अखंड पाठ: इस दिन गुरुद्वारों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और न केवल गुरुद्वारों में बल्कि घरों में भी 48 घंटों तक पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ बिना रुके किया जाता है। यह ‘पाठ’ जन्मदिन की सुबह ही खत्म होता है।

दूसरे दिन- प्रभात फेरी:गुरु की स्तुति करते हुए एक धार्मिक जुलूस, ‘शब्द’ के रूप में, सुबह जल्दी निकाला जाता है, और यह आस पास की गलियों से गुजरता हुआ पास के गुरुद्वारा में समापन होता है।

तीसरा दिन- गुरु नानक जयंती: गुरू नानक जयंती का वास्तविक दिन सुबह शुरू होता है, जिसमें कविताओं, भजन और उद्धरण के गायन होते हैं, जो गुरु नानक की जीवनी को कायम करते है। इसके बाद ‘ग्रंथ साहिब’ से कीर्तनों के साथ ‘कथा’ की जाती है। इन सबके बाद ‘कर्हा प्रसाद’ सभी को दिया जाता है।

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