विदेश

एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर अमेरिका और चीन के बीच ठनी

परमाणु आपूर्ति समूह(एनएसजी) में भारत की सदस्यता को लेकर अमेरिका और चीन में ठन गई है।

अमेरिका ने एनएसजी के सभी 48 सदस्यों देशों से अपील की है कि वह अगले सप्ताह सियोल में होने वाली बैठक में भारत का समर्थन करें।
वहीं दूसरी ओर कल ही चीन ने कहा था कि सियोल में होने वाली बैठक में किसी भी नए देश के एंट्री को लेकर कोई मुद्दा ही नहीं है।

अमेरिका ने सभी देशों से समर्थन करने की अपील की

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जोश अर्नेस्ट ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन ने कहा है कि हमारा मानना है कि यह कुछ समय से अमेरिका की नीति रही है कि भारत की सदस्तयता के लिए तैयार है और अमेरिका भाग लेने वाली सरकारों से अपील करता है कि वह एनएसजी की बैठक में भारत का पूर्ण समर्थन करें।

इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था कि नए देश की एंट्री के लेकर अभी सदस्य पूर्ण सहमत नहीं है आखिरी फैसला सबकी सर्वसम्मति से लिया जाएगा।

obama chinsing

बराक ओबामा और शी चिनशिंपं

एक विरोधी वोट भी भारत की दावेदारी के लिए खतरा

दरअसल एनएसजी परमाणु संबंधित मुद्दों को देखता है। इसके दायरे में आने वाले सभी 48 देश परमाणु प्रौद्योगिकी के व्यापार एवं उसका आयात निर्यात कर सकते है। जिसके कारण ही इसकी सदस्यता सर्वसम्मति से दी जाती है। वैसे तो अमेरिका,भारत के समर्थन की पूरी कोशिश कर रहा है। लेकिन अगर एक भी देश ने भारत के विरोध वोट कर देता है तो वह भारत की दावेदारी को कमजोर कर सकता है।

चीन एनएसजी भी भारत का पुरजोर विरोध कर है। चीन का कहना है जिन देशों का एनपीटी में हस्ताक्षर नहीं है उन्हें एंट्री नहीं मिलनी चाहिए।
आपको बता दें, एनएसजी का गठन 1974 में भारत के पहले परमाणु परीक्षण के बाद हुआ था। इसका लक्ष्य था दुनियाभर मे परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जाएं।

चीन के विरोध के बावजूद न्यूजीलैंड, बिट्रेन, रूस भारत के समर्थन के लिए आगे आए हैं।

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