मनोरंजन

Satluj Movie Controversy: विवाद के बीच चर्चा में आईं ये फिल्में, भारत में रोक लगी लेकिन दुनियाभर में बटोरीं वाहवाही

Satluj Movie Controversy, हाल ही में अभिनेता Diljit Dosanjh की फिल्म 'Satluj' एक बार फिर चर्चा में आ गई है। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने के बावजूद भारत में OTT से हटा दिया गया,

Satluj Movie Controversy : जब भारत में नहीं दिख सकीं ये फिल्में, लेकिन इंटरनेशनल मंचों पर मिली जबरदस्त पहचान

Satluj Movie Controversy, हाल ही में अभिनेता Diljit Dosanjh की फिल्म ‘Satluj’ एक बार फिर चर्चा में आ गई है। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने के बावजूद भारत में OTT से हटा दिया गया, जिससे सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस शुरू हो गई। हालांकि भारतीय सिनेमा के इतिहास में यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी कई ऐसी फिल्में रही हैं जिन्हें विदेशों में सम्मान, अवॉर्ड और दर्शकों का प्यार मिला, लेकिन भारत में उन्हें बैन, कानूनी विवाद या लंबे समय तक रिलीज पर रोक का सामना करना पड़ा।

 

1. कामसूत्र: ए टेल ऑफ लव (1996)

Kama Sutra: A Tale of Love का निर्देशन Mira Nair ने किया था। फिल्म अपने बोल्ड दृश्यों और यौन विषयवस्तु के कारण विवादों में आ गई।भारत में इसे लंबे समय तक रिलीज की अनुमति नहीं मिली और बाद में कई कट्स के साथ सीमित रूप में प्रदर्शित किया गया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में इसकी सिनेमैटोग्राफी और निर्देशन की काफी सराहना हुई।

2. बैंडिट क्वीन (1994)

Bandit Queen भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है। Shekhar Kapur द्वारा निर्देशित यह फिल्म Phoolan Devi के जीवन पर आधारित थी।फिल्म का प्रीमियर Cannes Film Festival में हुआ और इसे दुनियाभर में प्रशंसा मिली। लेकिन भारत में इसकी रिलीज कानूनी विवादों में फंस गई। बाद में अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे रिलीज किया गया।

images?q=tbn:ANd9GcSOk

3. ब्लैक फ्राइडे

Black Friday, जिसका निर्देशन Anurag Kashyap ने किया था, 1993 Bombay bombings पर आधारित थी।मामला अदालत में लंबित होने के कारण इसकी रिलीज कई वर्षों तक रोक दी गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में फिल्म को खूब सराहा गया और बाद में भारत में भी इसे आलोचकों की प्रशंसा मिली।

images?q=tbn:ANd9GcQlhqm8Voy

4. फायर

Fire भी विवादों में घिर गई थी। Deepa Mehta की इस फिल्म में समलैंगिक संबंधों को दिखाया गया था।भारत के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ सिनेमाघरों में तोड़फोड़ भी हुई। बाद में फिल्म दोबारा समीक्षा के बाद रिलीज हुई। विदेशों में इसे महिला अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर आधारित महत्वपूर्ण फिल्म माना गया।

Read More: EPFO New Website: EPFO का बड़ा अपडेट! अब वेबसाइट पर नहीं होंगे UAN से जुड़े ये 2 काम, UMANG ऐप से मिलेगी सुविधा

images?q=tbn:ANd9GcQuyF7Wg WwfyLbP94mgWU i veXz6rlzIiThEeCVhBnA&s=10

5. हवा आने दे

Hava Aney Dey को भी भारत में रिलीज संबंधी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में इसकी कहानी और प्रस्तुति की काफी प्रशंसा हुई। सेंसर से जुड़े विवादों के कारण यह भारत में व्यापक स्तर पर दर्शकों तक नहीं पहुंच सकी।

images?q=tbn:ANd9GcSKipKG ODATjU0K6MBupCMT81mY J5WoWJn LaOLTFKw&s=10

6. Satluj

हाल के दिनों में सबसे ज्यादा चर्चा Satluj की हो रही है। पहले इसका नाम Punjab 95 था। फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra के जीवन से प्रेरित बताई जाती है।फिल्म को थिएटर रिलीज के दौरान सेंसर संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बाद में इसे OTT पर रिलीज किया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद भारत में प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इस फैसले के बाद फिल्म को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई। वहीं, भारत के बाहर फिल्म को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

Read More: Donald Trump vs Giorgia Meloni:  पहले भिड़े, अब मेलोनी की खुद को निहारते हुए फोटो ट्रंप ने की शेयर, कैप्शन पढ़कर चिढ़ जाएंगी इटली की पीएम

सेंसरशिप पर फिर छिड़ी बहस

‘Satluj’ विवाद के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि फिल्मों में रचनात्मक अभिव्यक्ति और संवेदनशील विषयों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक पक्ष का मानना है कि विवादित विषयों पर बनी फिल्मों की समीक्षा जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है।भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में रही हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया, लेकिन भारत में उन्हें सेंसरशिप, कानूनी चुनौतियों या अस्थायी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। ‘कामसूत्र’, ‘बैंडिट क्वीन’, ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘फायर’, ‘हवा आने दे’ और अब ‘Satluj’ जैसी फिल्में यह दिखाती हैं कि कला, कानून और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना हमेशा आसान नहीं रहा है। ‘Satluj’ को लेकर जारी विवाद ने एक बार फिर इस बहस को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते  हैं info@oneworldnews.com.

Back to top button