NEET paper leak: CJP प्रदर्शन पर SC सख्त, पैलेट गन विवाद में RAF का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश
NEET paper leak, नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन इस्तेमाल को लेकर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों को असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है,
NEET paper leak : जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, पैलेट गन को लेकर आया बड़ा बयान
NEET paper leak, नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन इस्तेमाल को लेकर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों को असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है, लेकिन इसका प्रयोग केवल अपवादस्वरूप और तय नियमों के तहत ही होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के गोला-बारूद (Ammunition) लॉग को सुरक्षित रखने और अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया, ताकि घटना की निष्पक्ष जांच हो सके।

क्या है पूरा मामला?
20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर CJP समर्थकों का प्रदर्शन निकला था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। इसके बाद आरोप लगे कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए RAF ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोग घायल हुए। इस घटना के बाद विपक्ष, छात्र संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। हालांकि शुरुआती दौर में दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन इस्तेमाल के आरोपों से इनकार किया था, लेकिन बाद में विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और जांच से घटना को लेकर नए तथ्य सामने आए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के पास कई प्रकार के बल प्रयोग के विकल्प होते हैं। अदालत ने कहा कि पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि कुछ अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में इसका उपयोग आवश्यक हो सकता है।हालांकि कोर्ट ने यह भी दोहराया कि ऐसे हथियारों का इस्तेमाल अंतिम विकल्प (Last Resort) के रूप में ही होना चाहिए और प्रत्येक मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
RAF का एम्युनिशन लॉग सुरक्षित रखने का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि RAF का अम्म्युनिशन लॉग, हथियारों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं। अदालत ने कहा कि यह रिकॉर्ड जांच में अहम साक्ष्य साबित हो सकता है और इससे यह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान किस प्रकार के हथियार और कितनी मात्रा में इस्तेमाल किए गए।

रिकॉर्ड में क्या सामने आया?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आंतरिक जांच और पुलिस रिकॉर्ड में यह जानकारी सामने आई कि प्रदर्शन के दौरान एक RAF जवान ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के निर्देश पर एंटी-रायट गन से फायरिंग की थी। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं और कई लोगों का अस्पतालों में इलाज कराया गया।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा था। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि पैलेट गन जैसे हथियार का इस्तेमाल बिना उच्च स्तर की मंजूरी के संभव नहीं है और इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं विपक्ष ने संसद में भी इस मुद्दे पर सरकार से बयान की मांग की थी।
CRPF का पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद CRPF ने बयान जारी कर कहा कि उसके जवानों ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करते हुए ही कार्रवाई की। बल का कहना है कि स्थिति हिंसक हो गई थी और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव व अन्य हमले किए गए, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की गई।
अदालत ने जवाबदेही पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी बल प्रयोग में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। इसलिए बल प्रयोग हमेशा संतुलित, आवश्यक और परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए।
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आगे क्या होगा?
अब मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार से RAF के रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेज अदालत के सामने पेश करने की अपेक्षा है। इन दस्तावेजों के आधार पर अदालत यह देखेगी कि पैलेट गन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ, क्या निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ।यह मामला केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में भीड़ नियंत्रण, पुलिस बल के इस्तेमाल और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी संकेत देती है कि अदालत एक ओर सुरक्षा एजेंसियों के वैधानिक अधिकारों को स्वीकार करती है, वहीं दूसरी ओर उनके प्रयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्यायिक निगरानी को भी समान रूप से आवश्यक मानती है।
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