Nepali film controversy: नेपाल में क्यों रोकी गई ‘द्रौपदी’ की स्क्रीनिंग? आइटम सॉन्ग से लेकर महाभारत तक पूरा विवाद
Nepali film controversy, नेपाल में इन दिनों एक नेपाली फिल्म को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म का नाम है 'पांच पांडव', जो रिलीज से पहले ही धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस का विषय बन गई है।
Nepali film controversy : महाभारत के पांच पांडवों पर छिड़ी बहस, नेपाल में ‘द्रौपदी’ फिल्म को लेकर सरकार सख्त
Nepali film controversy, नेपाल में इन दिनों एक नेपाली फिल्म को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म का नाम है ‘पांच पांडव’, जो रिलीज से पहले ही धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस का विषय बन गई है। फिल्म के एक आइटम सॉन्ग में अभिनेत्री ईवा गिरी के डांस और द्रौपदी के नाम के इस्तेमाल को लेकर कुछ धार्मिक संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति जताई है। आरोप लगाया जा रहा है कि फिल्म में महाभारत के पवित्र पात्रों को गलत तरीके से दिखाया गया है। विरोध इतना बढ़ा कि नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय ने फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने के निर्देश दे दिए। खास बात यह है कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से पहले ही यूनिवर्सल सर्टिफिकेट मिल चुका था। इसके बावजूद रिलीज से ठीक पहले इस पर रोक लगा दी गई।यह मामला अब केवल एक फिल्म या गाने तक सीमित नहीं रह गया है। इसके जरिए नेपाल में धार्मिक आस्था, फिल्म निर्माताओं की रचनात्मक स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर चलने वाले बहिष्कार अभियानों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
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आखिर किस बात पर शुरू हुआ विवाद?
फिल्म ‘पांच पांडव’ का निर्देशन वसंत निरौला ने किया है। फिल्म में हरिवंश आचार्य, आर्यन सिग्देल और जीतू नेपाल जैसे कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म की कहानी और पोस्टर सामने आने के बाद ही कुछ लोगों ने इसके नाम और महाभारत से जुड़े किरदारों के संभावित चित्रण पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे।विवाद उस समय और बढ़ गया, जब फिल्म का गाना ‘तानीयों तानीयों’ रिलीज हुआ। इस गाने में अभिनेत्री ईवा गिरी आइटम डांस करती दिखाई देती हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि फिल्म में द्रौपदी जैसे धार्मिक और पौराणिक पात्र को बार डांसर के रूप में दिखाया गया है। उनका कहना है कि महाभारत की द्रौपदी का इस तरह चित्रण करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।कुछ धार्मिक संगठनों और धार्मिक अभियानों से जुड़े लोगों ने फिल्म का विरोध करते हुए इसे बॉयकॉट करने की अपील भी की। सोशल मीडिया पर फिल्म के कलाकारों और निर्देशक को निशाना बनाया गया। कुछ पोस्ट और टिप्पणियों में कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा और धमकी भरे संदेश भी सामने आए।

निर्देशक ने आरोपों पर क्या सफाई दी?
फिल्म के निर्देशक वसंत निरौला ने इन आरोपों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि दर्शक फिल्म को पूरी तरह देखे बिना ही निष्कर्ष निकाल रहे हैं। उनके मुताबिक, गाने में दिखाई गई महिला का किरदार महाभारत की द्रौपदी नहीं है।निर्देशक का कहना है कि फिल्म की कहानी को महाभारत की मूल कथा समझना गलत है। फिल्म में महाभारत के नामों और संदर्भों का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप में किया गया है, जबकि इसकी मुख्य कहानी भाइयों के आपसी रिश्तों पर केंद्रित है।उन्होंने यह भी कहा कि किसी फिल्म के ट्रेलर या कुछ सेकंड के वीडियो को देखकर पूरी कहानी के बारे में फैसला करना उचित नहीं है। दर्शकों को फिल्म देखने के बाद उसकी आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन रिलीज से पहले बहिष्कार अभियान चलाना फिल्म बनाने वालों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।गाने में डांस करने वाली अभिनेत्री ईवा गिरी ने भी कहा कि उनके किरदार को लेकर बिना पूरी जानकारी के निष्कर्ष नहीं निकाले जाने चाहिए।

नेपाल सरकार ने क्यों रुकवाई फिल्म की स्क्रीनिंग?
विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के गृह मंत्रालय ने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को निर्देश दिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नेपालगंज के मुख्य जिला अधिकारी दिलकुमार तामांग ने गृह मंत्रालय से फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने का अनुरोध किया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने संचार मंत्रालय को इस संबंध में कार्रवाई करने के लिए कहा।5 नवंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, संचार मंत्रालय ने फिल्म की निर्माण टीम को फिलहाल स्क्रीनिंग रोकने का निर्देश दिया। मंत्रालय की ओर से टीम को फोन करके एडवांस बुकिंग नहीं खोलने के लिए भी कहा गया। निर्माण टीम को आधिकारिक पत्र लेने के लिए मंत्रालय बुलाया गया।इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म जांच समिति यानी सेंसर बोर्ड पहले ही यूनिवर्सल सर्टिफिकेट दे चुका था। इसका मतलब था कि फिल्म को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मंजूरी मिल गई थी। लेकिन धार्मिक विवाद और विरोध के बाद सरकार ने इसकी स्क्रीनिंग रोकने का कदम उठाया।
5 नवंबर को फिल्म की टीम को बातचीत के लिए बुलाया गया
5 नवंबर को इस मामले में एक और नया घटनाक्रम सामने आया। नेपाल के संचार मंत्रालय ने फिल्म ‘पांच पांडव’ की निर्माण टीम को विवाद पर चर्चा के लिए बुलाया। रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म की रिलीज रोकने के लिए कुछ समूहों की ओर से दबाव बनाया जा रहा था। नेपालगंज के एक सिनेमाघर में फिल्म रिलीज होने पर तोड़फोड़ की धमकी मिलने की खबर भी सामने आई थी।इसी मामले की जानकारी गृह सचिव तक पहुंचने के बाद संचार मंत्रालय ने फिल्म निर्माताओं से बातचीत करने का फैसला किया। निर्देशक वसंत निरौला के मुताबिक, उनकी टीम को मंत्रालय की ओर से बातचीत के लिए बुलाया गया था। हालांकि, उन्होंने बताया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से अभी तक कोई आधिकारिक फोन नहीं मिला था और उनकी टीम के सदस्य चर्चा के लिए मंत्रालय जाने वाले थे।यह घटनाक्रम दिखाता है कि विवाद अब फिल्म के गाने और सोशल मीडिया विरोध से आगे बढ़कर सरकारी स्तर तक पहुंच चुका है।
हरिवंश आचार्य भी आए विवाद के घेरे में
इस विवाद में फिल्म के मुख्य कलाकार हरिवंश आचार्य का नाम भी चर्चा में रहा। फिल्म का पोस्टर जारी होने के बाद कुछ लोगों ने उनके किरदार को महाभारत के भीम से जोड़कर सवाल उठाए थे। इसके बाद निर्माण टीम को स्पष्ट करना पड़ा कि जीतू नेपाल का भीमसेन वाला किरदार महाभारत के भीम का सीधा चित्रण नहीं है।कुछ विरोधियों ने हरिवंश आचार्य के खिलाफ भी सोशल मीडिया पर अभियान चलाया और उनकी फिल्म का बहिष्कार करने की अपील की। हालांकि, फिल्म निर्माताओं का कहना है कि कलाकारों को बिना पूरी कहानी समझे निशाना बनाया जा रहा है।
धार्मिक भावनाएं बनाम रचनात्मक आजादी की बहस
‘पांच पांडव’ का विवाद नेपाल में एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। एक तरफ कुछ धार्मिक संगठनों का कहना है कि फिल्मों और मनोरंजन के नाम पर धार्मिक पात्रों का गलत चित्रण नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि आस्था से जुड़े किरदारों को दिखाते समय संवेदनशीलता बरतना जरूरी है।वहीं दूसरी तरफ फिल्म निर्माताओं और कई कलाकारों का कहना है कि किसी भी रचना का मूल्यांकन उसे पूरी तरह देखने के बाद होना चाहिए। केवल पोस्टर, ट्रेलर या गाने के छोटे हिस्से के आधार पर किसी फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग करना उचित नहीं है।नेपाल की फिल्म जांच समिति से जुड़े विशेषज्ञ मनोज पंडित ने भी फिल्म देखे बिना बहिष्कार अभियान चलाने और फिल्म निर्माताओं के खिलाफ हिंसक भाषा का इस्तेमाल करने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि दर्शकों को फिल्म देखने के बाद अपनी राय रखने का अधिकार है और फिल्म निर्माताओं की रचनात्मक स्वतंत्रता की भी रक्षा होनी चाहिए।नेपाल में इससे पहले भी फिल्मों को धार्मिक और सांस्कृतिक चित्रण को लेकर विरोध का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में फिल्म निर्माताओं और विरोध करने वाले संगठनों के बीच विवाद ने कई बार फिल्म की रिलीज को प्रभावित किया है।
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