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Kriti Sanon: किसी की पहचान इस्तेमाल करना अपराध नहीं! कृति सेनन केस में दिल्ली HC की अहम टिप्पणी

Kriti Sanon, बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपनी फिल्मों के अलावा पर्सनैलिटी राइट्स यानी व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर भी चर्चा में हैं। दरअसल, अभिनेत्री ने अपनी पहचान, नाम, तस्वीरों, आवाज और चेहरे के कथित दुरुपयोग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

Kriti Sanon : AI डीपफेक और फर्जी अकाउंट पर कृति सेनन की जंग, दिल्ली HC ने क्या कहा?

Kriti Sanon, बॉलीवुड अभिनेत्री Kriti Sanon इन दिनों अपनी फिल्मों के अलावा पर्सनैलिटी राइट्स यानी व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर भी चर्चा में हैं। दरअसल, अभिनेत्री ने अपनी पहचान, नाम, तस्वीरों, आवाज और चेहरे के कथित दुरुपयोग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी की पहचान का गलत इस्तेमाल करने की खुली छूट है। अदालत के मुताबिक, किसी व्यक्ति के नाम, चेहरे, आवाज या दूसरी पहचान से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह इस्तेमाल के तरीके और उससे पैदा होने वाले नुकसान के आधार पर तय किया जाएगा।

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, Kriti Sanon ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की थी। अभिनेत्री का आरोप था कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई लोग और संस्थाएं उनकी पहचान का इस्तेमाल बिना अनुमति कर रहे हैं। इसमें उनके नाम और तस्वीरों के जरिए फर्जी अकाउंट चलाना, उनकी तरफ से इवेंट और अपीयरेंस बुकिंग की पेशकश करना, AI की मदद से तस्वीरें और वीडियो तैयार करना तथा उनकी आवाज की नकल करना शामिल था।कृति की याचिका में यह भी बताया गया कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल करके आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री तैयार की जा रही थी। इसके अलावा, कुछ लोग उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल करके मर्चेंडाइज बेच रहे थे। अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि AI चैटबॉट और सिंथेटिक वॉयस मॉडल भी उनकी पहचान से मिलते-जुलते तरीके से पेश किए जा रहे हैं, जिससे लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।अभिनेत्री ने अदालत से मांग की थी कि बिना उनकी अनुमति के उनकी पहचान का इस तरह इस्तेमाल करने वाले लोगों और प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाए और आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट से हटाया जाए।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर चर्चा की। अदालत ने कहा कि पर्सनैलिटी राइट्स कोई एक स्वतंत्र कानूनी अधिकार या एक ही तरह का मुकदमा नहीं है। इसके अंतर्गत कई अलग-अलग अधिकार और कानूनी दावे आते हैं। इनमें पब्लिसिटी राइट्स, प्राइवेसी राइट्स, मानहानि, पासिंग ऑफ और कुछ परिस्थितियों में ट्रेडमार्क तथा कॉपीराइट से जुड़े अधिकार शामिल हो सकते हैं।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल मात्र अपने आप में गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। यह देखना जरूरी है कि पहचान का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया है और क्या उससे संबंधित व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।कोर्ट के मुताबिक, किसी व्यक्ति की पहचान का व्यावसायिक मूल्य हो सकता है। उदाहरण के लिए, किसी अभिनेत्री का चेहरा, नाम या आवाज विज्ञापन और ब्रांड प्रमोशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को अपनी पहचान के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति देने या उसका लाइसेंस देने का अधिकार हो सकता है। लेकिन किसी की पहचान का इस्तेमाल करके झूठा जुड़ाव दिखाना, धोखाधड़ी करना या उसकी निजता और गरिमा को नुकसान पहुंचाना अलग मामला है।

क्या पर्सनैलिटी राइट्स सिर्फ सेलिब्रिटीज के लिए हैं?

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक और अहम बात कही। कोर्ट के अनुसार, पर्सनैलिटी राइट्स केवल फिल्मी सितारों, खिलाड़ियों या मशहूर हस्तियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी पहचान से जुड़े अधिकार प्राप्त हैं।अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के प्रसिद्ध होने से उसकी पहचान का व्यावसायिक मूल्य बढ़ सकता है और उसके दुरुपयोग से होने वाले नुकसान का आकलन प्रभावित हो सकता है। लेकिन प्रसिद्ध होना इन अधिकारों को प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त नहीं है।यानी कोई आम व्यक्ति भी अपने नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान के गलत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी सुरक्षा मांग सकता है। हालांकि, हर मामले में यह देखा जाएगा कि किस अधिकार का उल्लंघन हुआ है और उसके समर्थन में क्या सबूत मौजूद हैं।

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Kriti Sanon को मिली अंतरिम राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने कृति सेनन की याचिका पर 29 अक्टूबर 2026 को अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने कुछ लोगों और संस्थाओं को अभिनेत्री की पहचान का दुरुपयोग करने वाली सामग्री तैयार करने, अपलोड करने या प्रसारित करने से रोक दिया।इस आदेश में AI से तैयार की गई अश्लील और मॉर्फ्ड तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो, अभिनेत्री बनकर पेश किए जाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट, उनके नाम से चलाए जा रहे फर्जी चैटबॉट और सिंथेटिक वॉयस मॉडल शामिल हैं। इसके अलावा, अदालत ने याचिका में चिन्हित कुछ आपत्तिजनक वेबपेज और लिंक को हटाने या उन तक पहुंच रोकने के निर्देश भी दिए।कोर्ट ने संबंधित इंटरनेट प्लेटफॉर्म को निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई करने और कुछ मामलों में संबंधित अकाउंट की जानकारी तथा IP लॉग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अश्लील डीपफेक सामग्री होस्ट करने वाली वेबसाइटों के संबंध में ब्लॉकिंग के निर्देश देने की बात भी कही गई।अदालत ने माना कि कृति सेनन की पहचान का इस्तेमाल करके कुछ सामग्री में उनके साथ झूठा जुड़ाव दिखाया गया और कुछ सामग्री उनकी निजता तथा गरिमा को प्रभावित करती है।

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10 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

अदालत ने साफ किया है कि फिलहाल दिए गए आदेश और टिप्पणियां अंतरिम व्यवस्था के लिए हैं। मामले में सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद ही पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।Kriti Sanon का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब AI तकनीक के जरिए किसी भी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज और वीडियो में बदलाव करना पहले से आसान हो गया है। ऐसे में यह मामला डिजिटल दुनिया में निजता, पहचान के व्यावसायिक इस्तेमाल और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अदालत की टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि किसी की पहचान का हर इस्तेमाल गैरकानूनी नहीं होता, लेकिन धोखाधड़ी, गलत तरीके से व्यावसायिक फायदा उठाने और किसी की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले इस्तेमाल पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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