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JFF 2026: फिल्मों में इंटीमेट सीन्स और सोशल मीडिया की चर्चा पर दिव्या दत्ता ने क्या कहा?

JFF 2026, फिल्मों में इंटीमेट सीन्स को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर बहस देखने को मिलती है। कई बार किसी फिल्म की पूरी कहानी और कलाकारों की मेहनत के बजाय उसके कुछ बोल्ड या इंटीमेट सीन चर्चा का विषय बन जाते हैं।

JFF 2026 : ‘कहानी अच्छी हो तो…’ इंटीमेट सीन्स के वायरल होने पर दिव्या दत्ता ने कही ये बात

JFF 2026, फिल्मों में इंटीमेट सीन्स को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर बहस देखने को मिलती है। कई बार किसी फिल्म की पूरी कहानी और कलाकारों की मेहनत के बजाय उसके कुछ बोल्ड या इंटीमेट सीन चर्चा का विषय बन जाते हैं। अब इस मुद्दे पर बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने अपनी राय रखी है। जागरण फिल्म फेस्टिवल (JFF) 2026 में पहुंचीं अभिनेत्री ने कहा कि दर्शक कई बार फिल्म के कुछ खास दृश्यों को ज्यादा महत्व देने लगते हैं, जबकि असल में किसी फिल्म की पहचान उसकी कहानी से बनती है। उनके मुताबिक, अगर कहानी अच्छी है तो इंटीमेट सीन्स की चर्चा कुछ समय बाद अपने आप खत्म हो जाती है।दिव्या दत्ता ने यह बात फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन एक बातचीत के दौरान कही। उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर किसी फिल्म के कुछ दृश्यों की छोटी-छोटी रील्स वायरल होना आम बात हो गई है। ऐसे में कई बार फिल्म के मुख्य विषय से ज्यादा ध्यान उन दृश्यों पर चला जाता है, जो पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भी नहीं होते।

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इंटीमेट सीन्स वायरल होने पर क्या बोलीं दिव्या दत्ता?

जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान दिव्या दत्ता से पूछा गया कि आजकल फिल्मों के इंटीमेट सीन्स सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं और उन पर काफी चर्चा होती है। इस पर अभिनेत्री ने कहा कि यह पूरी तरह दर्शकों पर निर्भर करता है कि वे किसी फिल्म में किस चीज को ज्यादा महत्व देते हैं।उन्होंने बताया कि कई बार कोई इंटीमेट सीन कहानी का उतना महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं होता, लेकिन सोशल मीडिया पर उसे आगे कर दिया जाता है। ऐसी रील्स आती हैं और कुछ समय तक चर्चा में रहती हैं। हालांकि, दिव्या के मुताबिक, आखिर में सबसे ज्यादा मायने फिल्म की कहानी रखती है।अभिनेत्री ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर कहानी अच्छी है तो दर्शक उसे पसंद करते हैं। इंटीमेट सीन्स आते-जाते रहते हैं, लेकिन एक अच्छी कहानी का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। उनके इस बयान को सिनेमा में कंटेंट और कहानी की अहमियत से जोड़कर देखा जा रहा है।

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चिरैया के बाद गजब रात में दिखा अलग अंदाज

इस बातचीत के दौरान दिव्या दत्ता ने अपने हालिया प्रोजेक्ट्स और अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के अनुभव पर भी बात की। अभिनेत्री ने बताया कि इस साल उन्हें कई अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने का मौका मिला है। खासतौर पर ‘चिरैया’ और ‘गजब रात’ जैसे प्रोजेक्ट्स में उनके किरदार एक-दूसरे से काफी अलग रहे हैं।’चिरैया’ में दिव्या दत्ता ने कमलेश का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों की सराहना मिली। वहीं, ‘गजब रात’ में वह सुनीता चौधरी के नेगेटिव किरदार में नजर आईं। एक तरफ उनका किरदार सकारात्मक छवि वाला था, तो दूसरी तरफ उन्होंने नकारात्मक भूमिका के जरिए अपनी अभिनय क्षमता के अलग पहलू दिखाए।दिव्या ने हंसते हुए कहा कि वह सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह के किरदारों को अच्छी तरह निभा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक कलाकार के तौर पर उन्हें अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलना और अलग-अलग भूमिकाएं करना पसंद है।

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एक ही तरह के किरदार नहीं करना चाहतीं दिव्या

दिव्या दत्ता का मानना है कि किसी कलाकार को एक ही तरह की भूमिकाओं में बंधकर नहीं रहना चाहिए। उनके मुताबिक, हर किरदार की अपनी अलग परत और कहानी होती है। एक कलाकार के लिए यह जरूरी है कि वह अलग-अलग परिस्थितियों और भावनाओं को पर्दे पर उतार सके।उन्होंने अपने किरदारों का उदाहरण देते हुए कहा कि कमलेश और सुनीता चौधरी दोनों ही अलग-अलग तरह की महिलाएं हैं। ऐसे किरदारों के जरिए उन्हें अपनी अभिनय क्षमता के नए पहलुओं को सामने लाने का मौका मिलता है।दिव्या का यह भी मानना है कि दर्शकों को कलाकारों को अलग-अलग भूमिकाओं में देखने का अवसर मिलना चाहिए। किसी अभिनेता या अभिनेत्री को सिर्फ उसकी पिछली भूमिका के आधार पर एक खास तरह के किरदार तक सीमित नहीं करना चाहिए।

FIRST LOOK Divya Dutta goes the badass way for Dhaakad

आने वाले दिनों में इन प्रोजेक्ट्स में आएंगी नजर

फेस्टिवल के दौरान दिव्या दत्ता ने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही अभिनेता मनोज बाजपेयी के साथ ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ में नजर आएंगी। यह प्रोजेक्ट ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाला है।इसके अलावा दिव्या दत्ता अभिनेता जिमी शेरगिल के साथ एक लव स्टोरी ‘तुम रहे न हम’ में भी दिखाई देंगी। अभिनेत्री ने एक बायोपिक का भी जिक्र किया, जिसका नाम ‘इकोज ऑफ वैलोर’ (Echoes of Valour) है। यह फिल्म शहीद कैप्टन अनिर्बान बंदोपाध्याय की मां शुक्ला बंदोपाध्याय के जीवन पर आधारित है।इसके साथ ही वह मनोज बाजपेयी के साथ ‘गांधी एंड माय मदर’ नाम के एक अन्य प्रोजेक्ट की शूटिंग भी कर रही हैं। इस तरह आने वाले समय में दर्शकों को दिव्या दत्ता कई अलग-अलग भूमिकाओं में देखने को मिलेंगी।

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OTT ने बदली महिलाओं के किरदारों की तस्वीर

दिव्या दत्ता ने हालिया बातचीत में ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव पर भी अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने महिलाओं के लिए अलग-अलग उम्र में मजबूत और महत्वपूर्ण किरदार निभाने के अवसर बढ़ाए हैं।उनके अनुसार, अब कहानियों में महिलाओं के किरदारों को अधिक वास्तविक और कई परतों वाला दिखाया जा रहा है। खासतौर पर 40 साल से अधिक उम्र की अभिनेत्रियों के लिए भी ऐसे किरदार लिखे जा रहे हैं, जिन्हें पहले कम देखने को मिलता था।दिव्या का कहना है कि ओटीटी ने कहानी कहने के तरीके में बदलाव किया है और दर्शकों ने भी इस बदलाव को स्वीकार किया है। अब लोग ऐसे किरदार देखना चाहते हैं, जिनमें वास्तविक जिंदगी की भावनाएं, गलतियां और परिस्थितियां दिखाई दें।कुल मिलाकर, JFF 2026 में दिव्या दत्ता की बातचीत ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि फिल्मों में किसी एक दृश्य से ज्यादा पूरी कहानी को महत्व क्यों दिया जाना चाहिए। अभिनेत्री के मुताबिक, सोशल मीडिया पर इंटीमेट सीन्स कुछ समय के लिए वायरल हो सकते हैं, लेकिन दर्शकों के बीच वही फिल्म टिकती है जिसकी कहानी मजबूत और प्रभावशाली होती है।

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