Resume, C.V और Bio- Data में अंतर क्या है ?

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आप अपने  सी. वी को कैसे स्ट्रांग बना सकते है ? 


आपको शायद  पता ही होगा की  आपकी लाइफ में सीवी,बायोडाटा और रिज्यूमे  का बहुत बड़ा रोल  होता है वो इसलिए क्यूंकि आप  इसमें पर्सनल डिटेल्स अपने स्किल्स, अपने लाइफ एक्सपीरियंस शेयर करते है ऐसे में इसका रोल बहुत इम्पोर्टेन्ट होता है. आप कही पहली बार इंटरव्यू के लिए जाते है सबसे पहले अपना रिज्यूमे  दिखाते  है और अगर आपने बहुत जगह पर काम किया है तो आप आपने सीवी  लेकर जाते है. लेकिन कुछ कैंडिडेट्स ऐसे भी होते है जिन्हे रिज्यूमे और सीवी  में अन्तर ही नहीं पता होता है ऐसे में यह जरुरी है की आप जान ले की रिज्यूमे , सीवी और बायोडाटा में क्या अन्तर है ?

difference between Resume , cv and bio data

यहाँ जाने रिज्यूमे , सीवी और बायोडाटा  में क्या अंतर है ?

रिज्यूमे क्या है ?

एक अच्छा रिज्यूमे कैंडीडेट की ब्रीफ प्रोफाइल के साथ शुरू होता है. यह तब दिखाया जाता है जब  आप उस फील्ड में फ्रेशर होते है साथ ही रिज्यूमे एक फ्रेंच वर्ड है, इसका मतलब होता है समरी.इसमें कैंडिडेट अपनी एजुकेशन , स्किल्स , एडिशनल कोर्सस और आपकी सिर्फ पर्सनल डिटेल्स शेयर होती है. रिज्यूमे सिर्फ एक या दो पेज का होता है.

1. साथ ही जब आप रिज्यूमे अपना तैयार करते है यानी की बनाते है तब इन बातो का ख़ास ध्यान दे की उसमे  ग्रामर गलत न हो और स्पेल्लिंग्स जरुर चेक करे

2. उसमे फालतू की चीज ऐड न करे .

3. इसके अलावा आप जिस प्रोफाइल के लिए रिज्यूमे भेज रहे है.आपके रिज्यूमे में उसी से सम्बंधित योग्यताएँ  होनी चाहिए

तो इस तरीके से आप आपने रिज्यूमे को तैयार कर  सकते है

अब जानते है की आप सीवी क्या है आप इसे कैसे स्ट्रांग बना  सकते है.

सीवी यानी की करिकुलम विटे जो की एक लैटिन  शब्द  है.  इसका मतलब होता है “कोर्स ऑफ़  लाइफ ”. इसमें रिज्यूमे से ज्यादा डिटेल्स होती है और यह सिर्फ  2 से 3 पेज का होता है. और रिक्वायरमेंट के हिसाब से इससे भी लॉन्ग हो सकता है.  इसमें आपको आपने स्किल्स, प्रीवियस जॉब्स, डिग्री, प्रोफेशनल एफिलिएशन के बारे में बताना होता है.

अब जानते है की आप आपने करिकुलम विटे को स्ट्रांग कैसे बना सकते है ?

1. जब आप अपना करिकुलम विटे बनाएँगे अबसे पहले उसमे अपनी पर्सनल डिटेल्स  दे जिसमे आपका नाम , एड्रेस , फ़ोन नंबर , ईमेल  – एड्रेस , नॅशनलिटी और जेंडर  बताएँगे .

2. इसके बाद अपना पर्सनल प्रोफाइल के बारे में बताये यानी की आप में क्या क्वालिटीज़ है आप कैसे उस पोसियतों के लिए परफेक्ट है? अपने स्किल्स को अच्छे से डिफाइन  करे. फिर एजुकेशन के बारे में लिखे  की आपने  कहाँ से  पढ़ाई  की है और कितना स्कोर किया.

3.  पर्सनल प्रोफाइल के बाद  आता  है की आप अपने वर्क एक्सपीरियंस  के बारे में लखे की अपना कहाँ काम किया , किस पद पर थे आप , अपने वहां क्या काम किया और अचीवमेंट्स  के बारे में लिखे .

4. इसके बाद आप  रेफरन्स  भी लिखे  अगर आप वह किसी  के जरिये गए  है.

इससे आपका सीवी अच्छा  और स्ट्रांग बनेगा.

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अब जानते है की बायो- डाटा क्या है ?

बायो डाटा का मतलब है की बायोग्राफी डाटा जिसमें सिर्फ आपकी पसर्नल इंफॉर्मेशन जैसे डेट ऑफ बर्थ, जेंडर, रिलिजियन, नेशनलिटी, रेसीडेंस, मैरिटल स्टेट्स के बारे में लिखा होता है.  एक चीज है जिस पर आपको गौर करनी होगी बायो डाटा शादी के लिए भेजा जाता है  जिस विवरण को भेजते है इसलिए कभी गलती से भी नौकरी के लिए न भेजे और न लिखे क्योकि नौकरी स्किल से मिलती है  .

इसमें पसर्नल इंफॉर्मेशन जैसे डेट ऑफ बर्थ, जेंडर, रिलिजियन, नेशनलिटी, रेसीडेंस, मैरिटल स्टेट्स आदि के बारे में बताया जाता है। काल क्रम के हिसाब से एजुकेशन और एक्सपीरियंस की लिस्टिंग की जाती है।

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