Dehydration during pregnancy: प्रेग्नेंसी में पानी की कमी से बच्चे को हो सकता है खतरा? जानें कैसे बढ़ाएं एमनियोटिक फ्लूइड
Dehydration during pregnancy, प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। इस दौरान मां के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनका असर बच्चे के विकास पर भी पड़ता है।
Dehydration during pregnancy : प्रेग्नेंसी में गर्भ का पानी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये तरीके, मां और बच्चे की सेहत का रखें ध्यान
Dehydration during pregnancy, प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। इस दौरान मां के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनका असर बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड के दौरान कई बार डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे के आसपास पानी यानी एमनियोटिक फ्लूइड (Amniotic Fluid) कम हो गया है। यह सुनकर गर्भवती महिला और उसके परिवार की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। दरअसल, एमनियोटिक फ्लूइड गर्भ में बच्चे की सुरक्षा और विकास के लिए बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी को मेडिकल भाषा में ओलिगोहाइड्राम्नियोस (Oligohydramnios) कहा जाता है। हालांकि, हर मामले में इसका खतरा एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भावस्था का कौन-सा महीना चल रहा है और पानी की कमी कितनी है।

क्या होता है एमनियोटिक फ्लूइड और क्यों है जरूरी?
एमनियोटिक फ्लूइड एक विशेष तरल पदार्थ है, जो गर्भाशय में बच्चे को चारों ओर से घेरकर रखता है। यह बच्चे को बाहरी झटकों से बचाने के साथ उसके सामान्य विकास में भी मदद करता है। गर्भ में बच्चा इसी तरल पदार्थ के बीच रहता है और इसे निगलने के साथ अपने फेफड़ों के विकास की प्रक्रिया में भी इसका इस्तेमाल करता है।यह तरल पदार्थ बच्चे के शरीर का तापमान संतुलित रखने, हाथ-पैरों की गतिविधियों के लिए जगह देने और गर्भनाल को दबाव से बचाने में मदद करता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान एमनियोटिक फ्लूइड का सामान्य स्तर बना रहना जरूरी है।
प्रेग्नेंसी में एमनियोटिक फ्लूइड कम होने के क्या कारण हैं?
गर्भावस्था में एमनियोटिक फ्लूइड कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई बार मां के शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन इसकी एक वजह होती है। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं।
पानी की थैली से रिसाव: अगर एमनियोटिक सैक में छोटा-सा छेद हो जाए, तो उसमें मौजूद पानी धीरे-धीरे बाहर निकल सकता है।
प्लेसेंटा में परेशानी: प्लेसेंटा ठीक से काम नहीं करता, तो बच्चे तक पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिसका असर एमनियोटिक फ्लूइड पर पड़ सकता है।
बच्चे की किडनी से जुड़ी समस्या: गर्भ में बच्चे की किडनी या यूरिनरी सिस्टम में परेशानी होने पर पेशाब बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर: गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी और प्री-एक्लेम्पसिया जैसी समस्याएं भी पानी की कमी का कारण बन सकती हैं।
प्रेग्नेंसी का समय पूरा होना: डिलीवरी की तय तारीख निकलने के बाद भी गर्भावस्था जारी रहने पर एमनियोटिक फ्लूइड का स्तर कम हो सकता है।
एमनियोटिक फ्लूइड बढ़ाने के लिए क्या करें?
अगर अल्ट्रासाउंड में गर्भ का पानी कम बताया गया है, तो सबसे पहले अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें। पानी बढ़ाने के लिए कुछ उपाय मददगार हो सकते हैं, लेकिन इनका असर हर महिला में अलग-अलग होता है।

1. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। आमतौर पर गर्भावस्था में रोजाना करीब 8-12 कप पानी पीने की सलाह दी जाती है। गर्म मौसम, ज्यादा पसीना आने या शारीरिक गतिविधि के दौरान जरूरत बढ़ सकती है। पर्याप्त पानी पीने से डिहाइड्रेशन के कारण एमनियोटिक फ्लूइड कम होने की स्थिति में सुधार हो सकता है।
2. पानी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं
अपनी डाइट में तरबूज, खरबूजा, संतरा, खीरा और लौकी जैसी पानी से भरपूर चीजें शामिल कर सकती हैं। इनसे शरीर को पानी के साथ जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। हालांकि, केवल इन चीजों को खाने से गर्भ में पानी बढ़ने की गारंटी नहीं होती।
3. संतुलित डाइट लें
गर्भावस्था में शरीर को प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इसके लिए दाल, दूध, दही, हरी सब्जियां, फल और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं। संतुलित भोजन मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए जरूरी है।
4. नियमित जांच करवाएं
एमनियोटिक फ्लूइड की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं। इसमें AFI (Amniotic Fluid Index) या DVP (Deepest Vertical Pocket) के जरिए पानी की मात्रा मापी जाती है। जरूरत पड़ने पर बच्चे की ग्रोथ और ब्लड फ्लो की जांच के लिए डॉप्लर टेस्ट भी किया जा सकता है।
5. डॉक्टर की सलाह से आराम करें
अगर डॉक्टर आपको आराम करने की सलाह देते हैं, तो उसका पालन करें। शरीर को पर्याप्त आराम देना जरूरी है। हालांकि, हर गर्भवती महिला के लिए बेड रेस्ट जरूरी नहीं होता। अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर से शारीरिक गतिविधियों के बारे में पूछें।
प्रेग्नेंसी में पानी कम हो तो क्या नहीं करना चाहिए?
एमनियोटिक फ्लूइड कम होने पर कुछ गलतियों से बचना भी जरूरी है। सबसे पहले बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा, सप्लीमेंट या घरेलू नुस्खा न अपनाएं। इंटरनेट पर बताए गए उपायों को आजमाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।इसके अलावा, पानी बढ़ाने के लिए जरूरत से ज्यादा पानी जबरदस्ती न पिएं। शरीर की जरूरत और आपकी मेडिकल स्थिति के अनुसार ही तरल पदार्थ लें। अगर आपको हाई बीपी, किडनी या दिल से जुड़ी कोई समस्या है, तो पानी की मात्रा डॉक्टर से पूछकर तय करें।धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूर रहें। बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाएं या अन्य मेडिसिन लेने से बचें, क्योंकि कुछ दवाएं एमनियोटिक फ्लूइड के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि अल्ट्रासाउंड में पानी कम आने पर अगली जांच को नजरअंदाज न करें।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
एमनियोटिक फ्लूइड कम होने की स्थिति में हर बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता। कई बार इसका पता केवल अल्ट्रासाउंड से चलता है। फिर भी कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
योनि से लगातार पानी जैसा तरल निकलना या अचानक पानी बहना।
बच्चे की हलचल सामान्य से कम महसूस होना।
पेट में लगातार दर्द या ऐंठन होना।
योनि से खून आना।
बुखार या असामान्य बदबूदार डिस्चार्ज होना।
अगर पानी जैसा तरल निकल रहा है या बच्चे की हलचल कम महसूस हो रही है, तो तुरंत अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें। अगली नियमित अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें।
क्या एमनियोटिक फ्लूइड बहुत कम होने पर डिलीवरी करनी पड़ सकती है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भावस्था का कौन-सा सप्ताह चल रहा है, पानी कितना कम है और बच्चे की सेहत कैसी है। अगर गर्भ में पानी बहुत कम है या बच्चे की सेहत पर इसका असर पड़ रहा है, तो डॉक्टर ज्यादा निगरानी की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में समय से पहले डिलीवरी कराने का फैसला भी लिया जा सकता है।अंतरराष्ट्रीय सोसायटी ऑफ अल्ट्रासाउंड इन ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (ISUOG) के अनुसार, एमनियोटिक फ्लूइड कम होने पर बच्चे की ग्रोथ, किडनी और ब्लैडर के साथ ब्लड फ्लो की जांच भी जरूरी हो सकती है। हल्की कमी अगर गर्भावस्था के आखिरी समय में सामने आती है, तो कई मामलों में स्थिति सामान्य रहती है।
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