Menopause: मेनोपॉज के बाद पेशाब में जलन और बार-बार यूरिन आने की समस्या को न करें नजरअंदाज
Menopause, मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर केवल पीरियड्स बंद होने या हॉट फ्लैशेज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यूरिनरी हेल्थ यानी पेशाब से जुड़ी सेहत पर भी पड़ सकता है।
Menopause के बाद UTI से कैसे बचें? बार-बार होने वाले इंफेक्शन की वजह जानें
Menopause, मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर केवल पीरियड्स बंद होने या हॉट फ्लैशेज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यूरिनरी हेल्थ यानी पेशाब से जुड़ी सेहत पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि कुछ महिलाओं को मेनोपॉज के बाद बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) की समस्या होने लगती है। पेशाब करते समय जलन, बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। हाल ही में मेनोपॉज के बाद होने वाले UTI और इसके बचाव में वैजाइनल एस्ट्रोजन की भूमिका पर भी चर्चा बढ़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से योनि और यूरिनरी ट्रैक्ट के ऊतकों में बदलाव आते हैं। इससे कुछ महिलाओं में बार-बार संक्रमण होने का जोखिम बढ़ सकता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार, इस समस्या के लिए प्रभावी उपचार और बचाव के विकल्प मौजूद हैं।
मेनोपॉज के बाद UTI होने की मुख्य वजह क्या है?
मेनोपॉज के बाद बार-बार UTI होने की एक प्रमुख वजह एस्ट्रोजन हार्मोन का कम होना है। यह हार्मोन योनि और पेशाब की नली के आसपास के ऊतकों को स्वस्थ, नम और लचीला बनाए रखने में मदद करता है। जब इसका स्तर घटता है, तो ये ऊतक पतले और अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इससे सूखापन, जलन और पेशाब से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।इसके अलावा, एस्ट्रोजन योनि में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में भी भूमिका निभाता है। ये बैक्टीरिया संक्रमण पैदा करने वाले हानिकारक बैक्टीरिया के बढ़ने से बचाव में मदद करते हैं। मेनोपॉज के बाद इस संतुलन में बदलाव आने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, हर महिला को मेनोपॉज के बाद UTI हो, यह जरूरी नहीं है।
UTI के कौन-से लक्षण नजर आते हैं?
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन मूत्र प्रणाली के किसी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। ज्यादातर सामान्य UTI में ब्लैडर यानी मूत्राशय प्रभावित होता है। इसके कुछ प्रमुख लक्षण हैं:पेशाब करते समय जलन या दर्द होना, सामान्य से ज्यादा बार पेशाब आना, अचानक तेज पेशाब लगना, रात में बार-बार टॉयलेट जाना और पेट के निचले हिस्से में असहजता महसूस होना। कुछ मामलों में पेशाब में खून भी दिखाई दे सकता है।मेनोपॉज के बाद योनि में सूखापन, खुजली, जलन और पेशाब के दौरान असहजता भी हो सकती है। जरूरी नहीं कि ये सभी लक्षण UTI के कारण ही हों। हार्मोन की कमी से होने वाली जेनिटोयूरिनरी सिंड्रोम ऑफ मेनोपॉज (GSM) में भी इस तरह की परेशानी हो सकती है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से दवा लेना सही नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच करके सही कारण का पता लगा सकते हैं।

बार-बार UTI होने पर क्या करना चाहिए?
अगर छह महीने में दो या एक साल में तीन या उससे अधिक बार UTI होता है, तो इसे आमतौर पर बार-बार होने वाला या रिकरेंट UTI कहा जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत के अनुसार यूरिन टेस्ट या यूरिन कल्चर कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे संक्रमण की पुष्टि करने और उसके लिए सही एंटीबायोटिक चुनने में मदद मिलती है। UTI की पुष्टि होने पर डॉक्टर जरूरत के मुताबिक एंटीबायोटिक देते हैं। दवा का चुनाव संक्रमण, मरीज की स्थिति और जांच के नतीजों पर निर्भर करता है। लक्षण ठीक होने पर भी डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बीच में बंद नहीं करनी चाहिए। बार-बार एंटीबायोटिक लेना या खुद से दवा शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ने का जोखिम रहता है।
क्या वैजाइनल एस्ट्रोजन से UTI का खतरा कम हो सकता है?
मेनोपॉज के बाद बार-बार UTI होने वाली कुछ महिलाओं के लिए डॉक्टर लो-डोज वैजाइनल एस्ट्रोजन की सलाह दे सकते हैं। यह क्रीम, टैबलेट या रिंग जैसे रूपों में उपलब्ध हो सकता है। इसे योनि में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आसपास के ऊतकों में एस्ट्रोजन की कमी से जुड़े बदलावों को कम करने में मदद मिल सकती है। अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन की 2025 में संशोधित गाइडलाइन के अनुसार, मेनोपॉज से गुजर रही या मेनोपॉज के बाद की उन महिलाओं में, जिन्हें बार-बार UTI होता है, और जिनके लिए यह उपचार उपयुक्त है, वैजाइनल एस्ट्रोजन पर विचार किया जाना चाहिए। यह हर महिला के लिए जरूरी नहीं है। जिन महिलाओं को स्तन कैंसर का इतिहास रहा है या हार्मोन से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम और फायदे पर चर्चा करनी चाहिए। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पूरे शरीर में असर करने वाली हार्मोन थेरेपी और कम मात्रा में इस्तेमाल होने वाला वैजाइनल एस्ट्रोजन एक जैसे नहीं हैं। बार-बार UTI रोकने के लिए खुद से कोई हार्मोनल दवा शुरू न करें।
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UTI से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, पेशाब को लंबे समय तक रोककर न रखना और निजी अंगों की सफाई का ध्यान रखना उपयोगी आदतें हैं। हालांकि, ये उपाय संक्रमण से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं देते। योनि के अंदर साबुन, सुगंधित उत्पाद या तेज केमिकल वाले क्लीनर इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इनसे जलन बढ़ सकती है। अगर योनि में सूखापन या जलन रहती है, तो डॉक्टर से उपयुक्त मॉइस्चराइजर या लुब्रिकेंट के बारे में सलाह लें। बार-बार संक्रमण होने पर डॉक्टर कुछ महिलाओं के लिए वैजाइनल एस्ट्रोजन या अन्य निवारक उपचार सुझा सकते हैं। क्रैनबेरी उत्पादों को लेकर भी कुछ शोध हुए हैं, लेकिन उनका लाभ हर व्यक्ति में समान नहीं होता और वे संक्रमण के इलाज का विकल्प नहीं हैं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर पेशाब में जलन के साथ बुखार, ठंड लगना, पीठ या कमर के एक तरफ दर्द, उल्टी या बहुत ज्यादा कमजोरी हो, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें। ये लक्षण किडनी तक संक्रमण पहुंचने का संकेत हो सकते हैं। पेशाब में खून आने या बार-बार संक्रमण लौटने पर भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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