Annapurna Temple Varanasi: सोने के सिंहासन पर विराजीं मां अन्नपूर्णा, धनतेरस पर खुले स्वर्णमयी मंदिर के द्वार
Annapurna Temple Varanasi, धनतेरस के पावन अवसर पर धर्मनगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के भक्तों का इंतजार खत्म हो गया है।
Annapurna Temple Varanasi : काशी में धनतेरस का खास उत्सव, मां अन्नपूर्णा के दरबार में सोने-चांदी के खजाने की झलक
Annapurna Temple Varanasi, धनतेरस के पावन अवसर पर धर्मनगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के भक्तों का इंतजार खत्म हो गया है। वाराणसी स्थित प्राचीन मां अन्नपूर्णा मंदिर में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को माता के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए गए। साल में केवल पांच दिनों के लिए खुलने वाले इस विशेष दरबार में दर्शन करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस दौरान भक्तों को मां के दर्शन के साथ खजाना प्रसाद भी वितरित किया जा रहा है। इस प्रसाद में सिक्के और धान का लावा शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां का यह खजाना घर में रखने से सुख-समृद्धि और अन्न-धन की बरकत बनी रहती है। धनतेरस से शुरू हुआ यह विशेष आयोजन 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव के साथ संपन्न होगा।

धनतेरस पर सुबह 5 बजे खुले स्वर्णमयी दरबार के कपाट
वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस के दिन विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के प्रथम तल पर विराजमान मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के लिए सबसे पहले विधि-विधान से पूजन और महाआरती की गई। मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज की देखरेख में सुबह करीब 4 बजे पूजा शुरू हुई। इसके बाद सुबह 5 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए।मां अन्नपूर्णा के इस स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन साल में केवल धनतेरस से अन्नकूट तक पांच दिनों के लिए होते हैं। यही वजह है कि इस विशेष अवसर पर काशी के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर प्रशासन को इस बार पांच दिवसीय आयोजन के दौरान करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
भक्तों को मिलेगा सिक्कों और लावा का खजाना
मां अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस के अवसर पर खजाना प्रसाद वितरण की विशेष परंपरा है। इस साल भी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में धान का लावा और सिक्के दिए जा रहे हैं। मंदिर से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इस बार करीब पांच क्विंटल लावा और 10 लाख सिक्कों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 21 किलो के रजत खजाने का भी विधि-विधान से पूजन किया गया है।मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा के दरबार से मिलने वाले सिक्कों और लावा को घर की तिजोरी या अनाज रखने वाले स्थान पर रखने से परिवार में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती। श्रद्धालु इस प्रसाद को माता के आशीर्वाद और समृद्धि के प्रतीक के रूप में अपने घर लेकर जाते हैं। यही वजह है कि धनतेरस पर मंदिर में दर्शन के साथ खजाना प्रसाद प्राप्त करने के लिए भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
क्यों खास हैं मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी दर्शन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा को अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। पौराणिक कथा के मुताबिक, जब संसार में अन्न का संकट उत्पन्न हुआ था, तब माता अन्नपूर्णा ने काशी में प्रकट होकर लोगों को भोजन उपलब्ध कराया था। भगवान शिव ने भी माता से भिक्षा मांगकर संसार को अन्न के महत्व का संदेश दिया था।इसी मान्यता के कारण काशी में मां अन्नपूर्णा की विशेष पूजा की जाती है। मंदिर में मां का स्वर्णमयी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। माता के साथ भूमि देवी, मां लक्ष्मी और भिक्षा मांगते हुए बाबा विश्वनाथ के स्वरूप के भी दर्शन किए जा सकते हैं। भक्तों के लिए यह पांच दिवसीय आयोजन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पांच दिनों तक होंगे विशेष दर्शन, जानें पूरा शेड्यूल
मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए पांच दिनों तक विशेष दर्शन की व्यवस्था की गई है। 6 नवंबर को धनतेरस के दिन सुबह 5 बजे से रात 11:30 बजे तक माता के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन और खजाना प्रसाद वितरण किया जा रहा है। इसके बाद 7 से 10 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 4 बजे से रात 11:15 बजे तक दर्शन की व्यवस्था रहेगी।10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर माता का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इस दिन मंदिर में भव्य भोग और प्रसाद की व्यवस्था भी होगी। रात करीब 11:30 बजे महाआरती के बाद मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के कपाट अगले एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

अन्नकूट पर लगेगा विशेष भोग
धनतेरस से शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन का समापन अन्नकूट महोत्सव के साथ होगा। इस अवसर पर मां अन्नपूर्णा को तरह-तरह के पकवान, मिठाइयां और पारंपरिक व्यंजन अर्पित किए जाएंगे। मंदिर में लड्डुओं और विभिन्न पकवानों की भव्य झांकी सजाई जाएगी। इसके साथ ही बाबा विश्वनाथ को भी छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा निभाई जाएगी।इस आयोजन की तैयारियों के लिए मंदिर की रसोई में बड़ी संख्या में कारीगर जुटे हैं। प्रसाद और भोग तैयार करने के लिए मिष्ठान, नमकीन और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई है। अन्नकूट के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा और आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए गए खास इंतजाम
पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है। श्रद्धालुओं को निर्धारित प्रवेश और निकास मार्ग से आने-जाने की व्यवस्था दी गई है, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को बांसफाटक की ओर से गेट नंबर एक और ढुंढिराज मार्ग से प्रवेश कराया जा रहा है। दर्शन और प्रसाद प्राप्त करने के बाद श्रद्धालुओं को कालिका गली की ओर से बाहर निकलने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों और पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है।
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