Indian-American: Piya Dandia ने बढ़ाया भारत का गौरव, फ्लोरिडा से संसद पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनीं
Indian-American, अमेरिका में हुए 2026 के मिडटर्म चुनावों में भारतीय मूल की पिया डांडिया ने इतिहास रच दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी जगह बनाई है।
Indian-American : फ्लोरिडा की संसद में पहली बार पहुंचीं भारतीय-अमेरिकी पिया डांडिया, रचा नया इतिहास
Indian-American, अमेरिका में हुए 2026 के मिडटर्म चुनावों में भारतीय मूल की पिया डांडिया ने इतिहास रच दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी जगह बनाई है। इस जीत के साथ वह फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं। उनकी यह सफलता भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। खास बात यह है कि पिया का परिवार भारत से अमेरिका गया था और अब उनकी बेटी ने अमेरिकी राजनीति में अपनी पहचान बनाई है।

फ्लोरिडा की 22वीं सीट से दर्ज की जीत
पिया डांडिया ने 3 नवंबर 2026 को हुए अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा था। इस मुकाबले में उनका सामना रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर से था। चुनाव परिणामों के मुताबिक, पिया को करीब 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को लगभग 49.1 प्रतिशत वोट मिलने की जानकारी सामने आई। इस जीत के साथ पिया ने फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी होने का रिकॉर्ड बनाया है।यह सीट चुनाव से पहले नए सिरे से निर्धारित किए गए निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा थी। फ्लोरिडा में हुए परिसीमन के बाद 22वें डिस्ट्रिक्ट की सीमाओं में बदलाव किया गया था। पहले इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली डेमोक्रेटिक सांसद लोइस फ्रेंकल ने नए निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला किया, जिसके बाद यह सीट खुली रह गई। पिया ने इस मौके का फायदा उठाया और चुनाव में जीत हासिल की।
कौन हैं पिया डांडिया?
पिया डांडिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनके पिता राजस्थान से संबंध रखने वाले एक प्रवासी भारतीय डॉक्टर हैं। पिया ने अपनी पढ़ाई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी हिस्सा लिया। गर्मियों की छुट्टियों में वह भारत आती थीं और दिल्ली में जरूरतमंद बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए स्वयंसेवक के तौर पर काम करती थीं।पिया का शुरुआती करियर शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उन्होंने Teach For America नाम के कार्यक्रम के तहत शिक्षक के रूप में काम शुरू किया। यह कार्यक्रम उन इलाकों के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर काम करता है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम इलाके में एक हाई स्कूल की स्थापना की और उसकी प्रिंसिपल बनीं। बताया जाता है कि महज 28 साल की उम्र में वह स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनी थीं।उनके स्कूल में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पढ़ते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल के करीब 86 प्रतिशत छात्र आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों से थे और स्कूल पूरा करने वाले सभी छात्रों को कॉलेज में दाखिला मिला। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इस अनुभव ने आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन और नीतिगत काम को दिशा दी।
व्हाइट हाउस फेलो से लेकर Apple तक का सफर
शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के बाद पिया डांडिया को प्रतिष्ठित व्हाइट हाउस फेलोशिप भी मिली। इस कार्यक्रम के तहत प्रतिभाशाली पेशेवरों को अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ काम करने और नीतिगत मामलों का अनुभव हासिल करने का अवसर मिलता है।इसके बाद उन्होंने टेक्नोलॉजी कंपनी Apple में भी काम किया। यहां उनका काम राज्य सरकारों के साथ मिलकर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने से जुड़ा था। इस तरह पिया ने शिक्षा, प्रशासन और तकनीक जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव हासिल किया।उनकी राजनीतिक यात्रा में इन अनुभवों की अहम भूमिका रही। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, आम परिवारों के लिए जीवनयापन की लागत कम करने और आर्थिक अवसर बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।
चुनाव प्रचार में किन मुद्दों पर रहा जोर?
पिया डांडिया ने अपने चुनाव प्रचार में आम परिवारों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम करना, सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी योजनाओं की सुरक्षा, मध्यम वर्ग पर टैक्स का बोझ घटाना और शिक्षा के अवसर बढ़ाना शामिल था।उन्होंने अमेरिकी संसद में सांसदों के शेयर कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल की थी। उनका कहना था कि सरकार और संसद में काम करने वाले प्रतिनिधियों को आम लोगों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।पिया ने अपने प्रचार में अपने माता-पिता के संघर्ष और उनके दिए संस्कारों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, माता-पिता ने उन्हें यह सीख दी कि दुनिया को पहले से बेहतर बनाकर जाना चाहिए। उन्होंने इसी सोच को अपने शिक्षक और प्रिंसिपल के रूप में किए गए काम से जोड़ा।
जनवरी 2027 से संभालेंगी जिम्मेदारी
पिया डांडिया की जीत के बाद अब वह जनवरी 2027 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की नई कांग्रेस के साथ अपना कार्यकाल शुरू करेंगी। वह फ्लोरिडा के नए निर्धारित 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह कार्यकाल दो साल का होगा।उनकी जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की भागीदारी को नई पहचान मिली है। इससे पहले भी कई भारतीय-अमेरिकी नेता अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों तक पहुंचे हैं। पिया की उपलब्धि इस सूची में एक नया नाम जोड़ती है।हालांकि, चुनाव जीतना उनकी राजनीतिक जिम्मेदारी की शुरुआत है। अब उनके सामने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों पर काम करने की चुनौती होगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक अवसरों जैसे मुद्दों पर वह अमेरिकी संसद में किस तरह अपनी भूमिका निभाती हैं।
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