Main Hoon Apni Dhanlaxmi: टैक्स प्लानिंग से बढ़ाएं बचत, जानिए किन तरीकों से मिल सकती है छूट
Main Hoon Apni Dhanlaxmi, हर नौकरीपेशा व्यक्ति और कमाई करने वाले नागरिक की इच्छा होती है कि उसकी मेहनत की कमाई का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा उसके पास रहे। लेकिन जब इनकम टैक्स भरने की बात आती है, तो कई लोगों को समझ नहीं आता कि टैक्स की रकम कैसे कम की जाए।
Main Hoon Apni Dhanlaxmi : टैक्स बचाने के लिए कहां करें निवेश? जानें जरूरी विकल्प
Main Hoon Apni Dhanlaxmi, हर नौकरीपेशा व्यक्ति और कमाई करने वाले नागरिक की इच्छा होती है कि उसकी मेहनत की कमाई का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा उसके पास रहे। लेकिन जब इनकम टैक्स भरने की बात आती है, तो कई लोगों को समझ नहीं आता कि टैक्स की रकम कैसे कम की जाए। कुछ लोग आखिरी समय में निवेश करते हैं, तो कुछ बिना पूरी जानकारी के ऐसे विकल्प चुन लेते हैं जिनकी उन्हें वास्तव में जरूरत नहीं होती। जबकि सही टैक्स प्लानिंग से कानूनी तरीके से टैक्स का बोझ कम किया जा सकता है और साथ ही भविष्य के लिए बचत भी की जा सकती है।वित्त वर्ष 2026-27 में टैक्स बचाने की योजना बनाते समय सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत में नई और पुरानी, दोनों टैक्स व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट विकल्प है, लेकिन पात्र करदाता पुरानी व्यवस्था चुन सकते हैं। दोनों में टैक्स की गणना और मिलने वाली छूट अलग-अलग होती है। इसलिए किसी भी निवेश या छूट का फायदा लेने से पहले दोनों व्यवस्थाओं में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करना जरूरी है।
नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में क्या है अंतर?
नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स की दरें अपेक्षाकृत कम रखी गई हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर पारंपरिक छूट और कटौतियों का लाभ नहीं मिलता। वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में HRA, कुछ निवेशों, स्वास्थ्य बीमा और होम लोन के ब्याज जैसी कई कटौतियों का फायदा लिया जा सकता है। हालांकि इसमें टैक्स स्लैब अलग हैं।नई व्यवस्था में वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशन पाने वाले लोगों को 75,000 रुपये तक की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलती है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब और 12 लाख रुपये तक की सामान्य आय पर उपलब्ध रिबेट की व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया है। पात्र वेतनभोगी व्यक्ति को स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद 12.75 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है। यह लाभ नियमों और पात्रता की शर्तों के अधीन है।
80C के जरिए बचा सकते हैं टैक्स
पुरानी टैक्स व्यवस्था में सेक्शन 80C के तहत कई तरह के निवेश और भुगतान पर टैक्स कटौती का लाभ मिलता है। इसके लिए पात्र विकल्पों में कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF, पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF, ELSS म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा प्रीमियम और बच्चों की ट्यूशन फीस जैसे विकल्प शामिल हैं। इन माध्यमों से कुल मिलाकर एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ लिया जा सकता है।हालांकि, निवेश करने से पहले उसकी अवधि, जोखिम और जरूरत को समझना जरूरी है। उदाहरण के लिए, ELSS में बाजार से जुड़ा जोखिम होता है, जबकि PPF लंबी अवधि की बचत का विकल्प है। सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ऐसा निवेश न करें जिसे आप लंबे समय तक जारी नहीं रख सकते।

स्वास्थ्य बीमा से भी मिल सकता है टैक्स लाभ
स्वास्थ्य बीमा केवल मेडिकल खर्चों से सुरक्षा देने का माध्यम नहीं है, बल्कि पुरानी टैक्स व्यवस्था में इसके प्रीमियम पर भी कटौती का लाभ मिल सकता है। सेक्शन 80D के तहत अपने, जीवनसाथी और बच्चों के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर निर्धारित सीमा तक टैक्स कटौती ली जा सकती है। माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर भी अलग से लाभ उपलब्ध है। वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के मामले में कटौती की सीमा अधिक हो सकती है।इसका फायदा लेने के लिए जरूरी है कि बीमा पॉलिसी और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। यह भी ध्यान दें कि नई टैक्स व्यवस्था में सामान्य तौर पर 80D की इस कटौती का लाभ नहीं मिलता।

HRA और होम लोन से जुड़ी छूट
अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और आपकी सैलरी में हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA शामिल है, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार HRA पर छूट मिल सकती है। इसकी गणना आपकी सैलरी, किराए और रहने के शहर के आधार पर होती है। इसके लिए किराए की रसीद और जरूरत पड़ने पर मकान मालिक से जुड़े दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।वहीं, घर खरीदने के लिए लिए गए होम लोन के ब्याज पर भी पुरानी व्यवस्था में कुछ शर्तों के अधीन टैक्स लाभ मिल सकता है। खुद के रहने वाले मकान के लिए ब्याज पर सामान्य तौर पर सालाना 2 लाख रुपये तक की कटौती का प्रावधान है। लेकिन यह लाभ नई टैक्स व्यवस्था में खुद के रहने वाले मकान के लिए उपलब्ध नहीं है। इसलिए होम लोन लेने या टैक्स रिजीम चुनने से पहले पूरी गणना करना जरूरी है।
NPS में निवेश से मिल सकता है अतिरिक्त फायदा
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS रिटायरमेंट के लिए बचत करने का एक विकल्प है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में पात्र व्यक्ति को NPS में अपने योगदान पर निर्धारित सीमा के तहत अतिरिक्त कटौती मिल सकती है। वहीं नई टैक्स व्यवस्था में नियोक्ता की ओर से NPS खाते में किए गए पात्र योगदान पर भी कटौती उपलब्ध है। यह लाभ नियमों और वेतन से जुड़ी निर्धारित सीमाओं के अनुसार मिलता है।NPS में निवेश करते समय यह समझना जरूरी है कि इसमें रिटायरमेंट तक लंबी अवधि के लिए पैसा जमा होता है और निकासी के नियम भी लागू होते हैं। इसलिए इसे सिर्फ टैक्स बचाने के बजाय रिटायरमेंट की योजना के रूप में देखना चाहिए।
टैक्स प्लानिंग में इन गलतियों से बचें
टैक्स बचाने के लिए जल्दबाजी में निवेश करना सही तरीका नहीं है। कई लोग मार्च के आखिरी दिनों में केवल टैक्स छूट पाने के लिए ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं जिनकी जरूरत नहीं होती। कुछ लोग बिना दस्तावेजों के छूट का दावा कर देते हैं, जिससे बाद में परेशानी हो सकती है। निवेश, बीमा प्रीमियम, किराए और होम लोन से जुड़े सभी दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है।सबसे पहले अपनी सालाना आय, संभावित कटौतियों और वित्तीय लक्ष्यों का हिसाब लगाएं। इसके बाद नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्स की गणना करें। इनकम टैक्स विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कैलकुलेटर से भी दोनों विकल्पों की तुलना की जा सकती है।
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सही प्लानिंग से बढ़ सकती है आपकी बचत
इनकम टैक्स बचाने का मतलब केवल कम टैक्स भरना नहीं, बल्कि अपनी कमाई को सही तरीके से इस्तेमाल करना भी है। सही टैक्स व्यवस्था चुनने, जरूरत के अनुसार निवेश करने और उपलब्ध छूटों की जानकारी रखने से आप अपनी वित्तीय योजना को बेहतर बना सकते हैं। याद रखें, हर व्यक्ति के लिए एक ही टैक्स व्यवस्था फायदेमंद नहीं होती। आपकी आय, निवेश, किराया, बीमा और होम लोन की स्थिति के आधार पर ही सही विकल्प तय होगा। इसलिए टैक्स भरने से पहले पूरी जानकारी लें और जरूरत पड़ने पर टैक्स विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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