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Israel election results: नेतन्याहू की सत्ता पर संकट के बादल! इजरायल के राजनीतिक गतिरोध को खत्म कर सकते हैं ये 5 रास्ते

Israel election results, इजरायल की राजनीति में एक बार फिर बहुमत का संकट और राजनीतिक गतिरोध चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सरकार के लिए संसद में पर्याप्त समर्थन बनाए रखने की है।

Israel election results : इजरायल में सत्ता का संकट! क्या इन 5 तरीकों से फिर प्रधानमंत्री बन पाएंगे नेतन्याहू?

Israel election results, इजरायल की राजनीति में एक बार फिर बहुमत का संकट और राजनीतिक गतिरोध चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सरकार के लिए संसद में पर्याप्त समर्थन बनाए रखने की है। इजरायल की संसदीय व्यवस्था में किसी भी सरकार को सत्ता में बने रहने के लिए नेसेट यानी संसद में बहुमत का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में अगर सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल समर्थन वापस लेते हैं या उनके बीच मतभेद बढ़ते हैं, तो सरकार का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।इजरायल की राजनीति में गठबंधन सरकारों का महत्व काफी अधिक है। यहां अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियां चुनाव के बाद मिलकर सरकार बनाती हैं। लेकिन इन दलों की मांगें और राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग होने के कारण सरकार चलाना आसान नहीं होता। नेतन्याहू के सामने भी यही चुनौती है। उन्हें एक तरफ अपने सहयोगी दलों को साथ रखना है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और देश के भीतर उठ रहे राजनीतिक सवालों का सामना भी करना पड़ रहा है।हाल ही में 27 अक्टूबर 2026 को हुए इजरायल के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। 120 सदस्यों वाली नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। लेकिन चुनाव के बाद न तो नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत मिला है और न ही उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को। शुरुआती नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास 48 सीटें हैं। अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं।

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आखिर क्या हैं नेतन्याहू के सामने सरकार बनाने के 5 रास्ते?

नेतन्याहू के सामने पहला विकल्प यह है कि वे विपक्षी दलों के कुछ सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश करें। उनके मौजूदा गठबंधन को बहुमत के लिए आठ और सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगर विपक्षी दलों के कुछ सांसद अपनी पार्टी से अलग होकर नेतन्याहू का समर्थन करते हैं, तो वे दक्षिणपंथी गठबंधन की सरकार बना सकते हैं।नेतन्याहू पहले भी इजरायल की राजनीति में गठबंधन बनाने और राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश करते रहे हैं। हालांकि, इस बार विपक्षी खेमे के प्रमुख नेताओं ने उनके साथ सरकार बनाने से इनकार किया है। ऐसे में आठ सांसदों को अपने पक्ष में करना आसान नहीं होगा।

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राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना

दूसरा विकल्प राष्ट्रीय एकता सरकार का है। इसके तहत नेतन्याहू की लिकुड पार्टी विपक्षी खेमे की कुछ पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना सकती है। इस संभावित गठबंधन में गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट और एविगडोर लिबरमैन जैसे नेताओं की पार्टियां शामिल हो सकती हैं।रिपोर्टों के मुताबिक, इस तरह का गठबंधन 120 सदस्यीय संसद में 66 सीटों का समर्थन हासिल कर सकता है। इससे बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार हो जाएगा। लेकिन इस रास्ते में सबसे बड़ी बाधा राजनीतिक भरोसे की कमी है। आइजेनकोट पहले ही नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने और रोटेशन व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री पद साझा करने से इनकार कर चुके हैं। दूसरी तरफ, नेतन्याहू को अपने दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी सहयोगियों से दूरी बनानी पड़ सकती है।

अरब पार्टियों के समर्थन से विपक्षी सरकार

तीसरा विकल्प विपक्षी खेमे के लिए है। गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन अगर इजरायल की अरब पार्टियों का समर्थन हासिल कर लेता है, तो उसके पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या हो सकती है। विपक्षी गठबंधन की 48 सीटों के साथ अरब पार्टियों की 19 सीटें जोड़ने पर कुल संख्या 67 हो जाती है।इस विकल्प में अरब पार्टियां सरकार में शामिल हुए बिना भी बाहर से समर्थन दे सकती हैं। हालांकि, यह रास्ता भी राजनीतिक रूप से काफी मुश्किल है। विपक्षी खेमे के कुछ नेता अरब पार्टियों के समर्थन पर सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं। 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजरायल की राजनीति में इस मुद्दे पर विरोध और अधिक बढ़ा है। ऐसे में आइजेनकोट के लिए अपने सहयोगियों को इस प्रस्ताव पर सहमत करना बड़ी चुनौती होगी।

कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहना

अगर कोई भी राजनीतिक गठबंधन सरकार बनाने में सफल नहीं होता है, तो नेतन्याहू फिलहाल कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रह सकते हैं। इजरायल की व्यवस्था के अनुसार, नई सरकार बनने तक मौजूदा सरकार कामकाज जारी रखती है।इस दौरान राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वे उस नेता को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना होगी। इस प्रक्रिया में पहले प्रयास के लिए 28 दिन मिलते हैं और जरूरत पड़ने पर 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है। अगर यह प्रयास असफल होता है, तो दूसरे उम्मीदवार को मौका मिल सकता है। इस तरह सरकार गठन की प्रक्रिया कई सप्ताह तक चल सकती है।

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इजरायल में फिर से चुनाव

पांचवां और आखिरी विकल्प नए चुनाव का है। अगर नेतन्याहू और विपक्षी नेता दोनों ही बहुमत जुटाने में नाकाम रहते हैं और गठबंधन को लेकर कोई सहमति नहीं बनती, तो इजरायल को एक बार फिर आम चुनाव का सामना करना पड़ सकता है।राष्ट्रपति की ओर से निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अलग-अलग नेताओं को सरकार बनाने का अवसर दिया जाएगा। अगर कोई भी नेता सफल नहीं होता और संसद में बहुमत का समर्थन हासिल करने वाला कोई वैकल्पिक उम्मीदवार भी सामने नहीं आता, तो नए चुनाव का रास्ता खुल सकता है। राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग पहले ही राजनीतिक दलों से अपील कर चुके हैं कि वे एक और चुनाव की नौबत आने से बचाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं।

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अब नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर सबकी नजर

इजरायल के चुनावी नतीजों ने देश की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां किसी भी दल के लिए अकेले सरकार बनाना संभव नहीं दिख रहा। नेतन्याहू के सामने अपने पुराने सहयोगियों को एकजुट रखने के साथ-साथ नए राजनीतिक साझेदार तलाशने की चुनौती है। वहीं, विपक्षी दल भी उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए संख्या जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।आने वाले दिनों में राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। आधिकारिक चुनाव परिणाम आने के बाद गठबंधन बनाने की बातचीत आगे बढ़ेगी। फिलहाल यह साफ नहीं है कि नेतन्याहू एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने में सफल होंगे या इजरायल को नए चुनाव की ओर बढ़ना पड़ेगा। इतना जरूर है कि बहुमत का यह संकट इजरायल की राजनीति में आने वाले समय के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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