भारत

India’s UNESCO Heritage: एक्टिव ज्वालामुखी और हजारों साल पुराने अवशेष, UNESCO की लिस्ट में शामिल हो सकती हैं भारत की ये 3 जगहें

India's UNESCO Heritage, भारत की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है।

India’s UNESCO Heritage : प्राकृतिक अजूबों से प्राचीन इतिहास तक, UNESCO की संभावित लिस्ट में भारत के ये 3 स्थल

India’s UNESCO Heritage, भारत की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के अनोखे भूवैज्ञानिक स्थलों से लेकर छत्तीसगढ़ के प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक अवशेषों तक, भारत के तीन स्थलों को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है। इन स्थलों में बाराटांग का चूना-पत्थर और मड-वोल्केनो क्षेत्र, अंडमान के ज्वालामुखीय द्वीप और छत्तीसगढ़ का सिरपुर सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक क्षेत्र शामिल हैं। इन तीनों स्थलों को 20 अक्टूबर 2026 को सूची में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें आधिकारिक तौर पर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर दिया गया है। यह संभावित विश्व धरोहर बनने की प्रक्रिया का शुरुआती चरण है।

images?q=tbn:ANd9GcT8RrYHTKSo4UaUchbXI6sqbDCMopPJYQu3 T9n7PGrWtpqLscKDcvSJk&s=10

1. बाराटांग का कार्स्ट-मड-वोल्केनो कॉम्प्लेक्स: चूना-पत्थर की गुफाएं और मिट्टी के ज्वालामुखी

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में स्थित बाराटांग अपनी प्राकृतिक संरचनाओं के लिए जाना जाता है। यहां चूना-पत्थर की गुफाएं और मड वोल्केनो यानी मिट्टी के ज्वालामुखी देखने को मिलते हैं। आम ज्वालामुखियों से निकलने वाले लावे के विपरीत, मड वोल्केनो से मिट्टी, पानी और गैसें धरती की सतह पर बाहर आती हैं। यह प्रक्रिया जमीन के नीचे मौजूद भूवैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ी होती है।बाराटांग की चूना-पत्थर की गुफाएं भी वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। पानी के लंबे समय तक चूना-पत्थर को घोलने से ऐसी गुफाएं और अलग-अलग आकार की प्राकृतिक संरचनाएं बनती हैं। इनका अध्ययन पृथ्वी की सतह में समय के साथ होने वाले बदलावों को समझने में मदद करता है। यहां की कुछ गुफाओं में मौजूद संरचनाओं का इस्तेमाल लंबे समय के पर्यावरणीय बदलावों और मानसून के इतिहास से जुड़े संकेतों का अध्ययन करने के लिए भी किया गया है। इस तरह बाराटांग केवल पर्यटन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि भूविज्ञान और पर्यावरण अनुसंधान के लिए भी अहम है।

2. अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी: भारत का सक्रिय ज्वालामुखी भी शामिल

दूसरा प्रस्तावित स्थल अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी है, जिसमें बैरन आइलैंड और नारकोंडम आइलैंड शामिल हैं। ये दोनों द्वीप ज्वालामुखीय गतिविधियों से बने हैं, लेकिन इनकी प्राकृतिक विशेषताएं अलग-अलग हैं।बैरन आइलैंड भारत का एकमात्र पुष्ट सक्रिय ज्वालामुखी वाला द्वीप है। यहां ज्वालामुखी गतिविधियों का रिकॉर्ड 18वीं शताब्दी से मिलता है। समय-समय पर होने वाले विस्फोटों ने यहां के भू-भाग को आकार दिया है। इस क्षेत्र का अध्ययन वैज्ञानिकों को ज्वालामुखी बनने, उनके सक्रिय होने और समुद्री पर्यावरण पर उनके प्रभावों को समझने में मदद करता है।वहीं, नारकोंडम एक ज्वालामुखीय द्वीप है, जहां वनस्पतियों और वन्यजीवों की अपनी खास दुनिया है। यह नारकोंडम हॉर्नबिल नामक पक्षी के लिए भी जाना जाता है, जो इसी द्वीप पर पाया जाता है। दोनों द्वीपों का महत्व केवल उनकी भूवैज्ञानिक बनावट तक सीमित नहीं है। ये इस बात को समझने का अवसर देते हैं कि अलग-थलग द्वीपों पर पारिस्थितिकी तंत्र कैसे विकसित होते हैं और वहां की प्रजातियां अपने वातावरण के अनुरूप किस तरह ढलती हैं। हालांकि, इन द्वीपों पर पहुंच और गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध हो सकते हैं, इसलिए इन्हें सामान्य पर्यटन स्थल समझना सही नहीं होगा।

Sirpur CG 1792498594767 1

3. सिरपुर सांस्कृतिक और पुरातात्विक क्षेत्र: प्राचीन इतिहास की अनमोल विरासत

तीसरा स्थल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के किनारे स्थित सिरपुर है। ऐतिहासिक रूप से इसे श्रीपुर के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षेत्र प्राचीन समय में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक केंद्र रहा है। यहां मिले पुरातात्विक अवशेष बताते हैं कि इस क्षेत्र में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का विकास हुआ और विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक संपर्क रहा।सिरपुर की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक संरचनाओं में लक्ष्मण मंदिर शामिल है। ईंटों से बना यह मंदिर अपनी वास्तुकला और बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, यहां हिंदू मंदिरों, बौद्ध विहारों और जैन परंपरा से जुड़े अवशेष भी मिले हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से उस समय की धार्मिक मान्यताओं, निर्माण शैली और सामाजिक जीवन को समझने में मदद मिलती है।सिरपुर का महत्व केवल पुराने मंदिरों तक सीमित नहीं है। यहां के पुरातात्विक अवशेष प्राचीन बस्तियों, व्यापारिक गतिविधियों और शिल्प परंपराओं की ओर भी संकेत करते हैं। इसलिए इसे एक व्यापक सांस्कृतिक और पुरातात्विक परिदृश्य के रूप में देखा जाता है। यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में इसका शामिल होना इस विरासत के संरक्षण और अध्ययन को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Read More: Kerala Governor: लोकभवन में खाने को लेकर नया आदेश, सिर्फ शाकाहारी भोजन बनाने के फैसले पर सवाल

यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट क्या होती है?

यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट उन स्थलों की सूची होती है, जिन्हें संबंधित देश भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए संभावित उम्मीदवार मानता है। किसी स्थल को आधिकारिक वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किए जाने से पहले उसे इस सूची में शामिल करना जरूरी होता है। इसके बाद संबंधित देश औपचारिक नामांकन प्रस्तुत करता है और यूनेस्को की निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसके महत्व, संरक्षण की स्थिति और अन्य मानदंडों का मूल्यांकन किया जाता है।इसलिए टेंटेटिव लिस्ट में नाम आने को अंतिम मान्यता नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण चरण समझना चाहिए। यूनेस्को की आधिकारिक सूची के अनुसार, इन तीन स्थलों के शामिल होने के बाद भारत की टेंटेटिव लिस्ट में कुल 81 स्थल दर्ज हो गए हैं।

Read More: ITBP Raising Day: सीमा पर चुनौतीपूर्ण हालात के बीच PM मोदी ने बढ़ाया जवानों का हौसला, हिमवीरों की तारीफ

भारत की विरासत के लिए क्यों अहम है यह कदम?

बाराटांग, अंडमान के ज्वालामुखीय द्वीप और सिरपुर तीन अलग-अलग तरह की विरासत को सामने लाते हैं। एक ओर प्राकृतिक भूवैज्ञानिक संरचनाएं हैं, दूसरी ओर ज्वालामुखीय गतिविधियों और विशिष्ट जैव विविधता से जुड़े द्वीप हैं, जबकि सिरपुर भारत के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक मेलजोल की कहानी बताता है। टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने से इन स्थलों के महत्व पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बढ़ सकता है और भविष्य में इनके संरक्षण, शोध तथा जिम्मेदार पर्यटन से जुड़े प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सकता है। लेकिन विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की प्रक्रिया अभी बाकी है। फिलहाल इतना जरूर है कि भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में इन तीन स्थलों ने एक अहम कदम आगे बढ़ाया है।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते  हैं info@oneworldnews.com.

Back to top button