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Sea Buckthorn: सी बकथॉर्न के फायदे जानकर हो जाएंगे हैरान! जानें जूस, तेल और अन्य रूपों में कैसे करें इस्तेमाल

Sea Buckthorn, लद्दाख के ऊंचे पहाड़ों और ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में उगने वाला एक छोटा-सा नारंगी फल इन दिनों चर्चा में है। इसका नाम सी बकथॉर्न (Sea Buckthorn) है, जिसे ‘लद्दाख का गोल्ड’ और ‘हिमालय का लिक्विड गोल्ड’ भी कहा जाता है।

 Sea Buckthorn : क्या सी बकथॉर्न सच में सेहत के लिए फायदेमंद है? जानें इसके गुण और इस्तेमाल का तरीका

Sea Buckthorn, लद्दाख के ऊंचे पहाड़ों और ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में उगने वाला एक छोटा-सा नारंगी फल इन दिनों चर्चा में है। इसका नाम सी बकथॉर्न (Sea Buckthorn) है, जिसे ‘लद्दाख का गोल्ड’ और ‘हिमालय का लिक्विड गोल्ड’ भी कहा जाता है। अपने खट्टे स्वाद, पोषक तत्वों और कई तरह के इस्तेमाल के कारण यह फल खास पहचान रखता है। अक्टूबर 2026 में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद लद्दाख के इस फल की चर्चा फिर बढ़ी। लद्दाख के सी बकथॉर्न को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग भी मिल चुका है, जो किसी क्षेत्र से जुड़े खास उत्पाद की पहचान को दर्शाता है।

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क्या है सी बकथॉर्न और क्यों कहलाता है लद्दाख का गोल्ड?

सी बकथॉर्न एक झाड़ीदार पौधा है, जिस पर छोटे-छोटे पीले और नारंगी रंग के फल लगते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Hippophae rhamnoides है। यह पौधा कठिन मौसम में भी जीवित रह सकता है और कम बारिश, तेज ठंड तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगने की क्षमता रखता है। लद्दाख के अलावा हिमालय के कुछ दूसरे इलाकों में भी यह पाया जाता है। इसकी बेरी स्वाद में काफी खट्टी होती है, इसलिए इसे आमतौर पर जूस, जैम, सिरप और दूसरे खाद्य उत्पादों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसे ‘गोल्ड’ कहने की एक वजह इसकी पोषण संबंधी खूबियां और दूसरी वजह स्थानीय अर्थव्यवस्था में इसकी संभावित भूमिका है। इसकी बेरी, पत्तियों और तेल का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों, त्वचा की देखभाल से जुड़े उत्पादों और कुछ पारंपरिक तैयारियों में किया जाता है। इसके कारोबार से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसे ‘सुपरफूड’ कहे जाने का मतलब यह नहीं है कि यह किसी बीमारी का पक्का इलाज है या दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों से हमेशा बेहतर है।

सी बकथॉर्न में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?

सी बकथॉर्न की बेरी में विटामिन C, विटामिन E, कैरोटिनॉयड्स और पॉलीफेनॉल जैसे यौगिक पाए जाते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा पौधे की किस्म, फल के पकने की अवस्था और उगने की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसके बीज और गूदे से निकाले जाने वाले तेल में अलग-अलग प्रकार के फैटी एसिड भी मिलते हैं। इनमें ओमेगा-3, ओमेगा-6, ओमेगा-7 और ओमेगा-9 शामिल हो सकते हैं। विटामिन C शरीर में कोलेजन बनाने, सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज और भोजन से आयरन के अवशोषण में भूमिका निभाता है। वहीं, विटामिन E और पौधों में पाए जाने वाले कुछ एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। सी बकथॉर्न में इन घटकों की मौजूदगी इसे पोषण के लिहाज से दिलचस्प बनाती है। हालांकि, किसी खास पोषक तत्व की मात्रा के बारे में एक ही आंकड़ा सभी सी बकथॉर्न उत्पादों पर लागू नहीं किया जा सकता।

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सेहत के लिहाज से क्या हैं इसकी खासियतें?

सी बकथॉर्न पर हुई वैज्ञानिक रिसर्च में इसके पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों की जांच की गई है। शुरुआती अध्ययनों में कुछ संभावित स्वास्थ्य लाभों के संकेत मिले हैं, लेकिन इनके आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि सी बकथॉर्न हर व्यक्ति में किसी बीमारी को रोक सकता है या उसका इलाज कर सकता है। उपलब्ध मानव-अध्ययनों की संख्या सीमित है और अलग-अलग अध्ययनों में इस्तेमाल किए गए उत्पाद, मात्रा तथा परिणाम भी अलग हैं। इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा मानना बेहतर है, न कि किसी दवा का विकल्प। अगर कोई व्यक्ति अपनी सेहत में सुधार के लिए सी बकथॉर्न जूस या सप्लीमेंट लेना चाहता है, तो उसे उत्पाद की सामग्री, उसमें मौजूद अतिरिक्त चीनी और इस्तेमाल की जाने वाली मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। केवल ‘नेचुरल’ या ‘सुपरफूड’ लिखा होने से कोई उत्पाद हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या प्रभावी नहीं हो जाता।

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सी बकथॉर्न का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

सी बकथॉर्न का सबसे आम इस्तेमाल जूस और अन्य पेय पदार्थों में होता है। इसका स्वाद तेज खट्टा होता है, इसलिए बाजार में मिलने वाले कई उत्पादों में इसे पानी या दूसरे फलों के रस के साथ मिलाया जाता है। इसका जैम, सिरप और पल्प भी बनाया जा सकता है। कुछ जगहों पर इसकी पत्तियों से हर्बल चाय तैयार की जाती है। पैकेट या बोतल में मिलने वाले उत्पाद को खरीदते समय उसके लेबल पर सामग्री, चीनी की मात्रा, एक्सपायरी डेट और निर्माता की जानकारी पढ़ना जरूरी है। इसके अलावा, सी बकथॉर्न के बीज और गूदे से निकाले गए तेल का इस्तेमाल कुछ स्किनकेयर और कॉस्मेटिक उत्पादों में किया जाता है। यह तेल हर उत्पाद में एक जैसा नहीं होता, क्योंकि बीज और गूदे से निकाले गए तेल की संरचना अलग हो सकती है। त्वचा पर इस्तेमाल करने से पहले उत्पाद के निर्देश पढ़ें और संवेदनशील त्वचा होने पर पहले थोड़ी जगह पर पैच टेस्ट करें। जलन, लालिमा या खुजली होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर दें।

सेवन से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

सी बकथॉर्न का जूस, तेल और सप्लीमेंट एक जैसे उत्पाद नहीं हैं। इसलिए एक रूप में उपलब्ध जानकारी को दूसरे रूप पर लागू नहीं करना चाहिए। खासकर केंद्रित तेल या सप्लीमेंट को अधिक मात्रा में लेना उचित नहीं है। यदि आप नियमित दवाएं लेते हैं, विशेष रूप से खून का थक्का जमने पर असर डालने वाली दवाएं, या आपको कोई पुरानी बीमारी है, तो सी बकथॉर्न सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान भी केंद्रित उत्पादों के इस्तेमाल पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। इनके लंबे समय तक सेवन और सही मात्रा को लेकर पर्याप्त उच्च-गुणवत्ता वाले मानव-अध्ययन अभी उपलब्ध नहीं हैं। कुल मिलाकर, सी बकथॉर्न लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों का एक खास फल है, जिसकी पहचान इसके पोषक तत्वों, खट्टे स्वाद और खाद्य व कॉस्मेटिक उत्पादों में इस्तेमाल के कारण बढ़ी है। इसे अपने आहार में शामिल करना हो तो संतुलित मात्रा, उत्पाद की गुणवत्ता और अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखें।

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