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Lucknow news: यूपी की बेटी ने बढ़ाया देश का मान, पैरा तीरंदाजी में स्वाति चौधरी को सिल्वर मेडल

Lucknow news, उत्तर प्रदेश की तीरंदाज स्वाति चौधरी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला W1 व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया है।

Lucknow news : एशियन पैरा गेम्स में स्वाति चौधरी का जलवा, W1 तीरंदाजी में जीता सिल्वर मेडल

Lucknow news, उत्तर प्रदेश की तीरंदाज स्वाति चौधरी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला W1 व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित इन खेलों में 22 अक्टूबर को स्वाति ने फाइनल तक का सफर तय किया और स्वर्ण पदक के लिए चीन की खिलाड़ी सेन मेंगकान को कड़ी टक्कर दी। मुकाबले में एक समय स्वाति 4-2 से आगे थीं, लेकिन चीनी तीरंदाज ने वापसी करते हुए 6-4 से जीत दर्ज की। इस तरह स्वाति को रजत पदक मिला। उनका यह प्रदर्शन भारतीय पैरा तीरंदाजी के लिए अहम उपलब्धि है।

फाइनल में आखिरी समय तक जारी रही मुकाबले की टक्कर

महिला W1 व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में स्वाति चौधरी का सामना चीन की सेन मेंगकान से हुआ। मुकाबले की शुरुआत भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में रही। स्वाति ने पहले सेट में 25 अंक हासिल किए, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी 17 अंक ही बना सकीं। इससे स्वाति ने मैच में 2-0 की बढ़त बना ली।दूसरे सेट में चीनी खिलाड़ी ने वापसी की और 22-21 के अंतर से सेट जीतकर मुकाबले को 2-2 की बराबरी पर ला दिया। इसके बाद तीसरे सेट में भी दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। स्वाति ने 22 अंक हासिल किए, जबकि सेन मेंगकान 21 अंक ही बना सकीं। इस जीत के साथ भारतीय खिलाड़ी ने 4-2 की बढ़त बना ली और स्वर्ण पदक से केवल एक सेट दूर रह गईं।हालांकि, इसके बाद मुकाबले का रुख बदल गया। चौथे सेट में सेन मेंगकान ने बेहतरीन निशानेबाजी करते हुए 30 अंक हासिल किए, जबकि स्वाति 20 अंक ही बना सकीं। इससे स्कोर 4-4 हो गया। निर्णायक सेट में भी चीनी खिलाड़ी ने अपना प्रदर्शन बनाए रखा और 28 अंक हासिल करके मुकाबला 6-4 से जीत लिया। इस तरह स्वाति को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

पहली बार एशियन पैरा गेम्स में उतरीं स्वाति

स्वाति चौधरी के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह पहली बार एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में अपनी शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। महिला W1 स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में स्वाति ने 648 अंक हासिल किए और इस वर्ग का एशियाई रिकॉर्ड तोड़ दिया। उन्होंने 2023 में हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में चीन की चेन मिनयी के नाम दर्ज 627 अंकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।इसके बाद स्वाति ने नॉकआउट मुकाबलों में भी अपनी लय बनाए रखी। सेमीफाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया की खिलाड़ी ली यूनही को 6-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इस जीत के साथ उन्होंने कम से कम रजत पदक सुनिश्चित कर लिया था। फाइनल में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने के बावजूद उनका प्रदर्शन प्रतियोगिता की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।

पांच साल तक बिस्तर पर रहने के बाद बदली जिंदगी

स्वाति चौधरी की खेल यात्रा के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। एशियन पैरालंपिक कमेटी की 19 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 में बेटी को जन्म देने के कुछ समय बाद उन्हें एनेस्थीसिया से जुड़ी गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनके शरीर में लकवे जैसी स्थिति पैदा हो गई और वह करीब पांच साल तक बिस्तर पर रहीं।इस दौरान उनकी जिंदगी में कई चुनौतियां आईं। उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। उनके पति गौरव चौधरी ने भी इस कठिन समय में उनका साथ दिया। उन्होंने स्वाति के इलाज और देखभाल के लिए अपने कामकाज में बदलाव किए। परिवार ने इस दौर में आर्थिक और भावनात्मक मुश्किलों का सामना किया।स्वाति के जीवन में बदलाव तब आया, जब 2023 में उनके परिवार के एक परिचित और कोच विवेक चिकाराने उन्हें पैरा तीरंदाजी से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में तीरंदाजी को उनके लिए सक्रिय रहने और आत्मविश्वास वापस पाने का एक माध्यम माना गया था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

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मेरठ से शुरू हुई तीरंदाजी की तैयारी

स्वाति ने अपनी तीरंदाजी की ट्रेनिंग मेरठ की गुरुकुल आर्चरी अकादमी में शुरू की। इसके बाद उन्होंने सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण यानी SAI के केंद्र में भी प्रशिक्षण लिया। लगातार अभ्यास और कोचों के मार्गदर्शन से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की तैयारी की।एशियन पैरालंपिक कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वाति रोजाना करीब सात घंटे तक अभ्यास करती हैं। प्रतियोगिताओं की तैयारी के दौरान उन्हें कई बार लंबे समय तक परिवार से दूर भी रहना पड़ता है। उनकी बेटी नित्या भी उनके सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वाति के मुताबिक, बेटी उन्हें आगे बढ़ने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है।स्वाति ने 2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की। सितंबर में अहमदाबाद में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। इसके बाद एशियन पैरा गेम्स में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक पहुंचना उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गया।

क्या है तीरंदाजी की W1 श्रेणी?

पैरा तीरंदाजी में W1 एक विशेष वर्ग है, जिसमें ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जिन्हें हाथों और पैरों की कार्यक्षमता, मांसपेशियों की ताकत या शरीर की गति से जुड़ी गंभीर सीमाओं का सामना करना पड़ता है। इस वर्ग के खिलाड़ी आमतौर पर व्हीलचेयर पर बैठकर निशाना लगाते हैं। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति के अनुसार उनके उपकरणों और प्रतियोगिता में भाग लेने के तरीकों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।इस श्रेणी में सफलता हासिल करने के लिए सटीक निशाना लगाने के साथ-साथ लगातार अभ्यास, एकाग्रता और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होता है। स्वाति ने क्वालिफिकेशन राउंड में रिकॉर्ड बनाकर और फिर फाइनल में जगह बनाकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

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स्वाति की उपलब्धि से भारतीय पैरा खेलों को मिली मजबूती

एशियन पैरा गेम्स 2026 में स्वाति चौधरी का रजत पदक भारत की पैरा तीरंदाजी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतियोगिता में न सिर्फ फाइनल तक का सफर तय किया, बल्कि स्वर्ण पदक के मुकाबले में भी कड़ी चुनौती पेश की। क्वालिफिकेशन राउंड में एशियाई रिकॉर्ड तोड़ना और अपने पहले ही एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीतना उनके प्रदर्शन को खास बनाता है।उत्तर प्रदेश से आने वाली स्वाति की सफलता यह भी दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, सहयोग और निरंतर अभ्यास से खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बना सकते हैं। पांच साल तक बिस्तर पर रहने के बाद तीरंदाजी में अपनी पहचान बनाना उनके सफर का अहम पहलू है।

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