Ankita Bhandari Case: राहुल-प्रियंका की मुलाकात के बाद फिर चर्चा में आया मामला
Ankita Bhandari Case, उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
Ankita Bhandari Case, उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ इस मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, वहीं दूसरी तरफ अंकिता के माता-पिता अब भी कथित VIP एंगल की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि मामले से जुड़े उन सवालों के जवाब मिलने चाहिए, जिन पर अभी भी संदेह बना हुआ है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।अंकिता के माता-पिता चाहते हैं कि कथित VIP की भूमिका की जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग पर विचार किया जाए। इस मुद्दे को लेकर परिवार ने दिल्ली के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन भी किया। अब सवाल यह है कि मामले में दोषियों को सजा मिलने के बाद भी परिवार किन सवालों के जवाब चाहता है और दुष्यंत कुमार गौतम का नाम इस विवाद से कैसे जुड़ा?

क्या था अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।अदालत के फैसले के बाद भी अंकिता के परिवार की चिंता कथित VIP एंगल को लेकर बनी रही। परिवार चाहता है कि यह पता लगाया जाए कि क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी और यदि थी, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मांग को लेकर परिवार लगातार अपनी आवाज उठा रहा है।यहां यह समझना जरूरी है कि दोषियों को सजा मिलना और कथित VIP की भूमिका की जांच की मांग दो अलग-अलग पहलू हैं। किसी व्यक्ति का नाम सोशल मीडिया पर सामने आना अपने आप में उसके खिलाफ अपराध साबित नहीं करता। किसी भी आरोप पर निष्कर्ष ठोस सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

दुष्यंत कुमार गौतम का नाम कैसे आया?
दिसंबर 2025 में अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग साझा की थी। इन पोस्ट के जरिए उन्होंने अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP से जुड़े दावे किए। वायरल रिकॉर्डिंग से जुड़ी चर्चाओं में ‘गट्टू’ नाम का जिक्र हुआ, जिसे कुछ लोगों ने दुष्यंत कुमार गौतम से जोड़कर पेश किया।उस समय दुष्यंत कुमार गौतम भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता थे। इस घटनाक्रम के बाद उनका नाम कथित VIP एंगल को लेकर चर्चा में आने लगा। हालांकि, वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता को लेकर विवाद भी सामने आया।पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर ने कथित ऑडियो को AI से तैयार किया गया बताते हुए उसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। वहीं, दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कानूनी कार्रवाई की। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों को जांच और अदालत के निष्कर्षों से अलग करके देखना जरूरी है।
क्या गौतम के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं?
दुष्यंत कुमार गौतम के खिलाफ कथित VIP एंगल से जुड़े आरोपों को अदालत में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। उपलब्ध कानूनी रिकॉर्ड के मुताबिक, अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और मुकदमे में उन्हें इस अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है। गौतम ने भी अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया है।ऐसे में किसी व्यक्ति को केवल वायरल वीडियो, ऑडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर दोषी मान लेना उचित नहीं होगा। दूसरी ओर, अंकिता के माता-पिता की कथित VIP एंगल की जांच की मांग को भी गंभीरता से समझने की जरूरत है। परिवार जानना चाहता है कि मामले से जुड़े उसके सवालों की जांच किस स्तर तक पहुंची है और क्या सभी जरूरी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
राज्यपाल नियुक्ति पर क्यों हो रहा है विवाद?
दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद अंकिता के परिवार ने उनकी नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग उठाई। परिवार का कहना है कि कथित VIP एंगल की जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर विचार किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आवाज उठाई है।यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्यपाल का पद संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगने और आरोप साबित होने के बीच कानूनी अंतर होता है। इसलिए नियुक्ति को लेकर उठे सवालों का जवाब देते समय जांच की स्थिति, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित व्यक्ति के पक्ष को ध्यान में रखना जरूरी है।सरकार की ओर से इस मामले में परिवार की मांग और नियुक्ति से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना सार्वजनिक चर्चा को तथ्यात्मक बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन किसी नियुक्ति के पीछे की मंशा के बारे में बिना प्रमाण के निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन और हिरासत का मामला
14 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की। परिवार वहां दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाने और कथित VIP एंगल की जांच पूरी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा था।इसके बाद 15 अक्टूबर की तड़के दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई रातभर चले प्रदर्शन के बाद हुई और हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में छोड़ दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए।परिवार के विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। हालांकि, प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से अलग यह जानना भी जरूरी है कि जांच में अब तक क्या सामने आया है और परिवार के सवालों पर संबंधित एजेंसियों का क्या रुख है।
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परिवार को चाहिए सवालों के जवाब
अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग है कि उनकी बेटी के मामले में कथित VIP एंगल की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें स्पष्ट जानकारी दी जाए। वहीं, दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज किया है और उनके खिलाफ इन आरोपों पर दोष सिद्ध नहीं हुआ है।इस पूरे विवाद में सबसे जरूरी है कि जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े, आरोपों की पुष्टि सबूतों के आधार पर हो और परिवार की चिंताओं का जवाब दिया जाए। अंकिता के मामले में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन कथित VIP एंगल को लेकर उठे सवालों पर स्पष्टता की मांग अब भी बनी हुई है। ऐसे संवेदनशील मामले में सोशल मीडिया के दावों से आगे बढ़कर तथ्यों, निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
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