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Donald Trump: ट्रंप प्रशासन ने क्यों रोका 8 कंपनियों का ग्रीन कार्ड प्रोसेस? जानें Infosys, HCL और TCS के कर्मचारियों पर असर

Donald Trump, अमेरिका में काम करने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड से जुड़ी किसी भी नई पाबंदी की खबर चिंता बढ़ा सकती है।

Donald Trump : अमेरिका में ग्रीन कार्ड पर ट्रंप का बड़ा फैसला, Infosys-HCL समेत 8 कंपनियों के कर्मचारियों पर कितना पड़ेगा असर?

Donald Trump, अमेरिका में काम करने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड से जुड़ी किसी भी नई पाबंदी की खबर चिंता बढ़ा सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों को लेकर पहले से ही विदेशी कर्मचारियों और अमेरिकी कंपनियों के बीच चर्चा जारी है। ऐसे में Infosys और HCL जैसी कंपनियों समेत आठ कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम को सस्पेंड किए जाने की खबर ने भारतीय कर्मचारियों पर संभावित असर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस खबर को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कार्रवाई किस प्रक्रिया पर हुई है, किन कर्मचारियों पर इसका असर पड़ सकता है और क्या इससे अमेरिका में काम करने वाले सभी भारतीयों का ग्रीन कार्ड रुक जाएगा।

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क्या है पूरा मामला?

अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने के लिए विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड की जरूरत होती है। रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं। इनमें कुछ मामलों में अमेरिकी नियोक्ता को यह साबित करना पड़ता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है या विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इस प्रक्रिया को आम तौर पर PERM लेबर सर्टिफिकेशन कहा जाता है।Infosys और HCL जैसी भारतीय आईटी कंपनियां लंबे समय से अमेरिका में कारोबार कर रही हैं और बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवरों को रोजगार देती हैं। अगर किसी कंपनी के रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड आवेदनों पर आधिकारिक रोक लगती है, तो उस कंपनी के माध्यम से स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों को देरी या अतिरिक्त जांच का सामना करना पड़ सकता है।

किन 8 कंपनियों पर हुई कार्रवाई?

8 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने आठ प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने का फैसला लिया है। इस सूची में शामिल कंपनियां हैं:Microsoft, Adobe, Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCL Technologies और Capgemini।इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का मतलब है कि फिलहाल इनके माध्यम से विदेशी कर्मचारियों के लिए नई PERM लेबर सर्टिफिकेशन अर्जियां स्वीकार नहीं की जाएंगी और लंबित आवेदनों की प्रोसेसिंग भी रोकी जाएगी। यह फैसला अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से की गई कार्रवाई के तहत आया है।

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ट्रंप प्रशासन ने क्यों लिया यह फैसला?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि रोजगार-आधारित इमिग्रेशन सिस्टम का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए, जिससे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हों। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम विभाग के अधिकारियों ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े कथित नियम उल्लंघनों और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को लेकर चिंता जताई है।प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम वेतन पर नियुक्त करके अमेरिकी कर्मचारियों की जगह उन्हें अवसर दे रही थीं। इसी पृष्ठभूमि में कंपनियों के खिलाफ जांच और PERM प्रक्रिया पर रोक की कार्रवाई की गई है।हालांकि, आरोपों और साबित हुए उल्लंघनों के बीच अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने सभी आठ कंपनियों के खिलाफ कंपनी-वार विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल प्रशासन के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

भारतीय कर्मचारियों पर कितना पड़ेगा असर?

इस फैसले का सबसे सीधा असर उन भारतीय कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो Infosys, TCS, Wipro, HCL Technologies या Cognizant जैसी कंपनियों के माध्यम से अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। जिन कर्मचारियों का PERM आवेदन लंबित है, उन्हें आगे की प्रक्रिया शुरू होने तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, जिन कर्मचारियों के लिए अभी आवेदन दाखिल किया जाना था, उनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू होने में देरी हो सकती है।यह स्थिति खासतौर पर उन आईटी प्रोफेशनल्स के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जो लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे हैं और स्थायी निवास की योजना बना रहे हैं। ग्रीन कार्ड मिलने से कर्मचारी को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का अधिकार मिलता है। इसके बिना कई विदेशी कर्मचारी अपने रोजगार और इमिग्रेशन स्टेटस के लिए अस्थायी वीजा व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं।हालांकि, इसका असर हर भारतीय कर्मचारी पर एक जैसा नहीं होगा। जिन लोगों का ग्रीन कार्ड पहले ही मंजूर हो चुका है, उनकी स्थिति उन कर्मचारियों से अलग है जिनका आवेदन अभी PERM चरण में है।

क्या H-1B वीजा भी हो जाएगा रद्द?

यह इस खबर से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, PERM प्रक्रिया पर रोक का मतलब यह नहीं है कि प्रभावित कंपनियों में काम करने वाले सभी भारतीय कर्मचारियों के H-1B वीजा अपने आप रद्द हो जाएंगे।H-1B वीजा और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। H-1B विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में निर्धारित शर्तों के तहत काम करने की अनुमति देता है, जबकि ग्रीन कार्ड स्थायी निवास का रास्ता है। PERM प्रक्रिया पर रोक मुख्य रूप से रोजगार के आधार पर स्थायी निवास के आवेदन को प्रभावित करती है।फिर भी, जिन कर्मचारियों का H-1B वीजा समाप्ति के करीब है और जिनकी आगे की इमिग्रेशन योजना ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ी है, उन्हें अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होगी। ऐसे कर्मचारियों को अपने इमिग्रेशन विशेषज्ञ से यह समझना चाहिए कि उनके मामले में वीजा विस्तार या अन्य कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं या नहीं।

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क्या इससे भारतीय IT कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ेगा?

इस फैसले से कंपनियों की भर्ती योजनाओं और कर्मचारियों को लंबे समय तक अमेरिका में बनाए रखने की रणनीति पर असर पड़ सकता है। अगर ग्रीन कार्ड प्रायोजन की प्रक्रिया लंबे समय तक बाधित रहती है, तो कुछ कर्मचारियों के लिए अमेरिका में स्थायी करियर बनाने की योजना कठिन हो सकती है।इसके बावजूद, केवल PERM प्रक्रिया पर रोक के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि इन कंपनियों का पूरा अमेरिकी कारोबार बंद हो जाएगा या सभी भारतीय कर्मचारियों को नौकरी छोड़नी पड़ेगी। तत्काल प्रभाव मुख्य रूप से उन कर्मचारियों और मामलों पर केंद्रित है, जो प्रभावित कंपनियों के माध्यम से रोजगार-आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया में शामिल हैं।

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आगे क्या करना चाहिए?

प्रभावित कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सबसे पहले अपने PERM आवेदन की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। उन्हें यह भी पता करना चाहिए कि उनका मामला किस चरण में है और रोक के कारण उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा। H-1B वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों को अपने वीजा की वैधता, विस्तार की समयसीमा और नियोक्ता से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा करनी चाहिए।इसके अलावा, अमेरिकी श्रम विभाग और संबंधित इमिग्रेशन अधिकारियों की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना जरूरी है। किसी भी कर्मचारी को केवल सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के आधार पर अपनी नौकरी छोड़ने या अमेरिका से लौटने जैसा बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए।कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में नई अनिश्चितता पैदा करती है। हालांकि, इसका मतलब सभी भारतीय कर्मचारियों के वीजा या ग्रीन कार्ड रद्द होना नहीं है। आगे का वास्तविक असर रोक की अवधि, जांच के नतीजों और अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।

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