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Sitting Health Risks: कम चलना और ज्यादा बैठना पड़ सकता है भारी! जानें शरीर पर होने वाले असर

Sitting Health Risks, आज की लाइफस्टाइल में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठना, घर से काम करते समय लगातार लैपटॉप के सामने रहना, पढ़ाई के दौरान लंबे समय तक बैठे रहना या खाली समय में कई घंटे टीवी और मोबाइल देखना शरीर की गतिविधि को काफी कम कर सकता है।

Sitting Health Risks : लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में आते हैं ये बदलाव

Sitting Health Risks, आज की लाइफस्टाइल में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठना, घर से काम करते समय लगातार लैपटॉप के सामने रहना, पढ़ाई के दौरान लंबे समय तक बैठे रहना या खाली समय में कई घंटे टीवी और मोबाइल देखना शरीर की गतिविधि को काफी कम कर सकता है। लंबे समय तक बैठे रहना सिर्फ कमर दर्द की वजह नहीं बनता, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म, मांसपेशियों और हृदय संबंधी स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। इसलिए अगर आपकी दिनचर्या में लंबे समय तक बैठना शामिल है, तो बीच-बीच में उठकर शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है।

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कमर और गर्दन में दर्द की समस्या

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से सबसे पहले असर अक्सर कमर, गर्दन और कंधों पर दिखाई देता है। लगातार बैठने से मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है और गलत पोस्चर के कारण गर्दन और पीठ में खिंचाव महसूस हो सकता है।अगर लैपटॉप या कंप्यूटर स्क्रीन बहुत नीचे या बहुत ऊपर है, तो व्यक्ति अनजाने में गर्दन आगे की ओर झुका सकता है। लंबे समय तक ऐसा करने पर गर्दन और कंधों में अकड़न और दर्द हो सकता है। इसलिए बैठते समय पीठ को सपोर्ट देना और स्क्रीन की ऊंचाई उचित रखना जरूरी है।

मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं

शरीर को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित गतिविधि जरूरी है। लगातार बैठे रहने से पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों का इस्तेमाल कम हो जाता है। लंबे समय तक ऐसी निष्क्रिय दिनचर्या रहने पर मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक फिटनेस प्रभावित हो सकती है।इसके अलावा, रोजाना पर्याप्त चलना-फिरना न होने से शरीर की सामान्य गतिशीलता भी कम हो सकती है। इसलिए ऑफिस या घर पर काम करने वाले लोगों को दिनभर में छोटे-छोटे एक्टिविटी ब्रेक लेना चाहिए।

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वजन बढ़ने का खतरा

जब व्यक्ति लंबे समय तक बैठा रहता है, तो उसकी शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। अगर भोजन से मिलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रहा है, तो लंबे समय में वजन बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है।खासकर अगर बैठने के साथ लगातार स्नैकिंग, मीठे पेय और ज्यादा कैलोरी वाले भोजन की आदत हो, तो वजन बढ़ने का जोखिम और बढ़ सकता है। इसलिए सिर्फ डाइट पर ध्यान देना ही नहीं, बल्कि रोजाना शारीरिक गतिविधि को भी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।

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ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म पर असर

लंबे समय तक बैठे रहने और कम शारीरिक गतिविधि वाली जीवनशैली का संबंध मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाता है। शरीर की मांसपेशियां ग्लूकोज के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब शरीर लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहता, तो मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन की संवेदनशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।इसी वजह से नियमित शारीरिक गतिविधि को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। खासकर खाने के बाद थोड़ी देर हल्का चलना भी लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को तोड़ने में मदद कर सकता है।

हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

लंबे समय तक बैठे रहने वाली निष्क्रिय जीवनशैली को हृदय संबंधी स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय माना जाता है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में रक्त संचार और कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस को बनाए रखने में मदद करती है।अगर कोई व्यक्ति दिन का ज्यादातर समय बैठकर बिताता है और व्यायाम या अन्य शारीरिक गतिविधि बहुत कम करता है, तो लंबे समय में कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए रोजाना चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित एक्सरसाइज करना उपयोगी आदतें हैं।

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पैरों में भारीपन और जकड़न

लंबे समय तक बैठे रहने पर पैरों में भारीपन, जकड़न या असहजता महसूस हो सकती है। एक ही स्थिति में लंबे समय तक रहने से पैरों की सामान्य गतिविधि कम हो जाती है।काम के दौरान हर 30 से 60 मिनट में कुछ मिनट के लिए उठना, थोड़ा चलना या पैरों को स्ट्रेच करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय दिनभर छोटी-छोटी गतिविधियों को शामिल करना अधिक व्यावहारिक तरीका है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर

शारीरिक गतिविधि का संबंध मानसिक स्वास्थ्य से भी है। लगातार बैठे रहना अक्सर ऐसी दिनचर्या का हिस्सा होता है जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक काम या स्क्रीन के सामने रहता है। इससे तनाव, मानसिक थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है।थोड़ी देर बाहर टहलना, काम के बीच ब्रेक लेना और नियमित एक्सरसाइज करना मूड और ऊर्जा के स्तर को बेहतर रखने में मदद कर सकता है।

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कितनी देर बैठने के बाद ब्रेक लें?

अगर आपका काम ऐसा है जिसमें लंबे समय तक बैठना जरूरी है, तो लगातार कई घंटे बिना उठे बैठे रहने से बचें। काम के दौरान नियमित अंतराल पर खड़े होकर कुछ मिनट चलें। फोन पर बात करते समय संभव हो तो खड़े हो जाएं या थोड़ी वॉक करें।कंप्यूटर पर काम करने वालों को अपने वर्कस्टेशन को भी सही तरीके से सेट करना चाहिए। पैरों को जमीन पर आराम से रखें, पीठ को सपोर्ट दें और स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें कि गर्दन को लगातार नीचे न झुकाना पड़े।

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रोजाना एक्सरसाइज को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा

लंबे समय तक बैठने के प्रभाव को कम करने के लिए केवल एक बार एक्सरसाइज करना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। पूरे दिन में बैठने का समय कम करना और छोटी-छोटी गतिविधियां बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।तेज चाल से चलना, साइकलिंग, तैराकी, योग या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं। अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या लंबे समय से व्यायाम नहीं किया है, तो कठिन एक्सरसाइज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।कुल मिलाकर, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत शरीर की गतिविधि को कम कर सकती है और कमर-गर्दन के दर्द से लेकर वजन, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े कई पहलुओं को प्रभावित कर सकती है। इसलिए काम की मजबूरी के बावजूद दिनभर में छोटे-छोटे एक्टिविटी ब्रेक लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।

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