Delhi gang rape: पुलिस के पुराने मुखबिर पर आरोप, फोरेंसिक और DNA जांच से जुड़े अहम सबूत
Delhi gang rape, दिल्ली के कालकाजी इलाके के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
Delhi gang rape : कपड़ों के रंग से लेकर हुलिये तक, कालकाजी गैंगरेप के आरोपियों की ऐसे हुई पहचान
Delhi gang rape, दिल्ली के कालकाजी इलाके के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में एक अहम जानकारी सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल आसिफ पहले दिल्ली पुलिस के लिए स्थानीय मुखबिर के तौर पर काम कर चुका था। पुलिस के पास स्थानीय बदमाशों और उपद्रवी तत्वों से जुड़ी जानकारी में उसका विवरण पहले से मौजूद था, जिससे उसकी पहचान और तलाश में मदद मिली। यह मामला 21 सितंबर 2026 की शाम का है। पुलिस के मुताबिक, 17 वर्षीय किशोरी अपने एक दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर गई थी। इसके बाद दोनों आस्था कुंज पार्क की तरफ गए, जहां तीन लोगों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर उन्हें रोका। आरोप है कि युवकों ने पुलिसिया कार्रवाई का डर दिखाकर दोनों को अलग किया और बाद में किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता के दोस्त ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।
पीड़िता के बताए कपड़ों और हुलिये से मिला सुराग
पुलिस की जांच में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पीड़िता द्वारा दी गई जानकारी की रही। घटना के बाद मानसिक आघात के बावजूद किशोरी ने आरोपियों के कपड़ों, हुलिये, कद-काठी और एक-दूसरे को बुलाने वाले नाम या निकनेम के बारे में जानकारी दी। उसने यह भी बताया कि आरोपी किस रास्ते से पार्क से बाहर निकले थे। पुलिस ने इन्हीं विवरणों के आधार पर इलाके में संदिग्धों की तलाश शुरू की।रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने एक आरोपी के बारे में बताया था कि वह भारी शरीर वाला था, उसकी दाढ़ी थी और उसने चेक शर्ट तथा जींस पहनी थी। दूसरे आरोपी के बारे में ब्राउन टी-शर्ट और तीसरे के बारे में काले कपड़ों की जानकारी दी गई थी। इन विवरणों ने पुलिस को स्थानीय स्तर पर संदिग्धों को छांटने में मदद की। पुलिस ने पार्क और उसके आसपास के इलाकों में पूछताछ के साथ-साथ उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला। कुछ कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिसके कारण जांच में प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़िता के बयान का महत्व और बढ़ गया। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कुछ ही घंटों में संदिग्धों तक पहुंच बनाई और मंगलवार सुबह तक तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
आसिफ का पुलिस से पहले भी रहा संपर्क
जांच में सामने आया कि आरोपियों में शामिल आसिफ पहले पुलिस के लिए मुखबिर के रूप में काम कर चुका था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय बदमाशों से जुड़ी पुलिस की जानकारी में आसिफ का विवरण पहले से दर्ज था। इस पुराने संपर्क ने उसकी पहचान और लोकेशन ट्रेस करने में जांचकर्ताओं की मदद की। आसिफ को अमर कॉलोनी इलाके में पुलिस मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया था। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान उसके पैर में गोली लगी। बाकी दो आरोपियों की पहचान हेमंत और मुकेश के रूप में की गई है। तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
फोरेंसिक टीम ने जुटाए जैविक सबूत
इस मामले में अब फोरेंसिक जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है। पीड़िता पुलिस और फोरेंसिक टीम को उन स्थानों तक लेकर गई जहां उसके साथ कथित तौर पर वारदात हुई थी। इसके बाद रोहिणी की फॉरेंसिक साइंस लैब और जिला मोबाइल क्राइम टीम ने घटनास्थल की जांच की और कई नमूने जुटाए। इनमें जैविक सामग्री और एक इस्तेमाल किया हुआ कंडोम भी शामिल बताया गया है। इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी। DNA प्रोफाइलिंग से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि घटनास्थल से मिले जैविक सबूत आरोपियों से जुड़े हैं या नहीं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। इसलिए फिलहाल DNA जांच को जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, न कि पहले से स्थापित तथ्य।
आरोपियों पर सबूत मिटाने की कोशिश का भी आरोप
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि कथित वारदात के बाद दो आरोपियों ने अपने कपड़े धोए थे। पुलिस सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया कि हेमंत और मुकेश घर पहुंचने के बाद अपने कपड़े धोने लगे। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या ऐसा कथित तौर पर सबूत मिटाने के उद्देश्य से किया गया था। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन को भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले और बाद में आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क हुआ और उनके फोन से कोई प्रासंगिक डिजिटल सबूत मिलता है या नहीं।
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12 गवाहों के बयान दर्ज
मामले की जांच में पुलिस ने अब तक 12 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें पार्क के गार्ड, आसपास काम करने वाले लोग और अन्य संभावित गवाह शामिल हैं। पुलिस इन बयानों को कॉल डिटेल रिकॉर्ड और आसपास के सीसीटीवी फुटेज से मिलाकर देख रही है, ताकि घटना से जुड़े घटनाक्रम को वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से स्थापित किया जा सके। इस पूरे मामले में पुलिस के सामने अब मुख्य चुनौती उपलब्ध सभी सबूतों को आपस में जोड़कर अदालत के सामने मजबूत जांच पेश करने की है। पीड़िता का बयान, आरोपियों की पहचान, घटनास्थल से मिले फोरेंसिक नमूने, DNA जांच, मोबाइल डेटा, CCTV और गवाहों के बयान—इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। फिलहाल मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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