Oscar 2027 में ‘गोंधल’ की एंट्री पर विवाद, अनुराग कश्यप बोले- गलत फिल्मों का होता है चयन
Oscar 2027, ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुनी गई मराठी फिल्म 'गोंधल' इन दिनों चर्चा में है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने 18 सितंबर 2026 को संतोष दावखर के निर्देशन में बनी 'गोंधल' को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना था।
Oscar 2027 : अनुराग कश्यप ने नहीं देखी ‘गोंधल’, फिर ऑस्कर च्वॉइस पर उठाए सवाल, डायरेक्टर ने सुनाया जवाब
Oscar 2027, ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुनी गई मराठी फिल्म ‘गोंधल’ इन दिनों चर्चा में है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने 18 सितंबर 2026 को संतोष दावखर के निर्देशन में बनी ‘गोंधल’ को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना था। हालांकि, इस चयन के बाद फिल्ममेकर अनुराग कश्यप की एक टिप्पणी ने बहस को जन्म दे दिया है। कश्यप ने भारत की ऑस्कर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश अक्सर ऑस्कर के लिए गलत फिल्मों का चुनाव करता है। अब ‘गोंधल’ के डायरेक्टर संतोष दावखर ने इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

अनुराग कश्यप ने क्या कहा?
एक हालिया बातचीत में अनुराग कश्यप से सवाल किया गया कि भारत लंबे समय से ऑस्कर में अपनी जगह क्यों नहीं बना पा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि इसकी एक वजह यह है कि भारत अक्सर “गलत फिल्मों” का चयन करता है। उन्होंने ‘द लंचबॉक्स’ और ‘ऑल वी इमैजिन ऐज लाइट’ जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके मुताबिक ऐसी फिल्मों को ऑस्कर के लिए भेजे जाने का मौका गंवाया गया। कश्यप ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी ‘गोंधल’ नहीं देखी है। कश्यप की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि क्या भारत की ऑस्कर एंट्री के लिए चुनी गई फिल्म को लेकर राय बनाने से पहले उसे देखना जरूरी नहीं है। इसी संदर्भ में ‘गोंधल’ के निर्देशक संतोष दावखर ने सामने आकर अपनी बात रखी।
‘गोंधल’ के डायरेक्टर ने दिया जवाब
संतोष दावखर ने सोशल मीडिया पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि वह कश्यप और उनकी फिल्ममेकिंग का काफी सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि इस साल 26 अप्रैल को बेंगलुरु से मुंबई जाने वाली फ्लाइट में उनकी अनुराग कश्यप से मुलाकात हुई थी। उस दौरान उन्होंने कश्यप को ‘गोंधल’ के बारे में बताया था। दावखर के मुताबिक, कश्यप ने उस समय कहा था कि उन्होंने फिल्म के बारे में न तो सुना है और न ही उसे देखा है, लेकिन वह इसे जरूर देखेंगे। दावखर ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि फिल्म को लेकर कोई राय बनाने से पहले उसे देखा जाना चाहिए। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि वे पहले ‘गोंधल’ देखें और उसके बाद फिल्म की ऑस्कर एंट्री पर अपनी राय बनाएं। डायरेक्टर के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के एक नए फिल्ममेकर की बनाई यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर मराठी संस्कृति से जुड़ी कहानी होने के साथ-साथ ग्लोबल अपील रखने की कोशिश करती है।
‘अपने देश को निराश नहीं करेंगे’
संतोष दावखर ने अपनी प्रतिक्रिया में भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम इस जिम्मेदारी को समझती है और “अपने देश को निराश नहीं करेंगे।” उन्होंने दर्शकों से फिल्म की दोबारा रिलीज के दौरान सिनेमाघरों में इसे देखने और टीम का समर्थन करने की अपील भी की है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘गोंधल’ को लेकर ऑस्कर अभियान की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। फिल्म के मेकर्स अब इसे भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

33 फिल्मों में से चुनी गई ‘गोंधल’
‘गोंधल’ का चयन 33 भारतीय फिल्मों में से किया गया। इन फिल्मों में अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्में शामिल थीं। FFI की ज्यूरी ने फिल्मों पर विचार करने के बाद संतोष दावखर की फिल्म को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना। इस तरह फिल्म ने कई दूसरी चर्चित फिल्मों के बीच अपनी जगह बनाई। ‘गोंधल’ महाराष्ट्र की लोक परंपरा और सदियों पुराने गोंधल अनुष्ठान की पृष्ठभूमि पर आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र के माहौल में रिश्तों, महत्वाकांक्षा और छिपे हुए सच के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म को इससे पहले 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में भी पहचान मिल चुकी है, जहां संतोष दावखर को बेस्ट डायरेक्टर का सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड मिला था।
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अब ऑस्कर की आगे की राह पर नजर
भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद ‘गोंधल’ अब ऑस्कर की अगली प्रक्रिया में शामिल होगी। आधिकारिक एंट्री चुना जाना अंतिम ऑस्कर नामांकन की गारंटी नहीं है। फिल्म को आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार, स्क्रीनिंग और अभियान के दौर से गुजरना होगा। बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म की अंतिम रेस तक पहुंचने के लिए फिल्मों को अकादमी की आगे की चयन प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।इस बीच अनुराग कश्यप की टिप्पणी और संतोष दावखर के जवाब ने फिल्म को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। एक तरफ कश्यप ने भारत की ऑस्कर चयन प्रक्रिया पर अपनी राय रखी है और दूसरी तरफ ‘गोंधल’ के निर्देशक ने लोगों से फिल्म देखे बिना फैसला न सुनाने की अपील की है। अब यह देखना होगा कि ऑस्कर 2027 की आगे की प्रक्रिया में ‘गोंधल’ कितनी दूर तक पहुंच पाती है।
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