Nepal Flood: बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही, भारत से मांगा पुनर्निर्माण में सहयोग; 2015 की मदद का जिक्र
Nepal Flood, नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती सामने है। बोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में आई इस आपदा ने घरों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।
Nepal Flood : 2015 में भूकंप के बाद भारत ने दिया था साथ, अब बाढ़ के बाद नेपाल ने फिर मांगी मदद
Nepal Flood, नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती सामने है। बोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में आई इस आपदा ने घरों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे मुश्किल समय में नेपाल ने भारत से पुनर्निर्माण के लिए सहयोग मांगा है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने नई दिल्ली में भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान बाढ़ से तबाह संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में भारत से महत्वपूर्ण सहायता की मांग की।
नेपाल ने भारत से मांगी बड़ी सहायता
स्वर्णिम वाग्ले अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान भारत पहुंचे हैं। 18 सितंबर को उन्होंने निर्मला सीतारमण के साथ बैठक की, जिसमें बाढ़ के बाद नेपाल की स्थिति और पुनर्निर्माण की जरूरतों पर चर्चा हुई। नेपाल ने भारत से किसी निश्चित रकम की मांग नहीं रखी, बल्कि बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन के बाद जरूरत के मुताबिक सहायता की उम्मीद जताई है। भारतीय वित्त मंत्री ने भी नेपाल की जरूरतों का विस्तृत Post-Disaster Needs Assessment यानी आपदा के बाद जरूरतों के आकलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत की सहायता की मात्रा पर फैसला लेने की बात कही।नेपाल के वित्त मंत्री ने भारत के साथ अपने देश के पुराने आपदा सहयोग का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल का साथ दिया था, उसी तरह इस बार भी नेपाल भारत से सहयोग की उम्मीद कर रहा है।
2015 में भारत ने दिया था 1 अरब डॉलर का वादा
नेपाल के लिए 2015 का भूकंप एक बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी था। उस समय भारत ने पुनर्निर्माण के लिए करीब 1 अरब डॉलर की सहायता देने का वादा किया था। इसमें 25 प्रतिशत राशि अनुदान और 75 प्रतिशत रियायती ऋण के रूप में थी। नेपाल अब उसी पुराने सहयोग को मौजूदा संकट के संदर्भ में याद कर रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में भारत की ओर से घोषित रियायती ऋण का एक बड़ा हिस्सा अभी तक इस्तेमाल नहीं हो पाया है। नेपाल अब उस राशि के इस्तेमाल को ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं की तरफ मोड़ने की संभावना पर भी भारत से बातचीत कर रहा है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा होने की उम्मीद है।
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को पहुंचाया भारी नुकसान
26 अगस्त की आपदा ने नेपाल के कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। बोटेकोशी नदी क्षेत्र में बाढ़ और मलबे ने कई बस्तियों को नुकसान पहुंचाया। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट गया और पुल बह गए। जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी क्षति हुई है। नेपाल की अर्थव्यवस्था में हाइड्रोपावर की अहम भूमिका होने के कारण बिजली क्षेत्र को हुआ नुकसान विशेष चिंता का विषय है।19 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल सरकार के वित्त मंत्री ने बताया कि आपदा में कम से कम 1,403 लोगों की मौत हुई है और करीब 6,150 लोग लापता हैं। प्रारंभिक सरकारी आकलन में कुल नुकसान और आर्थिक क्षति करीब 408 अरब नेपाली रुपये बताई गई है। वहीं एक अन्य प्रारंभिक आकलन में भौतिक नुकसान लगभग 2 अरब डॉलर और आर्थिक नुकसान करीब 1 अरब डॉलर बताया गया है।नेपाल सरकार का कहना है कि बेहतर और अधिक मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ पुनर्निर्माण करने पर कुल लागत 4.5 से 5 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। इसलिए नेपाल सिर्फ तत्काल राहत नहीं, बल्कि लंबे समय के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने की कोशिश कर रहा है।
नेपाल का आधिकारिक आकलन क्या कहता है?
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती Rapid Damage and Needs Assessment में आपदा से लगभग 1.8 अरब डॉलर का नुकसान और करीब 883 मिलियन डॉलर की आर्थिक क्षति का अनुमान लगाया गया है। वहीं पुनर्निर्माण की कुल जरूरत लगभग 4.78 अरब डॉलर आंकी गई है। इसमें अगले छह महीनों के लिए करीब 57.67 मिलियन डॉलर की तत्काल रिकवरी और लंबे समय के पुनर्निर्माण के लिए करीब 4.71 अरब डॉलर की जरूरत बताई गई है।हालांकि नेपाल सरकार अभी विस्तृत Post-Disaster Needs Assessment कर रही है। इसके पूरा होने के बाद पुनर्निर्माण की वास्तविक जरूरत और प्राथमिकताएं अधिक स्पष्ट होंगी। इसके बाद नेपाल दाता सम्मेलन आयोजित करने या अलग-अलग देशों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अन्य सहयोगी संगठनों से सीधे सहायता मांगने की योजना बना रहा है।
भारत ने राहत के बाद बिजली के मोर्चे पर भी मदद की
बाढ़ के बाद नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी बड़ा असर पड़ा। कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान होने से बिजली उत्पादन और निर्यात प्रभावित हुआ। इसके बाद भारत ने नेपाल की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद के लिए बिजली निर्यात की अनुमति दी। भारत ने 31 दिसंबर 2026 तक रोजाना 18 घंटे के लिए 654 मेगावाट तक बिजली नेपाल को निर्यात करने की मंजूरी दी है।यह फैसला दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण है। नेपाल में हाइड्रोपावर बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत है और बाढ़ से इस क्षेत्र को नुकसान पहुंचने के कारण देश को घरेलू बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत से आयात का सहारा लेना पड़ा है।
भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने पर जोर
वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले की भारत यात्रा केवल बाढ़ पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और ट्रांजिट जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। वाग्ले ने भारतीय कारोबारी समुदाय के साथ बैठक में नेपाल में भारतीय निवेश बढ़ाने की अपील करने की योजना भी रखी है।नेपाल इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहायता जुटाने की कोशिश कर रहा है। वित्त मंत्री आने वाले दिनों में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक, IMF और विश्व बैंक से जुड़े मंचों पर नेपाल की आपदा और पुनर्निर्माण की जरूरतों को उठाने वाले हैं। नेपाल का जोर इस बात पर भी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रहे जोखिमों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय गंभीरता से ले।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल भारत ने नेपाल की सहायता के लिए सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन अंतिम वित्तीय सहायता कितनी होगी, इसका फैसला विस्तृत नुकसान और जरूरतों के आकलन के बाद किया जाएगा। नेपाल के लिए प्राथमिकता प्रभावित लोगों का पुनर्वास, सड़क और पुलों की बहाली, ऊर्जा परियोजनाओं का पुनर्निर्माण और भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करना है।2015 के भूकंप के बाद भारत और नेपाल के बीच हुआ पुनर्निर्माण सहयोग इस बार भी संदर्भ में है। अब नेपाल की नजर भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिलने वाली सहायता पर है, ताकि बाढ़ से तबाह इलाकों को फिर से बसाया जा सके और भविष्य में ऐसी आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए अधिक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सके।
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