MDH Garam Masala और Kitchen King को लेकर चौंकाने वाला दावा, FSSAI लिमिट से ज्यादा मिले पेस्टिसाइड्स
MDH Garam Masala, भारतीय रसोई में मसालों का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, लेकिन अब मसालों की क्वालिटी और उनमें मौजूद पेस्टिसाइड्स को लेकर एक नई रिपोर्ट चर्चा में है।
MDH Garam Masala में 5, Kitchen King में 3 पेस्टिसाइड्स! जानें क्या कहती है लैब टेस्टिंग रिपोर्ट
MDH Garam Masala, भारतीय रसोई में मसालों का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, लेकिन अब मसालों की क्वालिटी और उनमें मौजूद पेस्टिसाइड्स को लेकर एक नई रिपोर्ट चर्चा में है। मशहूर मसाला ब्रांड MDH के गरम मसाला और किचन किंग मसाले के कुछ सैंपल्स की स्वतंत्र लैब में जांच कराए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, MDH Garam Masala के टेस्ट किए गए सैंपल में पांच पेस्टिसाइड्स और MDH Kitchen King में तीन पेस्टिसाइड्स FSSAI की निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। यह दावा फिटनेस इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर दीपक ठकरान की ओर से सामने आया है, जिन्होंने इन उत्पादों की लैब टेस्टिंग कराने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की।

28 हजार रुपये खर्च कर कराई गई टेस्टिंग
रिपोर्ट के अनुसार दीपक ठकरान ने MDH के दोनों मसालों के सैंपल्स की जांच के लिए करीब 28,000 रुपये खर्च किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए टेस्टिंग के नतीजे साझा किए और कंपनी से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य पैसे वापस लेना नहीं, बल्कि यह समझना है कि जिन सैंपल्स की जांच की गई, उनमें सुरक्षा मानकों से अधिक पेस्टिसाइड्स कैसे पाए गए।यहां यह समझना जरूरी है कि सामने आई जानकारी विशिष्ट सैंपल्स की स्वतंत्र लैब जांच के दावे पर आधारित है। इसका मतलब यह नहीं है कि MDH के हर पैकेट या हर बैच में यही मात्रा पाई गई है। खुद रिपोर्ट में भी इस टेस्टिंग को खास बैच के सैंपल्स से जुड़ा बताया गया है।
MDH Garam Masala में क्या मिला?
रिपोर्ट के मुताबिक, MDH Garam Masala के जिस सैंपल को टेस्ट किया गया, उसमें पांच पेस्टिसाइड्स की मात्रा कथित तौर पर FSSAI की निर्धारित सीमा से ऊपर पाई गई। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में इन पांचों पेस्टिसाइड्स के नाम और उनकी सटीक मात्रा विस्तार से सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए बिना आधिकारिक टेस्ट रिपोर्ट के किसी विशेष रसायन का नाम या मात्रा बताना उचित नहीं होगा।खाद्य पदार्थों में पेस्टिसाइड अवशेषों के लिए नियामकीय सीमाएं इसलिए निर्धारित की जाती हैं ताकि भोजन के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले अवशेषों को नियंत्रित किया जा सके। किसी लैब टेस्ट में सीमा से अधिक अवशेष मिलना जांच का विषय हो सकता है, लेकिन इसका वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम पदार्थ, उसकी मात्रा, सेवन की अवधि और व्यक्ति की कुल एक्सपोजर पर निर्भर करता है।
Kitchen King में तीन पेस्टिसाइड्स का दावा
MDH Kitchen King के मामले में भी इसी स्वतंत्र टेस्टिंग रिपोर्ट में तीन पेस्टिसाइड्स के कथित तौर पर FSSAI सीमा से अधिक पाए जाने की बात कही गई है। यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह निष्कर्ष एक विशेष सैंपल की जांच से जुड़ा है। इसे कंपनी के सभी Kitchen King उत्पादों पर लागू नहीं किया जा सकता।लैब टेस्टिंग में किसी उत्पाद में अवशेष पाए जाने के बाद सबसे अहम सवाल होता है कि सैंपल किस बैच का था, वह कहां से खरीदा गया था, जांच किस मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में हुई और इस्तेमाल की गई टेस्टिंग पद्धति क्या थी। इन सभी जानकारियों से रिपोर्ट के निष्कर्षों को समझने में मदद मिलती है।
FSSAI की भूमिका क्या है?
Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) देश में खाद्य सुरक्षा और मानकों से जुड़ा प्रमुख नियामक है। खाद्य उत्पादों में पेस्टिसाइड अवशेषों सहित कई तरह के मानकों के लिए निर्धारित सीमाएं लागू होती हैं। यदि किसी उत्पाद के सरकारी सैंपल में नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित अधिकारी नियमों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।हालांकि इस ताजा मामले में उपलब्ध रिपोर्ट स्वतंत्र लैब टेस्ट और सोशल मीडिया पर साझा किए गए निष्कर्षों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि FSSAI ने MDH के इन दोनों उत्पादों को आधिकारिक रूप से असुरक्षित घोषित कर दिया है। इसके लिए FSSAI या किसी संबंधित सरकारी खाद्य सुरक्षा विभाग की आधिकारिक जांच या आदेश की जानकारी जरूरी होगी।
पहले भी मसालों की क्वालिटी को लेकर उठे हैं सवाल
मसालों में पेस्टिसाइड और अन्य रासायनिक अवशेषों को लेकर पहले भी भारत और विदेशों में जांच और विवाद सामने आते रहे हैं। 2024 में MDH और Everest के कुछ मसाला उत्पादों को लेकर हांगकांग और सिंगापुर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने ethylene oxide की मौजूदगी पर कार्रवाई की थी। इसके बाद भारत में भी FSSAI ने MDH और Everest के उत्पादों के सैंपल की जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की थी।हालांकि 2024 की ये घटनाएं और 2026 की मौजूदा स्वतंत्र लैब टेस्टिंग अलग-अलग मामले हैं। इन्हें एक ही टेस्ट या एक ही बैच का परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।
उपभोक्ताओं को क्या ध्यान रखना चाहिए?
इस तरह की खबर सामने आने के बाद उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे घबराने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें। अगर किसी खास बैच के बारे में सरकारी रिकॉल या चेतावनी जारी होती है, तो पैकेट पर लिखे batch number, manufacturing date और expiry date को जरूर जांचना चाहिए।साथ ही केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी पूरे ब्रांड या उसके सभी उत्पादों को असुरक्षित मान लेना भी सही नहीं है। स्वतंत्र लैब रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन उसकी पूरी टेस्ट रिपोर्ट, सैंपल की जानकारी और नियामकीय जांच के निष्कर्ष सामने आने पर तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी।
कंपनी से स्पष्टीकरण का इंतजार
फिलहाल सामने आई रिपोर्ट में MDH Garam Masala और Kitchen King के कुछ सैंपल्स को लेकर पेस्टिसाइड्स की मात्रा पर सवाल उठाए गए हैं। दीपक ठकरान ने कंपनी से इस बारे में स्पष्टता मांगी है और नए तथा ताजा बैचों की दोबारा जांच कराने का सवाल भी उठाया है।ऐसे में आगे की तस्वीर MDH की प्रतिक्रिया और यदि कोई आधिकारिक सरकारी जांच होती है, उसके परिणाम से साफ हो सकती है। तब तक इस मामले को विशिष्ट सैंपल्स की स्वतंत्र लैब टेस्टिंग के दावे के रूप में देखना अधिक सटीक होगा, न कि MDH के सभी मसालों के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष के रूप में।
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