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Mamata Banerjee: ममता बनर्जी की TMC पर EC का बड़ा एक्शन, नाम और निशान को लेकर सामने आए 3 नए विकल्प

Mamata Banerjee, पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।

Mamata Banerjee : TMC का नाम और निशान बदलने की तैयारी? चुनाव आयोग के आदेश के बाद ममता गुट ने दिए 3 विकल्प

Mamata Banerjee, पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अंतरिम आदेश में दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों में ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Flowers and Grass’ यानी जोड़ा फूल-घास वाले पारंपरिक चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आयोग को तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्हों के विकल्प सौंपे हैं। हालांकि, यह बदलाव फिलहाल स्थायी नहीं है और अंतिम फैसला आने तक अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।

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चुनाव आयोग ने क्यों लिया यह फैसला?

चुनाव आयोग के सामने तृणमूल कांग्रेस के संगठन और पार्टी की पहचान को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी दावे सामने आए हैं। एक पक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरा गुट पार्टी के भीतर हुए विभाजन के बाद अलग दावेदारी कर रहा है। आयोग ने कहा कि दोनों पक्ष खुद को वास्तविक पार्टी के रूप में पेश कर रहे हैं, इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय के लिए विस्तृत प्रक्रिया की जरूरत है। आयोग ने Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत इस विवाद के अंतिम निपटारे की प्रक्रिया का उल्लेख किया है। चूंकि आने वाले उपचुनावों के लिए समय कम है, इसलिए आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की है।

ममता गुट ने क्या किया?

आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और साथ ही आयोग द्वारा मांगे गए वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह भी भेजे। रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी की ओर से यह जवाब गुरुवार रात करीब 11:36 बजे आयोग को भेजा गया। यह जवाब ‘strongest protest’ के साथ दिया गया था। ममता गुट की ओर से तीन नाम और तीन प्रतीकों के विकल्प मांगे गए थे। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में ममता गुट द्वारा भेजे गए तीनों नाम और तीनों प्रतीकों की पूरी सूची स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए सोशल मीडिया या अपुष्ट रिपोर्टों में सामने आ रहे नामों को आधिकारिक विकल्प मानना उचित नहीं होगा। आयोग अब इन विकल्पों में से एक नाम और एक चुनाव चिन्ह को उपचुनाव के लिए मंजूरी देगा।

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दूसरे गुट ने भी भेजे तीन नाम और चिन्ह

दूसरी ओर, रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी चुनाव आयोग को तीन नाम और तीन चुनाव चिन्हों के विकल्प भेजे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस गुट ने नामों के तौर पर Nationalist Trinamool Congress, Democratic Trinamool Congress और West Bengal Trinamool Congress का प्रस्ताव दिया है। चुनाव चिन्हों के लिए ब्लैकबोर्ड, लिफाफा और मशाल विकल्प के तौर पर दिए गए हैं। इन विकल्पों में से कौन सा नाम और कौन सा चिन्ह आयोग मंजूर करता है, यह आयोग के अगले फैसले पर निर्भर करेगा। दोनों गुटों को तीन-तीन विकल्प प्राथमिकता क्रम में देने को कहा गया था।

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क्या TMC का नाम और चुनाव चिन्ह हमेशा के लिए बदल गया?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी TMC का नाम और चुनाव चिन्ह स्थायी रूप से नहीं बदला है। चुनाव आयोग का मौजूदा फैसला एक अंतरिम व्यवस्था है, जिसे आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। आयोग बाद में दोनों पक्षों के दावों, दस्तावेजों और संगठनात्मक समर्थन की जांच करके पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम फैसला करेगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि ममता बनर्जी की पार्टी का स्थायी नाम या चुनाव चिन्ह बदल गया है। मौजूदा स्थिति केवल आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिए लागू अंतरिम व्यवस्था है।

6 अक्टूबर को होने वाले हैं उपचुनाव

यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने हैं। दोनों गुट इन चुनावों में अपनी राजनीतिक पहचान के साथ मैदान में उतरना चाहते हैं। ऐसे में चुनाव आयोग के नाम और चिन्ह संबंधी फैसले का सीधा असर उम्मीदवारों के नामांकन और EVM पर दिखाई देने वाली पहचान पर पड़ेगा। आयोग ने दोनों पक्षों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह देने का फैसला इसलिए किया है ताकि आगामी उपचुनाव में मतदाताओं के सामने दोनों गुटों की अलग पहचान हो और पार्टी की आधिकारिक पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति न बने। आयोग ने अपने अंतरिम कदम को दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की प्रक्रिया के तौर पर बताया है।

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ममता गुट ने आदेश पर जताई आपत्ति

चुनाव आयोग के आदेश पर ममता बनर्जी के खेमे की ओर से आपत्ति दर्ज की गई है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने आयोग के आदेश को कानून के अनुरूप नहीं बताया और कहा कि पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती, जबकि दूसरी तरफ विरोधी गुट ने अंतरिम व्यवस्था का पालन करने की बात कही है। ये दोनों संबंधित पक्षों के राजनीतिक और कानूनी रुख हैं; आयोग की अंतिम व्यवस्था अभी बाकी है। इस तरह फिलहाल TMC के सामने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर अस्थायी बदलाव की स्थिति है। ममता बनर्जी के गुट ने तीन विकल्प आयोग को सौंप दिए हैं, लेकिन उनमें से कौन सा नाम और चिन्ह मंजूर होगा, यह चुनाव आयोग तय करेगा। वहीं, पार्टी के मूल नाम All India Trinamool Congress और पारंपरिक Flowers and Grass चिन्ह पर अंतिम फैसला अभी लंबित है। इसलिए इसे स्थायी बदलाव के बजाय आगामी उपचुनावों तक की अंतरिम चुनावी व्यवस्था के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।

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