Sleep Improvement Tips: Overthinking और तनाव को कहें Bye! रात में सोने से पहले करें ये 3 प्राणायाम
Sleep Improvement Tips, आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, रिश्तों से जुड़ी चिंताएं, भविष्य की टेंशन और दिनभर की भागदौड़ का असर रात को भी दिमाग पर बना रहता है। कई लोगों के लिए बिस्तर पर जाने के बाद शरीर तो आराम करना चाहता है, लेकिन दिमाग लगातार सोचता रहता है।
Sleep Improvement Tips : दिनभर का Stress भूलकर चैन से सोना है तो रात में करें ये 3 आसान प्राणायाम
Sleep Improvement Tips, आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, रिश्तों से जुड़ी चिंताएं, भविष्य की टेंशन और दिनभर की भागदौड़ का असर रात को भी दिमाग पर बना रहता है। कई लोगों के लिए बिस्तर पर जाने के बाद शरीर तो आराम करना चाहता है, लेकिन दिमाग लगातार सोचता रहता है। बार-बार एक ही बात के बारे में सोचना, आने वाले दिन की चिंता करना और छोटी-छोटी बातों को लेकर परेशान रहना ओवरथिंकिंग का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में नींद आने में भी समय लग सकता है। योग और प्राणायाम को तनाव कम करने और शरीर को रिलैक्स करने वाली दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। अगर रात में सोने से पहले कुछ मिनट शांत वातावरण में सांसों पर ध्यान दिया जाए, तो मन को शांत करने में मदद मिल सकती है। यहां हम ऐसे ही 3 आसान प्राणायाम के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें रात में सोने से पहले अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
1. नाड़ी शोधन प्राणायाम
नाड़ी शोधन को आमतौर पर Alternate Nostril Breathing भी कहा जाता है। इसमें एक नाक से सांस लेकर दूसरी नाक से सांस छोड़ी जाती है। यह प्राणायाम सांसों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है और सोने से पहले मन को शांत करने वाली रिलैक्सेशन रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है।इसे करने के लिए सबसे पहले आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। कमर और गर्दन को सीधा रखें। आंखें बंद करके कुछ सामान्य सांस लें। अब दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस लें। इसके बाद अनामिका उंगली से बाईं नासिका बंद करके दाईं नासिका से सांस छोड़ें। अब दाईं नासिका से सांस लें और बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।शुरुआत में इसे 5 मिनट तक आराम से किया जा सकता है। सांस को जबरदस्ती रोकने या बहुत तेज सांस लेने से बचें।
2. भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम को करते समय मधुमक्खी जैसी हल्की गूंज वाली आवाज निकाली जाती है। इसे योग में मन को शांत करने वाली सांस संबंधी तकनीकों में शामिल किया जाता है। दिनभर की व्यस्तता के बाद रात में कुछ मिनट भ्रामरी करने से ध्यान सांस और आवाज पर केंद्रित हो सकता है।इसे करने के लिए आराम से बैठें और आंखें बंद कर लें। गहरी सांस लें। अब सांस छोड़ते समय मुंह बंद रखते हुए “म्म…” जैसी धीमी गूंज पैदा करें। आवाज को सहज रखें और गले पर जोर न डालें। पूरी प्रक्रिया के दौरान अपना ध्यान सांस और कंपन की अनुभूति पर रखें।शुरुआत में 5 से 7 बार भ्रामरी करना पर्याप्त हो सकता है। इसे सोने से पहले शांत वातावरण में करना ज्यादा आरामदायक रहता है।
3. डायफ्रामैटिक ब्रीदिंग
इसे आम भाषा में बेली ब्रीदिंग या पेट से सांस लेना भी कहा जाता है। यह पारंपरिक प्राणायाम की बजाय एक सरल रिलैक्सेशन ब्रीदिंग तकनीक है, जिसे सोने से पहले आसानी से किया जा सकता है। इसमें सांस लेते समय पेट धीरे-धीरे ऊपर उठता है और सांस छोड़ते समय नीचे आता है।इसे करने के लिए पीठ के बल आराम से लेट जाएं या आरामदायक स्थिति में बैठें। एक हाथ पेट पर और दूसरा छाती पर रखें। अब नाक से धीरे-धीरे सांस लें और कोशिश करें कि पेट वाला हाथ ऊपर उठे। इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ें और पेट को सामान्य स्थिति में आने दें।इसे 5 से 10 मिनट तक बिना किसी जल्दबाजी के किया जा सकता है। इस दौरान मोबाइल फोन दूर रखें और कमरे की रोशनी हल्की रखना भी रिलैक्स होने में मदद कर सकता है।
प्राणायाम करते समय इन बातों का रखें ध्यान
रात में प्राणायाम करने का उद्देश्य शरीर को शांत करना होना चाहिए, इसलिए बहुत तेज गति से सांस लेने या लंबे समय तक सांस रोकने की कोशिश न करें। शुरुआत हमेशा कम समय से करें और अपनी सहज क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं।अगर किसी प्राणायाम को करते समय चक्कर, सांस फूलना, सीने में दर्द या असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं। सांस को रोकने वाली तकनीकों में विशेष सावधानी जरूरी है, खासकर यदि किसी व्यक्ति को सांस, हृदय या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है।गर्भावस्था या किसी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में नया प्राणायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
सिर्फ प्राणायाम ही नहीं, नींद की आदतें भी जरूरी
अगर रात में लगातार ओवरथिंकिंग होती है, तो केवल प्राणायाम पर निर्भर रहने के बजाय पूरी स्लीप रूटीन पर ध्यान देना जरूरी है। सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखने की कोशिश करें। सोने से पहले फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें। कैफीन वाले पेय पदार्थों को देर शाम लेने से बचें और रात में बहुत भारी भोजन न करें।अगर दिमाग में बहुत सारे विचार चल रहे हों तो सोने से पहले अगले दिन के जरूरी काम कागज पर लिख देना भी मददगार हो सकता है। इससे बार-बार उन्हीं चीजों के बारे में सोचने की जरूरत कम महसूस हो सकती है।
Read More: अब पैकेट देखकर ही पता चलेगा कितना Sugar-Salt-Fat! Warning Label पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
कब लेनी चाहिए विशेषज्ञ की मदद?
कभी-कभार तनाव या ज्यादा सोचने की समस्या होना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर लगातार कई हफ्तों तक नींद खराब रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं या चिंता इतनी बढ़ जाती है कि उसे संभालना मुश्किल लगने लगे, तो इसे सिर्फ सामान्य ओवरथिंकिंग मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।कुल मिलाकर, नाड़ी शोधन, भ्रामरी और डायफ्रामैटिक ब्रीदिंग को रात की शांत दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इनका उद्देश्य दिमाग को जबरदस्ती विचारों से खाली करना नहीं, बल्कि सांस पर ध्यान केंद्रित करके शरीर और मन को आराम की स्थिति में लाना है। नियमित नींद, संतुलित दिनचर्या और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह के साथ ये तकनीकें बेहतर रिलैक्सेशन रूटीन का हिस्सा बन सकती हैं।
We’re now on WhatsApp. Click to join.
अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com.







