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MS Dhoni defamation case: धोनी के ₹100 करोड़ मानहानि केस में नया मोड़, रिटायर्ड IPS ने की कोर्ट की निगरानी में बयान दर्ज कराने की मांग

MS Dhoni defamation case, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से जुड़े करीब 12 साल पुराने ₹100 करोड़ के मानहानि मामले में एक बार फिर बड़ा अपडेट सामने आया है।

MS Dhoni defamation case : ₹100 करोड़ के मानहानि केस में धोनी की गवाही पर घमासान, रिटायर्ड IPS ने रखी बड़ी मांग

MS Dhoni defamation case, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से जुड़े करीब 12 साल पुराने ₹100 करोड़ के मानहानि मामले में एक बार फिर बड़ा अपडेट सामने आया है। 2013 के IPL सट्टेबाजी विवाद से जुड़े इस मामले में रिटायर्ड IPS अधिकारी जी. संपत कुमार ने धोनी के बयान को रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया को लेकर मद्रास हाईकोर्ट के सामने कई मांगें रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि धोनी का बयान रिकॉर्ड करते समय एक न्यायिक अधिकारी निगरानी करे और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए।मद्रास हाईकोर्ट ने फिलहाल संपत कुमार की तीन अर्जियों को नंबर देने और सुनवाई के लिए आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने धोनी के खिलाफ कोई फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अर्जियों पर आगे सुनवाई के दौरान धोनी को अपना जवाब दाखिल करने का पूरा अवसर मिलेगा।

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क्या है एमएस धोनी का ₹100 करोड़ मानहानि केस?

यह पूरा मामला साल 2013 के IPL सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा है। उस समय भारतीय क्रिकेट और IPL में सट्टेबाजी तथा कथित मैच फिक्सिंग के आरोपों को लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी दौरान धोनी का नाम भी कुछ बयानों और मीडिया रिपोर्टों में इस विवाद से जोड़ा गया था।धोनी ने इन आरोपों को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए वर्ष 2014 में ₹100 करोड़ के हर्जाने का मानहानि मुकदमा दायर किया था। मामले में रिटायर्ड IPS अधिकारी जी. संपत कुमार के अलावा कुछ मीडिया संस्थाओं और पत्रकारों को भी पक्षकार बनाया गया था।धोनी का पक्ष रहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और उन्हें सट्टेबाजी विवाद से जोड़ने वाली टिप्पणियों से उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। वहीं, संपत कुमार की ओर से मामले में अलग कानूनी दलीलें पेश की गई हैं।

अब धोनी का बयान क्यों महत्वपूर्ण है?

मामला अब सबूत और बयान दर्ज करने के चरण में पहुंच चुका है। अगस्त 2025 में मद्रास हाईकोर्ट ने ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था और धोनी का बयान रिकॉर्ड करने के लिए एडवोकेट जी. जयश्री को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया गया था।अब संपत कुमार चाहते हैं कि धोनी का बयान जिस तरीके से रिकॉर्ड किया जाए, उसमें पारदर्शिता बनी रहे। इसी वजह से उन्होंने न्यायिक अधिकारी की निगरानी और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की है।

रिटायर्ड IPS की तीन बड़ी मांगें क्या हैं?

संपत कुमार की ओर से दाखिल अर्जियों में मुख्य तौर पर तीन मांगें रखी गई हैं।पहली मांग: धोनी के बयान को रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए अदालत एक न्यायिक अधिकारी नियुक्त करे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बयान दर्ज करने की प्रक्रिया अदालत की निगरानी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो।दूसरी मांग: धोनी के बयान की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। साथ ही बिना किसी एडिट के रिकॉर्डिंग की कॉपी संपत कुमार और अदालत द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी को उपलब्ध कराई जाए। तीसरी मांग: धोनी का बयान किसी निजी स्थान या फाइव स्टार होटल में रिकॉर्ड न किया जाए। इसके बजाय इसे कोर्ट परिसर या किसी सरकारी भवन में रिकॉर्ड करने की व्यवस्था की जाए।

‘फाइव स्टार होटल में क्यों हो बयान?’

संपत कुमार की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि केवल इसलिए कि धोनी एक बड़े क्रिकेट स्टार हैं, उनका बयान किसी आलीशान होटल या निजी बंगले में रिकॉर्ड नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और औपचारिकता बनाए रखना जरूरी है। यही वजह है कि उन्होंने बयान की रिकॉर्डिंग के लिए कोर्ट परिसर या सरकारी भवन को प्राथमिकता देने की मांग की है।हालांकि, इस मुद्दे का एक दूसरा पहलू भी है। पिछले साल मामले में डिवीजन बेंच ने माना था कि धोनी की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए हाईकोर्ट परिसर में उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति से काफी अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं। इसी आधार पर एडवोकेट कमिश्नर के जरिए उनका बयान किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर दर्ज कराने के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया गया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस के. गोविंदराजन थिलकावती ने संपत कुमार की अर्जियों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है। उनके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए दलील दी कि इन अर्जियों पर सुनवाई की जा सकती है। अदालत ने उस आदेश की जांच के बाद अर्जियों को नंबर देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अर्जियां नंबर होने के बाद एमएस धोनी को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का मौका मिलेगा। यानी फिलहाल यह केवल प्रक्रिया से जुड़ा आदेश है और अदालत ने संपत कुमार की सभी मांगों को अंतिम रूप से स्वीकार करके धोनी के खिलाफ कोई निर्णय नहीं दिया है।

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पहले भी सामने आया था CD का मामला

इस केस में पुराने टीवी डिबेट और अन्य सामग्री से जुड़े CD रिकॉर्ड भी सबूत का हिस्सा हैं। फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इन CD की सामग्री के ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद से जुड़े खर्च के लिए धोनी को ₹10 लाख जमा करने का निर्देश दिया था। अदालत के सामने यह भी कहा गया था कि सामग्री का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद काफी बड़ा काम है। इससे पता चलता है कि मामले में पुराने रिकॉर्ड और मीडिया सामग्री की जांच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

संपत कुमार की क्या दलील है?

संपत कुमार का कहना है कि वह उस समय IPL विवाद की जांच से जुड़े अधिकारी थे और उन्होंने अपनी आधिकारिक भूमिका में कुछ बयान दिए थे। उनकी ओर से यह तर्क भी दिया गया है कि उन्हें उन बयानों के लिए मानहानि का जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, जो उन्होंने कथित तौर पर जांच अधिकारी के रूप में दिए थे। दूसरी ओर, धोनी की ओर से दायर मानहानि मुकदमे का मूल आधार यह है कि उनके नाम को IPL सट्टेबाजी विवाद से जोड़ने वाली टिप्पणियों से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

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12 साल पुराना मामला अब निर्णायक दौर में

2014 में शुरू हुआ यह मुकदमा लंबे समय तक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा रहा। अब ट्रायल शुरू हो चुका है और धोनी के बयान की रिकॉर्डिंग अगला महत्वपूर्ण चरण बन गई है। अगस्त 2025 में ट्रायल शुरू करने का आदेश दिए जाने के बाद मामला अब सबूतों की तरफ आगे बढ़ रहा है। संपत कुमार की नई अर्जियां इसी प्रक्रिया को लेकर हैं। अगर अदालत उनकी मांगों को अंतिम रूप से मंजूरी देती है, तो धोनी के बयान की रिकॉर्डिंग न्यायिक अधिकारी की निगरानी और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ हो सकती है।अब इस मामले में अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। धोनी को संपत कुमार की अर्जियों पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि बयान की रिकॉर्डिंग किस तरीके से और किस स्थान पर होगी।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ₹100 करोड़ का यह मानहानि केस एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और अब एमएस धोनी का बयान मामले की सबसे अहम कड़ियों में से एक बन सकता है। रिटायर्ड IPS अधिकारी की मांगों ने बयान रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया को लेकर नई कानूनी बहस जरूर शुरू कर दी है।

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