Nepal: नेपाल में क्यों मची इतनी भीषण तबाही? ISRO की Satellite Images में दिखा ग्लेशियर टूटने का पूरा सच
Nepal, नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। कुछ ही दिनों में इस प्राकृतिक आपदा ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। शुरुआती रिपोर्टों में जहां 165 लोगों की मौत और करीब 1,500 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी,
Nepal : एक झटके में उजड़ गया नेपाल! ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में कैद हुआ तबाही का खौफनाक मंजर
Nepal, नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। कुछ ही दिनों में इस प्राकृतिक आपदा ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। शुरुआती रिपोर्टों में जहां 165 लोगों की मौत और करीब 1,500 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी, वहीं 29 अगस्त तक मृतकों और लापता लोगों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में संयुक्त रूप से 500 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
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ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद आई विनाशकारी बाढ़
इस आपदा की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई एक बड़ी भूगर्भीय घटना के बाद हुई। शुरुआती जांच के मुताबिक ग्लेशियर के टूटने या बर्फ, चट्टान और मलबे के बड़े पैमाने पर खिसकने से नदी घाटी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। इससे भोटेकोशी नदी और आसपास के इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई।पानी का बहाव इतना तेज था कि रास्ते में आने वाली सड़कें, पुल, इमारतें और दूसरी आधारभूत संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया। बाढ़ के साथ आए पत्थर, कीचड़ और मलबे ने हालात को और गंभीर बना दिया।
शुरुआती आंकड़ों में 165 मौतें और करीब 1,500 लापता
बाढ़ के शुरुआती घंटों में नेपाल में 165 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और करीब 1,500 लोगों के लापता होने की खबर सामने आई थी। इनमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, विदेशी पर्यटक, श्रमिक और तीर्थयात्री शामिल थे। इसी दौरान करीब 300 भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई थी।27 अगस्त की रिपोर्टों में बताया गया था कि करीब 300 भारतीयों के लापता होने की आशंका है। बाद में भारतीय नागरिकों को लेकर आंकड़ों में भी बदलाव हुआ और अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग बताई गई। 28 अगस्त की रिपोर्टों के अनुसार करीब 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें बिजली परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए।
अब 500 से ज्यादा लोगों की मौत
बाढ़ और भूस्खलन के बाद लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। 29 अगस्त तक सामने आई रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या 500 के पार पहुंच चुकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में 579 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पांच मौतें दर्ज की गई हैं। दोनों क्षेत्रों में लापता लोगों की संख्या भी हजारों के करीब पहुंच गई है।हालांकि अलग-अलग एजेंसियों और प्रशासनिक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों में अंतर है। इसकी बड़ी वजह यह है कि कई दुर्गम इलाकों में अभी तक राहत दल पहुंच नहीं पाए हैं और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। इसलिए आने वाले दिनों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में और बदलाव की आशंका बनी हुई है।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी शामिल हैं। रासुवा जिले में स्थित अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के आसपास बड़ी संख्या में लोगों के मलबे और सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।बचाव दल भारी मशीनरी, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य उपकरणों की मदद से लोगों को खोजने में जुटे हैं। कुछ लोगों को सुरंगों और मलबे से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
खराब मौसम ने बढ़ाई मुश्किल
बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में खराब मौसम, भूस्खलन और पहाड़ी इलाकों में टूटी सड़कें शामिल हैं। कई स्थानों पर लगातार बारिश और नए बाढ़ के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। मौसम में सुधार के बाद हवाई राहत और बचाव अभियान दोबारा शुरू किया गया।इसके अलावा बाढ़ से कई पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण जमीन के रास्ते राहत दलों का पहुंचना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने में अभी और समय लग सकता है।
हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बावजूद राहत अभियान में हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में 3,700 से अधिक लोगों को बचाया गया है। इनमें कई लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया, जबकि कुछ लोगों को मलबे और सुरंगों से बाहर निकाला गया।नेपाल सरकार और सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के हजारों जवान प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। उनका मुख्य लक्ष्य लापता लोगों को ढूंढना, घायलों को अस्पताल पहुंचाना और दूरदराज के इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाना है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने के कारण भारत भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाल सरकार के साथ संपर्क किया जा रहा है और लापता भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाई जा रही है।रिपोर्टों के मुताबिक भारत ने राहत सामग्री, मेडिकल सहायता और बचाव संबंधी मदद उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए हैं। भारतीय नागरिकों की पहचान और उनके परिवारों तक जानकारी पहुंचाना भी प्राथमिकता में है।
आगे भी बना हुआ है खतरा
विशेषज्ञों और अधिकारियों की चिंता सिर्फ मौजूदा बाढ़ तक सीमित नहीं है। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों और बर्फ से बनी झीलों में बदलाव के कारण अचानक बाढ़ का खतरा बना रहता है। मौजूदा आपदा के बाद भी एकत्रित पानी और अस्थिर भूभाग के कारण नए बाढ़ के खतरे की निगरानी की जा रही है।प्रशासन सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य तकनीकों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रहा है। लोगों को नदियों और अस्थिर पहाड़ी क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
राहत और बचाव पर पूरी नजर
नेपाल की इस त्रासदी ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। आंकड़े लगातार बदल रहे हैं और कई इलाकों में बचाव अभियान अभी जारी है।ऐसे में आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बचाव दल मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जाए और प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द पहुंचाई जा सकें।
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