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Swadeshi Movement: हैंडलूम को ग्लोबल पहचान दिलाने की पहल, पीएम मोदी ने युवाओं को दिया GRWM चैलेंज

Swadeshi Movement, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश के युवाओं से भारतीय हैंडलूम को बढ़ावा देने की अपील की है। इस बार उन्होंने पारंपरिक संदेश देने के बजाय सोशल मीडिया के लोकप्रिय ट्रेंड GRWM (Get Ready With Me) का सहारा लिया।

Swadeshi Movement : ‘वोकल फॉर लोकल’ का नया अंदाज, पीएम मोदी ने GRWM रील के जरिए हैंडलूम अपनाने की अपील की

Swadeshi Movement, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश के युवाओं से भारतीय हैंडलूम को बढ़ावा देने की अपील की है। इस बार उन्होंने पारंपरिक संदेश देने के बजाय सोशल मीडिया के लोकप्रिय ट्रेंड GRWM (Get Ready With Me) का सहारा लिया। इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक विशेष रील में प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे हैंडलूम परिधान पहनकर GRWM वीडियो बनाएं और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करें। उनका उद्देश्य भारतीय बुनकरों को प्रोत्साहन देना और युवाओं को देश की समृद्ध वस्त्र परंपरा से जोड़ना है।प्रधानमंत्री की यह अपील राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) के अवसर पर सामने आई है, जिसे हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत और लाखों बुनकर परिवारों के योगदान को सम्मान दिया जाता है।

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क्या है GRWM ट्रेंड?

GRWM (Get Ready With Me) सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर बेहद लोकप्रिय कंटेंट फॉर्मेट है। इसमें लोग किसी खास अवसर के लिए तैयार होने की पूरी प्रक्रिया कपड़ों का चयन, स्टाइलिंग और अंतिम लुकवीडियो के रूप में साझा करते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने इसी ट्रेंड को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए युवाओं से आग्रह किया कि वे हैंडलूम से बने कपड़े पहनें, उनकी कहानी बताएं और भारतीय वस्त्रों की खूबसूरती दुनिया तक पहुंचाएं।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री ने अपनी इंस्टाग्राम रील में कहा कि भारत का हैंडलूम केवल कपड़ा नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, परंपरा और लाखों बुनकरों की मेहनत का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे फैशन के साथ-साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को भी आगे बढ़ाएं।उन्होंने कहा कि यदि युवा सोशल मीडिया पर हैंडलूम को बढ़ावा देंगे, तो इससे स्थानीय बुनकरों और हस्तकरघा उद्योग को नई पहचान मिलेगी।

क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस?

भारत में हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने की थी।इस तारीख का ऐतिहासिक महत्व भी है। 7 अगस्त 1905 को बंग-भंग आंदोलन के दौरान स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उस समय लोगों ने विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार कर भारतीय कपड़ों और हथकरघा उत्पादों को अपनाने का संकल्प लिया था।इसी ऐतिहासिक घटना की याद में हर वर्ष राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।

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भारत की हैंडलूम विरासत

भारत दुनिया के सबसे बड़े हैंडलूम उत्पादक देशों में से एक है। देश के लगभग हर राज्य की अपनी अलग बुनाई शैली और पारंपरिक वस्त्र हैं।

कुछ प्रमुख भारतीय हैंडलूम परंपराएं—

  • बनारसी सिल्क (उत्तर प्रदेश)
  • चंदेरी (मध्य प्रदेश)
  • कांजीवरम सिल्क (तमिलनाडु)
  • पटोला (गुजरात)
  • पोचमपल्ली इकट (तेलंगाना)
  • पश्मीना (जम्मू-कश्मीर)
  • मुगा सिल्क (असम)
  • बालूचरी साड़ी (पश्चिम बंगाल)

ये वस्त्र न केवल भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी विशेष जगह रखते हैं।

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बुनकरों के लिए क्यों अहम है यह अभियान?

भारत में लाखों परिवार हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं। यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और बड़ी संख्या में महिलाओं को भी रोजगार प्रदान करता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोशल मीडिया के माध्यम से हैंडलूम को बढ़ावा मिलता है, तो इससे घरेलू बिक्री बढ़ सकती है और स्थानीय बुनकरों की आय में सुधार हो सकता है।

सोशल मीडिया और ‘वोकल फॉर लोकल’

पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी कई बार ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का समर्थन कर चुके हैं। उनका मानना है कि यदि युवा स्थानीय उत्पादों को अपनाएंगे और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रमोट करेंगे, तो भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी।GRWM जैसे लोकप्रिय ट्रेंड का उपयोग इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी पारंपरिक भारतीय वस्त्रों से जुड़ सके।

युवाओं में बढ़ रही हैंडलूम की लोकप्रियता

हाल के वर्षों में हैंडलूम फैशन की दुनिया में भी तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कई डिजाइनर, सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भारतीय हैंडलूम परिधान पहनकर उन्हें प्रमोट कर रहे हैं।युवा अब पारंपरिक कपड़ों को आधुनिक स्टाइल के साथ पहनना पसंद कर रहे हैं। इससे हैंडलूम उत्पादों की मांग में भी वृद्धि देखी जा रही है।

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अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

हैंडलूम उद्योग केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उद्योग लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू बाजार में हैंडलूम की मांग बढ़ती है, तो इससे निर्यात, रोजगार और ग्रामीण उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की GRWM वीडियो बनाने की अपील केवल एक सोशल मीडिया ट्रेंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारतीय हैंडलूम को नई पहचान देना और युवाओं को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर दिया गया यह संदेश ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी नई गति देने वाला माना जा रहा है। यदि अधिक से अधिक युवा इस पहल में शामिल होते हैं, तो इसका सीधा लाभ देश के लाखों बुनकरों और हथकरघा उद्योग को मिल सकता है।

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