Silkyara Tunnel Accident: सिलक्यारा टनल निर्माण के दौरान दर्दनाक हादसा, कंक्रीट का हिस्सा गिरा, मजदूर ने गंवाई जान
Silkyara Tunnel Accident, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित सिलक्यारा-बड़कोट (Silkyara-Barkot) सुरंग निर्माण परियोजना में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया।
Silkyara Tunnel Accident : चारधाम परियोजना की सिलक्यारा सुरंग में हादसा, कंक्रीट लाइनिंग गिरने से गई मजदूर की जान
Silkyara Tunnel Accident, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित सिलक्यारा-बड़कोट (Silkyara-Barkot) सुरंग निर्माण परियोजना में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया। निर्माण कार्य के दौरान सुरंग के अंदर कंक्रीट (शॉटक्रीट) लाइनिंग का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से एक मजदूर की मौत हो गई। हादसे के बाद प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने मामले में जांच के आदेश देते हुए निर्माण एजेंसी से सुरक्षा मानकों का पूरा ब्योरा मांगा है।
सुरंग के भीतर हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग के उस हिस्से में हुआ जहां निर्माण और रखरखाव का कार्य चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि बड़कोट की ओर से लगभग 900 मीटर अंदर सुरंग की कंक्रीट लाइनिंग (शॉटक्रीट) का एक ब्लॉक अचानक टूटकर नीचे गिर गया।गिरा हुआ कंक्रीट ब्लॉक सीधे वहां काम कर रहे एक मजदूर की गर्दन पर आ गिरा। गंभीर रूप से घायल मजदूर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
झारखंड का रहने वाला था मजदूर
मृतक मजदूर झारखंड का रहने वाला बताया गया है और वह निर्माण एजेंसी के लिए सुरंग परियोजना में कार्यरत था। हादसे के बाद कंपनी ने उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी है और उन्हें उत्तरकाशी बुलाया गया है। जिला प्रशासन ने कहा है कि मृतक के परिवार को नियमानुसार सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
घटना को गंभीरता से लेते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने बड़कोट के उपजिलाधिकारी (SDM) को विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि—
- कंक्रीट लाइनिंग क्यों टूटी?
- क्या निर्माण एजेंसी ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया था?
- हादसा तकनीकी कारणों से हुआ या किसी प्रकार की लापरवाही हुई?
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
SDRF और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने सुरंग के भीतर मौजूद अन्य मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया।फिलहाल निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
पहले भी चर्चा में रह चुकी है सिलक्यारा सुरंग
सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग परियोजना इससे पहले नवंबर 2023 में देशभर की सुर्खियों में आई थी, जब सुरंग का एक हिस्सा ढहने के कारण 41 मजदूर 17 दिनों तक अंदर फंस गए थे। लंबे और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।उस घटना के बाद सुरंग निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। अब एक बार फिर इस परियोजना में हुए हादसे ने निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चारधाम परियोजना का अहम हिस्सा
करीब 4.5 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग केंद्र सरकार की चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी लगभग 26 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी काफी घट जाएगा।यह परियोजना धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, चट्टानों की संरचना और लगातार बदलती प्राकृतिक स्थिति के कारण निर्माण एजेंसियों को अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ती है।ऐसे में यह जांच का विषय होगा कि जिस स्थान पर कंक्रीट लाइनिंग गिरी, वहां नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण समय पर किए गए थे या नहीं। यदि सुरक्षा मानकों में कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
आगे क्या होगा?
जिला प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। वहीं, निर्माण एजेंसी से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि मृतक के परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उत्तरकाशी की सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग में हुआ यह हादसा एक बार फिर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों के महत्व को रेखांकित करता है। कंक्रीट लाइनिंग का ब्लॉक गिरने से एक मजदूर की जान चली गई, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी कारणों से हुआ या सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की चूक इसकी वजह बनी।
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