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Bhojshala Case: धार भोजशाला केस पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- संवेदनशील है मामला, धैर्य जरूरी

Bhojshala Case, मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए दोनों पक्षों से धैर्य बनाए रखने की अपील की। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है

Bhojshala Case : भोजशाला विवाद पर SC की बड़ी टिप्पणी, अदालत ने दोनों पक्षों से की शांति बनाए रखने की अपील

Bhojshala Case, मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए दोनों पक्षों से धैर्य बनाए रखने की अपील की। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और इसे पूरी सावधानी के साथ सुलझाने की आवश्यकता है। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस विवाद का जल्द समाधान निकालने के लिए तैयार है और आवश्यकता पड़ने पर रोजाना सुनवाई (Day-to-Day Hearing) भी कर सकती है।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भोजशाला विवाद बेहद संवेदनशील है। अदालत ने कहा कि न्यायालय में कही गई हर बात का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए प्रत्येक टिप्पणी और आदेश बेहद सोच-समझकर दिया जाएगा।पीठ ने दोनों पक्षों से कहा कि वे संयम और धैर्य रखें। अदालत ने भरोसा दिलाया कि वह इस विवाद का जल्द समाधान निकालने के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर मामले की लगातार सुनवाई करेगी।

अंतरिम व्यवस्था रहेगी लागू

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जो अंतरिम व्यवस्था लागू है, वह अंतिम फैसले तक जारी रहेगी। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी अंतरिम व्यवस्था से किसी भी पक्ष के अधिकारों पर अंतिम निर्णय का प्रभाव नहीं पड़ेगा।सुनवाई के दौरान अदालत ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज के लिए विवादित परिसर के निकट एक अलग खुली जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। यह व्यवस्था केवल अंतरिम होगी और अंतिम निर्णय आने तक ही प्रभावी रहेगी।

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मामला आखिर है क्या?

धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। दोनों समुदाय लंबे समय से इस स्थल पर धार्मिक अधिकारों का दावा करते रहे हैं।यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है और इसके उपयोग को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक व्यवस्थाएं बनाई जाती रही हैं।

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हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद

मई 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि विवादित भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप मां सरस्वती के मंदिर का है। अदालत ने 2003 के उस एएसआई आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी।हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जबकि हिंदू पक्ष ने भी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय में कैविएट दाखिल की थी।

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संवेदनशीलता पर कोर्ट का जोर

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के धार्मिक मामलों में अदालत की हर टिप्पणी का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए न्यायालय किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का विस्तार से अध्ययन करेगा।अदालत ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार का तनाव पैदा होने से बचाने के लिए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

एएसआई को भी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय आने तक वह न्यायालय की अनुमति के बिना परिसर में किसी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव नहीं करेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति को बनाए रखना जरूरी है ताकि अंतिम सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हो सके।

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दोनों पक्षों की दलीलें

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले से उनके धार्मिक अधिकार प्रभावित हुए हैं और इसलिए उसे चुनौती दी गई है। दूसरी ओर हिंदू पक्ष का तर्क है कि भोजशाला ऐतिहासिक रूप से मां सरस्वती का मंदिर है और हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी भी पक्ष के दावों पर अंतिम टिप्पणी करने से इनकार किया है और कहा है कि सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई के बाद ही अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट अब मामले की विस्तृत सुनवाई करेगा। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो नियमित आधार पर सुनवाई कर विवाद का जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। तब तक अंतरिम व्यवस्था जारी रहेगी और सभी पक्षों को शांति एवं संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है। भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी इस मामले को शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके से सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। फिलहाल दोनों समुदायों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा दिलाया है कि विवाद के समाधान के लिए वह पूरी गंभीरता और प्राथमिकता के साथ सुनवाई करेगा।

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