National union cabinet: इतिहासिक निर्णय, केंद्र सरकार ने ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ किया
National union cabinet, दक्षिण भारत का प्रसिद्ध राज्य केरल अब आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ नाम से जाना जाएगा। केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण नाम परिवर्तन को मंजूरी दे दी है।
National union cabinet : केरल बना ‘केरलम’, मोदी सरकार का अहम फैसला, राज्य का आधिकारिक नाम बदला
National union cabinet, दक्षिण भारत का प्रसिद्ध राज्य केरल अब आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ नाम से जाना जाएगा। केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण नाम परिवर्तन को मंजूरी दे दी है। यह फैसला प्रधानमंत्री Narendra Modi के नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में लिया गया। इस बैठक में केवल नाम परिवर्तन ही नहीं, बल्कि कुल 12,236 करोड़ रुपये की लागत वाले कई बड़े बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई।यह निर्णय लंबे समय से चल रही उस मांग का परिणाम है जिसमें राज्य सरकार और स्थानीय लोगों ने केरल के मूल मलयालम नाम ‘केरलम’ को आधिकारिक रूप से अपनाने की बात कही थी।
विधानसभा पहले ही पारित कर चुकी है प्रस्ताव
राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया अचानक नहीं हुई है। इससे पहले Kerala की विधानसभा में राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। राज्य सरकार और सामाजिक संगठनों का तर्क रहा है कि स्थानीय मलयालम भाषा में प्रदेश को ‘केरलम’ कहा जाता है, इसलिए आधिकारिक नाम भी वही होना चाहिए जो स्थानीय संस्कृति और पहचान को दर्शाता हो।स्थानीय समुदायों का मानना है कि अंग्रेजीकरण के दौरान ‘केरल’ नाम प्रचलन में आया, जबकि पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से सही नाम ‘केरलम’ है। इसीलिए लंबे समय से इसे आधिकारिक रूप देने की मांग की जा रही थी।
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा बिल
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब राज्य के नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राष्ट्रपति ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य विधानसभा की राय के लिए भेजेंगी।
इस प्रक्रिया में निम्न चरण शामिल होंगे:
- राष्ट्रपति द्वारा प्रस्ताव राज्य विधानसभा को भेजा जाएगा
- विधानसभा अपनी राय केंद्र को भेजेगी
- इसके बाद विधेयक संसद में प्रस्तुत किया जाएगा
- संसद से पारित होने के बाद नाम परिवर्तन आधिकारिक हो जाएगा
संसद की स्वीकृति मिलते ही सभी सरकारी दस्तावेजों, मानचित्रों और आधिकारिक अभिलेखों में राज्य का नाम ‘केरलम’ कर दिया जाएगा।
चुनावी माहौल में तेज हुई राजनीतिक बहस
राज्य में आगामी मई माह में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे सांस्कृतिक पहचान और भाषाई सम्मान का विषय बता रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाम परिवर्तन का मुद्दा चुनावी विमर्श का हिस्सा बन सकता है, क्योंकि यह क्षेत्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव से जुड़ा हुआ विषय है।
सेवा तीर्थ कैबिनेट बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में हुई पहली कैबिनेट बैठक में कुल आठ बड़े निर्णय लिए गए। इनमें नाम परिवर्तन के साथ कई महत्वपूर्ण रेल, परिवहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं:
- केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने को मंजूरी
- गोंदिया–जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 5,236 करोड़ रुपये
- पुनारख–किऊल तीसरी-चौथी रेल लाइन के लिए 2,668 करोड़ रुपये
- गम्हरिया–चांडिल रेल लाइन विस्तार हेतु 1,168 करोड़ रुपये
- श्रीनगर में नया एकीकृत हवाईअड्डा टर्मिनल निर्माण हेतु 1,667 करोड़ रुपये
- अहमदाबाद मेट्रो फेज-2B विस्तार के लिए 1,067 करोड़ रुपये
- कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए 430 करोड़ रुपये
- बिजली क्षेत्र में सुधार कार्यक्रमों को स्वीकृति
इन फैसलों को देश के बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है नाम परिवर्तन
‘केरलम’ शब्द मलयालम भाषा में राज्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप को दर्शाता है। भाषाविदों के अनुसार ‘केरलम’ का अर्थ नारियल के पेड़ों की भूमि या समृद्ध हरित प्रदेश से जुड़ा है।
राज्य सरकार का मानना है कि स्थानीय नाम को आधिकारिक मान्यता मिलने से:
- सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी
- क्षेत्रीय भाषा का सम्मान बढ़ेगा
- ऐतिहासिक परंपरा संरक्षित रहेगी
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थानीय नाम स्थापित होगा
भारत में नाम परिवर्तन की परंपरा
भारत में राज्यों और शहरों के नाम स्थानीय भाषा और संस्कृति के अनुरूप बदलने की परंपरा पहले भी रही है। उदाहरण के तौर पर:
- मद्रास → तमिलनाडु
- उड़ीसा → ओडिशा
- बॉम्बे → मुंबई
- कलकत्ता → कोलकाता
इसी क्रम में अब ‘केरल’ से ‘केरलम’ नाम परिवर्तन को भी भाषाई और सांस्कृतिक सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।केंद्र सरकार द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सेवा तीर्थ में आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया यह निर्णय न केवल राज्य की भाषाई पहचान को सम्मान देता है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही स्थानीय मांग को भी पूरा करता है।
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