World Flour Day: आटे का सफर खेत से थाली तक 2026, विश्व आटा दिवस पर खास
World Flour Day, हर साल 20 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व आटा दिवस (World Flour Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य आटे के महत्व को समझाना और यह बताना है कि कैसे आटा हमारे दैनिक जीवन, पोषण,
World Flour Day : सेहतमंद जीवन की नींव है आटा, विश्व आटा दिवस पर जानें खास बातें
World Flour Day, हर साल 20 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व आटा दिवस (World Flour Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य आटे के महत्व को समझाना और यह बताना है कि कैसे आटा हमारे दैनिक जीवन, पोषण, संस्कृति और खाद्य सुरक्षा का आधार है। रोटी, पराठा, ब्रेड, पास्ता, नूडल्स या केक—इन सभी के पीछे आटा ही मुख्य कड़ी है। अनाज से आटे तक और आटे से भोजन तक का यह सफर मानव सभ्यता से गहराई से जुड़ा हुआ है।
विश्व आटा दिवस का इतिहास और शुरुआत
विश्व आटा दिवस की शुरुआत इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ फ्लोर मिलर्स (IAOM) द्वारा की गई थी। इसका मकसद आटा उद्योग, मिलर्स, किसानों और उपभोक्ताओं को एक मंच पर लाकर आटे के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक तरीकों के मेल से आटा उद्योग कैसे विकसित हुआ है।
आटा: मानव जीवन की बुनियाद
आटा केवल एक खाद्य सामग्री नहीं, बल्कि मानव जीवन की बुनियाद है। गेहूं, चावल, मक्का, जौ, बाजरा, ज्वार और रागी जैसे अनाज पीसकर आटा बनाया जाता है। यही आटा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूपों में खाया जाता है। भारत में रोटी और पराठा, यूरोप में ब्रेड, इटली में पास्ता और एशिया में नूडल्स—इन सभी के केंद्र में आटा ही है।
आटे का पोषण महत्व
आटा शरीर को ऊर्जा देने का प्रमुख स्रोत है। इसमें कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। खासकर साबुत अनाज का आटा स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह पाचन को बेहतर बनाता है, वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है और दिल की बीमारियों का खतरा कम करता है। आजकल लोग मैदा की बजाय मल्टीग्रेन और होल व्हीट आटे की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
भारत में आटे का सांस्कृतिक महत्व
भारत में आटा केवल भोजन नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। हर राज्य में आटे से बनने वाले व्यंजन अलग-अलग हैं। उत्तर भारत में गेहूं की रोटी और पराठा, राजस्थान में बाजरे की रोटी, महाराष्ट्र में ज्वार-भाकरी और दक्षिण भारत में चावल के आटे से बने डोसे और इडली—यह विविधता भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति को दर्शाती है।
आधुनिक तकनीक और आटा उद्योग
समय के साथ आटा उद्योग में भी बड़े बदलाव आए हैं। पहले जहां पत्थर की चक्की से आटा पीसा जाता था, वहीं अब आधुनिक रोलर मिल्स और हाई-टेक मशीनों का इस्तेमाल होता है। इससे न केवल आटे की गुणवत्ता बेहतर हुई है, बल्कि उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है। आज फोर्टिफाइड आटा भी उपलब्ध है, जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और अन्य पोषक तत्व मिलाए जाते हैं ताकि कुपोषण से लड़ने में मदद मिल सके।
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खाद्य सुरक्षा में आटे की भूमिका
विश्व आटा दिवस हमें यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि बढ़ती आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा कितनी जरूरी है। आटा लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और इससे बड़ी संख्या में लोगों का पेट भरा जा सकता है। आपदा, महामारी या आर्थिक संकट के समय आटा एक भरोसेमंद खाद्य सामग्री साबित होता है।
विश्व आटा दिवस क्यों है खास
यह दिन किसानों, मिलर्स और खाद्य उद्योग से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मान देने का अवसर है। इसके साथ ही यह उपभोक्ताओं को भी यह समझाने का दिन है कि वे अपने भोजन में किस तरह के आटे का इस्तेमाल कर रहे हैं और उसका स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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आटे को लेकर जागरूकता की जरूरत
आज के समय में जंक फूड और रिफाइंड प्रोडक्ट्स के बढ़ते चलन के बीच यह जरूरी है कि लोग संतुलित और पोषक आटे का चयन करें। बच्चों और युवाओं को साबुत अनाज से बने खाद्य पदार्थों के फायदे समझाना भी बेहद जरूरी है।विश्व आटा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आटा सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, संस्कृति और खाद्य सुरक्षा का मजबूत आधार है।विश्व आटा दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक संदेश है—स्वस्थ भोजन, जागरूक उपभोग और टिकाऊ कृषि का। अगर हम सही आटे का चुनाव करें और अनाज का सम्मान करें, तो न केवल हमारा स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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