Kharmas 2026 Date: दूसरा खरमास 2026, aकब लगेगा खरमास और किन कामों से मिलता है अशुभ फल?
Kharmas 2026 Date, हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास एक विशेष काल माना जाता है, जब सूर्य देव की स्थिति ऐसी हो जाती है कि मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं,
Kharmas 2026 Date : धार्मिक मान्यता, Kharmas 2026 कब से शुरू होगा? इन कार्यों से बचना है जरूरी
Kharmas 2026 Date, हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास एक विशेष काल माना जाता है, जब सूर्य देव की स्थिति ऐसी हो जाती है कि मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह समय खरमास कहलाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान सूर्य का प्रभाव कमजोर हो जाता है, जिसके कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं। इसी वजह से इसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अशुभ काल माना जाता है।
खरमास क्यों आता है? पौराणिक कथा
पुराणों में खरमास को लेकर एक रोचक कथा मिलती है। मान्यता है कि सूर्य देव सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। एक बार घोड़ों की थकान को देखते हुए सूर्य देव ने रथ में कुछ समय के लिए गधों को जोड़ दिया। गधों की चाल धीमी होने के कारण सूर्य की गति भी मंद पड़ गई। सूर्य की इसी धीमी गति वाले काल को खरमास कहा गया।
ज्योतिषीय कारण क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव बृहस्पति की राशियों—धनु और मीन—में प्रवेश करते हैं, तब गुरु ग्रह का प्रभाव कमजोर माना जाता है। बृहस्पति को विवाह, संतान, शिक्षा और अन्य शुभ कार्यों का कारक ग्रह माना गया है। गुरु के कमजोर होने से शुभ कार्यों के लिए समय अनुकूल नहीं रहता, इसलिए इस अवधि में मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है।
खरमास को अशुभ क्यों माना जाता है?
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार खरमास के दौरान सूर्य और गुरु की युति शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती। इस समय किए गए मांगलिक कार्यों में बाधाएं आने की संभावना अधिक होती है। सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी यह काल शुभ नहीं माना गया है। हालांकि, यह समय पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, बल्कि इसे आत्मचिंतन, साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कब है 2026 का दूसरा खरमास?
साल में दो बार खरमास इसलिए आता है क्योंकि सूर्य देव वर्ष में दो बार बृहस्पति की राशियों में गोचर करते हैं। पंचांग के अनुसार वर्ष 2025-26 का पहला खरमास 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक रहा था। वहीं, साल 2026 का दूसरा खरमास 14 मार्च 2026 से शुरू होकर 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इस अवधि में सूर्य देव मीन राशि में विराजमान रहेंगे।
खरमास का आध्यात्मिक महत्व
हालांकि खरमास को मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान की गई पूजा, जप, तप और दान कई गुना फलदायी माने जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह काल आत्मशुद्धि और ईश्वर की भक्ति के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
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खरमास में क्या करना चाहिए?
खरमास के दौरान कुछ विशेष कार्य करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। सूर्य पूजा: प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। तुलसी सेवा: संध्या समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। दान-पुण्य: गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सात्विक जीवन: इस समय सात्विक भोजन करें और संयम, पवित्रता व सदाचार का पालन करें। भगवान विष्णु की पूजा: खरमास में भगवान विष्णु की पूजा, कथा और व्रत विशेष फल प्रदान करते हैं।
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खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?
इस अवधि में कुछ कार्यों से दूरी बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।
मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, मुंडन, नामकरण और जनेऊ जैसे संस्कार न करें।
गृह प्रवेश और निर्माण: नए घर में प्रवेश, भूमि पूजन या निर्माण कार्य शुरू न करें।
तामसिक भोजन: मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से परहेज करें।
नई खरीदारी: वाहन, सोना-चांदी या प्रॉपर्टी की खरीद इस समय टाल देना बेहतर होता है।
नया काम शुरू करना: नया व्यवसाय या नई नौकरी की शुरुआत खरमास में शुभ नहीं मानी जाती।
खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता हो, लेकिन यह समय साधना, दान और आत्मिक उन्नति के लिए अत्यंत लाभकारी है। यदि इस काल में नियमों का पालन किया जाए और धार्मिक गतिविधियों में मन लगाया जाए, तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साल 2026 का दूसरा खरमास 14 मार्च से 13 अप्रैल तक रहेगा, ऐसे में इस अवधि को संयम और भक्ति के साथ बिताना ही सबसे उत्तम माना जाता है।
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