Narcissistic relationships: रिश्तों में नार्सिसिज्म के संकेत, व्यवहार और इसके भावनात्मक असर को समझें
Narcissistic relationships: नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी क्या है और यह रिश्तों को कैसे नुकसान पहुंचाती है? जानें इसके लक्षण, व्यवहार, रिश्तों पर असर और समय रहते पहचान करने के जरूरी संकेत।
Narcissistic relationships: नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी,कैसे यह आपके रिश्ते को धीरे-धीरे तोड़ देती है
Narcissistic relationships ,नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी वाला व्यक्ति शुरुआत में आकर्षक और आत्मविश्वासी लग सकता है, लेकिन समय के साथ उसका व्यवहार रिश्ते को मानसिक रूप से थका देने वाला बना देता है। ऐसे रिश्तों में भावनाओं की अनदेखी, जरूरत से ज्यादा कंट्रोल और समझ की कमी देखने को मिलती है। समय रहते इसकी पहचान करना मानसिक और भावनात्मक सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी क्या है? कैसे यह आपके रिश्ते को धीरे-धीरे तोड़ता है?
रिश्तों में प्यार और समझ दोनों का होना बहुत ज़रूरी है। लेकिन जब आपका साथी नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी से प्रभावित होता है, तो शुरुआत में आकर्षक लगने वाला संबंध समय के साथ भावनात्मक बोझ बन सकता है। नार्सिसिज्म सिर्फ अहंकार नहीं यह एक ऐसी मानसिक प्रवृत्ति है जिसमें इंसान खुद को ही सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण मानने लगता है।
क्या होता है नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी?

नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी का अर्थ होता है ऐसी सोच जिसमें व्यक्ति स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मानता है, लगातार तारीफ़ चाहता है और दूसरे के भावनाओं को समझने या महत्व देने में असमर्थ होता है।
ये लोग शुरुआत में आकर्षक, आत्मविश्वासी और केयरिंग दिखाई दे सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनका व्यवहार रिश्ते को असंतुलित और एकतरफा बना देता है।
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रिश्तों में नार्सिसिज्म के मुख्य लक्षण
1. एकतरफा रिश्ते का अनुभव
नार्सिसिस्ट हमेशा अपनी जरूरतों, चाहतों और भावनाओं पर ज़ोर देते हैं, जबकि दूसरे पार्टनर की भावनाओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
2. प्रशंसा और ध्यान की अतिशय मांग
वे निरंतर तारीफ और मान्यता की चाह रखते हैं और बिना इसे पाए नाराज़ या असहज महसूस करते हैं।
3. सहानुभूति की कमी (Lack of Empathy)
नार्सिसिस्ट अपने साथी की भावनाओं, दुख और ज़रूरतों को समझने में असमर्थ रहते हैं, जिससे साथी इमोशनली अकेला महसूस करता है।

4. गैसलाइटिंग और मानसिक नियंत्रण
वे अक्सर गैसलाइटिंग (partner के अनुभव/यादों को नकारना) का इस्तेमाल करते हैं, जिससे साथी स्वयं पर शक करने लगता है।
5. तेज़-तेज़ देरी से बदलता व्यवहार (Hot-and-Cold)
कभी अत्यधिक प्यार दिखाते हैं, कभी पूरी तरह दूर यह बदलाव साथी को भ्रमित और असुरक्षित बनाता है।
नार्सिसिस्टिक रिश्ते का प्रभाव
भावनात्मक थकावट, साथी निरंतर अपने साथी की जरूरतों को पूरा करते-करते खुद तनाव, चिंता और अवमूल्यन महसूस करता है।
स्वयं पर संदेह, गैसलाइटिंग के कारण व्यक्ति अपनी यादों और निर्णयों पर भरोसा खो देता है।
आत्म-सम्मान में कमी, लगातार आलोचना और अवहेलना साथी के आत्म-सम्मान को गिरा देती है।
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नार्सिसिस्टिक रिश्ते के लाल झंडे
✔ partner सिर्फ अपनी बात सुने
✔ आलोचना नहीं सह पाना
✔ हर निर्णय अकेले लेना
✔ लगातार अधिक प्रशंसा की अपेक्षा
✔ दोस्त-परिवार से दूरी बनाना
✔ सवाल करने पर गुस्सा या चुप्पी ये सभी संकेत हो सकते हैं कि रिश्ता स्वस्थ नहीं है।
क्या आप ऐसे रिश्ते में हैं? जल्दी पहचानें
अगर आपका साथी बार-बार आपकी भावनाओं को महत्व नहीं देता, आपको अकेला महसूस कराता है, या आप स्वयं को बदलते हुए महसूस करते हैं ,तो यह नार्सिसिस्टिक व्यवहार का संकेत हो सकता है।

कैसे सामना करें? (संक्षिप्त उपाय)
सीमाएँ तय करें: स्पष्ट रूप से बताएं कि क्या बर्दाश्त करेंगे और क्या नहीं।
स्व-देखभाल: अपनी भावनाओं और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
समर्थन प्रणाली बनाएं: दोस्तों, परिवार या काउंसलर से बात करें।
ज़रूरत पड़े तो दूरी: अगर रिश्ता अत्यधिक टॉक्सिक हो जाता है, तो अलग होने पर विचार करना आपका अधिकार है।
समापन विचार
नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी सिर्फ स्वार्थी व्यवहार नहीं है यह एक मानसिक व्यवहार पैटर्न है जिसका असर रिश्तों पर गहरा होता है। समझ और सीमाएँ बनाकर आप अपनी भावनात्मक ज़िंदगी को सुरक्षित रख सकती/सकते हैं।
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