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World Glaucoma Week: अंतर्राष्ट्रीय ग्लॉकोमा सप्ताह 2026, आंखों की सुरक्षा और अंधेपन से बचाव

World Glaucoma Week, World Glaucoma Week एक अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान है, जिसे हर साल मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में ग्लॉकोमा (Glaucoma) के प्रति जागरूकता फैलाना,

World Glaucoma Week : क्यों है ग्लॉकोमा जागरूकता जरूरी?

World Glaucoma Week, World Glaucoma Week एक अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान है, जिसे हर साल मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में ग्लॉकोमा (Glaucoma) के प्रति जागरूकता फैलाना, समय पर पहचान और इलाज के महत्व को समझाना है। यह सप्ताह खासकर आंखों के स्वास्थ्य और दृष्टि संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करता है।ग्लॉकोमा आंखों की एक गंभीर बीमारी है, जो अक्सर धीरे-धीरे दृष्टि खोने का कारण बनती है। अगर इसे समय पर नहीं पहचाना और इलाज नहीं किया गया, तो यह अंधेपन तक ले जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ग्लॉकोमा दुनिया में अंधेपन का एक प्रमुख कारण है।

ग्लॉकोमा क्या है?

ग्लॉकोमा एक ऐसी नेत्र रोग है जिसमें आंख के अंदर का द्रव (aqueous humor) सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इससे आंख में दबाव बढ़ता है, जिसे इन्ट्राऑकुलर प्रेशर (IOP) कहा जाता है। बढ़ते दबाव के कारण ऑप्टिक नर्व पर असर पड़ता है और धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होने लगती है।

ग्लॉकोमा के मुख्य प्रकार हैं:

  1. ओपन-एंगल ग्लॉकोमा (Open-Angle Glaucoma):
    सबसे आम प्रकार। इसे “साइलेंट थिफ़ ऑफ़ विज़न” कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरणों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते।
  2. क्लोज़्ड-एंगल ग्लॉकोमा (Closed-Angle Glaucoma):
    यह अचानक और गंभीर रूप से दृष्टि प्रभावित कर सकता है। इसमें आंख में तेज दर्द, धुंधली दृष्टि और सिर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

वर्ल्ड ग्लॉकोमा वीक का उद्देश्य

World Glaucoma Week हर साल 6 से 12 मार्च के बीच मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों में ग्लॉकोमा के प्रति सकारात्मक जागरूकता और समय पर जांच की आदत डालना है।

मुख्य उद्देश्य हैं:

  • लक्षणों की जानकारी देना: लोग समझें कि धुंधली दृष्टि, आंख में दर्द, सिर दर्द या रोशनी में समस्या ग्लॉकोमा के संकेत हो सकते हैं।
  • समय पर जांच: ग्लॉकोमा का शुरुआती चरण पहचानना बहुत जरूरी है क्योंकि सही समय पर इलाज से दृष्टि को बचाया जा सकता है।
  • अंधेपन से बचाव: ग्लॉकोमा के कारण होने वाले स्थायी अंधेपन को रोका जा सकता है।
  • सकारात्मक स्वास्थ्य व्यवहार: लोगों को नियमित आंखों की जांच, सही खानपान और जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना।

ग्लॉकोमा के लक्षण

ग्लॉकोमा शुरुआती चरण में अक्सर लक्षण नहीं दिखाता, इसलिए इसे साइलेंट डिज़ीज़ भी कहा जाता है। लेकिन कुछ संकेत होते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है:

  • धीरे-धीरे दृष्टि का कम होना, खासकर किनारों से
  • तेज रोशनी या अंधेरे में दृष्टि में समस्या
  • आंख में दबाव या दर्द
  • सिर दर्द या उल्टी
  • धुंधली दृष्टि और रंग पहचानने में कठिनाई

अगर इन लक्षणों में से कोई दिखाई दे, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

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ग्लॉकोमा का इलाज

ग्लॉकोमा का इलाज समय पर और विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाना चाहिए। आमतौर पर इसका इलाज तीन तरीके से किया जाता है:

  1. दवाई (Medication):
    आंख में दबाव कम करने वाली आंख की दवाइयाँ।
  2. लेजर थेरेपी (Laser Therapy):
    आंख के ड्रेनज सिस्टम को खोलने के लिए लेजर तकनीक का इस्तेमाल।
  3. सर्जरी (Surgery):
    जब दवाई और लेजर काम नहीं करते, तब ऑप्टिक नर्व को सुरक्षित रखने के लिए सर्जरी की जाती है।

सही समय पर इलाज से दृष्टि को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।

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ग्लॉकोमा से बचाव के उपाय

हालांकि कुछ प्रकार का ग्लॉकोमा जन्मजात या आनुवंशिक हो सकता है, लेकिन कुछ सावधानियाँ अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है:

  • नियमित नेत्र परीक्षण करवाना, खासकर 40 साल से ऊपर के लोगों के लिए
  • आंखों में लगातार दबाव महसूस होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना
  • हेल्दी डाइट और पर्याप्त नींद लेना
  • आंखों की सुरक्षा के लिए धूप में चश्मा पहनना और कंप्यूटर स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से बचना
  • धूम्रपान और शराब से बचाव

वर्ल्ड ग्लॉकोमा वीक के दौरान गतिविधियाँ

विश्वभर में इस सप्ताह में स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान और नेत्र परीक्षण आयोजित किए जाते हैं।

  • स्कूल और कॉलेज में ग्लॉकोमा के बारे में जानकारी दी जाती है।
  • अस्पतालों में फ्री नेत्र जांच शिविर लगाए जाते हैं।
  • सोशल मीडिया और टीवी पर ग्लॉकोमा जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
  • डॉक्टर और विशेषज्ञ सेमिनार आयोजित कर लोगों को सलाह देते हैं।

इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य है कि लोग समय पर जांच करवाएँ और ग्लॉकोमा से होने वाले अंधेपन से बच सकें।

World Glaucoma Week केवल जागरूकता का सप्ताह नहीं है, बल्कि यह आंखों के स्वास्थ्य और दृष्टि सुरक्षा का संदेश भी है। ग्लॉकोमा जैसे साइलेंट डिज़ीज़ से बचने के लिए समय पर जांच, सही इलाज और जागरूकता बेहद जरूरी है। इस सप्ताह को मनाकर हम यह संदेश फैलाते हैं कि दृष्टि का महत्व अनमोल है, और इसके लिए जागरूक होना और समय पर कदम उठाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। अगर हम ग्लॉकोमा के लक्षणों को पहचानें और इलाज कराएँ, तो अंधेपन जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। इसलिए इस सप्ताह हर किसी को अपने और अपने परिवार की आंखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

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